भूमि अधिग्रहण कानून पर गठित संविधानिक पीठ का नेतृत्व करेंगे जस्टिस अरुण मिश्रा
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों को चुनौती देने संबंधी मामले की संविधान पीठ में सुनवाई से अलग नहीं होंगे। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने फैसला सुनाया और कहा कि मैं मामले की सुनवाई से अलग नहीं हट रहा हूं।
कई किसान संगठनों और व्यक्तियों ने मामले की सुनवाई में न्यायमूर्ति मिश्रा के शामिल होने पर आपत्ति जताई है। उनकी दलील है कि वह पिछले साल फरवरी में शीर्ष अदालत की तरफ से सुनाए गए फैसले में पहले ही अपनी राय रख चुके हैं।
संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी, न्यायमूर्ति विनीत सरण, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट शामिल हैं। संविधान पीठ ने मामले से जुड़े पक्षों से कानूनी प्रश्न सुझाने को कहा है जिन पर अदालत फैसला सुनाएगी। यह संवैधानिक पीठ कानून में उचित मुआवजे और पारदर्शिता पर सुनवाई करेगी।
Supreme Court judge Justice Arun Mishra refuses to recuse himself from heading a Constitution Bench hearing the matters related to interpretation of Section 24 of the Right to Fair Compensation, Transparency in Land Acquisition and Rehabilitation and Resettlement Act 2013. pic.twitter.com/9O3VDRDCQ4
— ANI (@ANI) October 23, 2019