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जस्टिस एके सीकरी ने ठुकराया सरकार का यह प्रस्ताव, अब नहीं होंगे सीएसए ट्रिब्यूनल के सदस्य

Sun, 13 Jan 2019 10:25 PM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Sun, 13 Jan 2019 10:25 PM IST
सार

  • सीएसए ट्रिब्यूनल के सदस्य के लिए केंद्र सरकार ने किया था नामित
  • आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने में थी अहम भूमिका 
  • ट्रिब्यूनल सदस्य के संभावित नॉमिनेशन पर सवाल उठा रही थी कांग्रेस 
  • कांग्रेस के विवादों और ट्वीट वार के बाद जस्टिस सीकरी ने प्रस्ताव ठुकराया

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Justice AK Sikri has withdrawn his consent from the post of president/member in CSA  Tribunal
justice sikri

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस एके सीकरी ने कॉमनवेल्थ सेक्रेट्रिएट आर्बिटल ट्रिब्यूनल के सदस्य का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। उन्होंने लिखित में अपना नाम वापस ले लिया है। कहा जा रहा था कि केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही उन्हें सीएसए ट्रिब्यूनल(CSAT)के सदस्य पद के लिए नामित करने का निर्णय लिया था। 
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सीबीआई के निदेशक पद से आलोक वर्मा को हटाए जाने में जस्टिस सीकरी की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद से कांग्रेस लगातार उनकी भूमिका पर सवाल उठा रही थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी विवाद के चलते जस्टिस सीकरी ने अपना नाम वापस ले लिया। 
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कांग्रेस लगातार उठाती रही सवाल, किया ट्वीट वार 

ट्रिब्यूनल के संभावित सदस्य होने पर राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा  है। राफेल विमान घोटाला का आरोप लगाते हुए उन्होंने रविवार को ट्वीट किया कि राफेल घोटाला को कवर करने के लिए पीएम मोदी जी हर कुछ कर गुजरने को तैयार हैं। राहुल गांधी ने वही आरोप दोहराया कि पीएम मोदी डर से भाग रहे हैं। 

इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने भी सरकार पर आरोप लगाए थे। उन्होंने रविवार को कहा था कि सरकार को उक्त ट्रिब्यूनल के खाली पड़े पद पर न्यायमूर्ति सिकरी को नामित करने पर ‘काफी बातों का जवाब देने’ की जरूरत है।

क्या है कॉमनवेल्थ ट्रिब्यूनल, जान लीजिए

Justice AK Sikri has withdrawn his consent from the post of president/member in CSA  Tribunal
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कॉमनवेल्थ सेक्रेट्रिएट आर्बिटल ट्रिब्यूनल विश्व के 53 देशों के बीच किसी भी विवाद का निपटारा करने वाली न्यायिक संस्था है। इसमें अध्यक्ष समेत आठ सदस्य होते हैं, जिनका चुनाव सदस्य देशों की सरकारें करती हैं। बेहतर छवि वाले उच्च न्यायिक पदों पर रह चुके या फिर दस साल तक कानून के क्षेत्र में काम कर चुके व्यक्ति सदस्य होते हैं। इस ट्रिब्यूनल में एक पद खाली है, जबकि कुछ सदस्य आनेवाले कुछ महीनों में रिटायर होनेवाले हैं। इस प्रतिष्ठित ट्रिब्यूनल में सदस्यों को चार सालों के लिए नियुक्त किया जाता है, जो कि आगे और भी बढ़ाया जा सकता है। 

आलोक वर्मा को फिर से हटाए जाने में थी अहम भूमिका 

सीबीआई के निदेशक पद से आलोक वर्मा को हटाए जाने में जस्टिस सीकरी की अहम भूमिका रही थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आलोक वर्मा फिर से निदेशक पद पर बहाल हुए। बीते बुधवार को उन्होंने पदभार संभाला था, लेकिन सेलेक्ट कमिटी की आम राय के बाद महज 36 घंटे के भीतर उन्हें फिर से पद से हटा दिया गया। इस कमेटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा जस्टिस सीकरी सदस्य थे। पीएम मोदी और खड़गे की राय अलग-अलग होने की स्थिति में उनका वोट निर्णायक साबित हुआ था। 
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