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तय मानकों से ज्यादा वसा, नमक और ट्रांसफैट वाला जंक फूड कर रहा देश को बीमार

Wed, 18 Dec 2019 05:48 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 18 Dec 2019 05:48 AM IST
सार

  • बर्गर-पिज्जा से लेकर चिप्स तक कर रहे हैं स्वास्थ से खिलवाड़ 
  • चिप्स, बर्गर जैसे फास्ट फूड में वसा व नमक का खतरनाक स्तर
  • सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की एक रिपोर्ट में हुआ खुलासा
  • भारतीय बाजार में उपलब्ध फास्टफूड मानकों से बिलकुल विपरीत

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Junk food with exceeding fat, salt and trans fat is making people sick in India
जंक फूड - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

देश में बिकने वाले चिप्स, बर्गर, पिज्जा जैसे फास्ट फूड में वसा और नमक खतरनाक स्तर तक प्रयोग में लाए जा रहे हैं। यह मानव स्वास्थ के लिए हानिकारक हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य पदार्थ में पोषण संबधी जानकारी  हर पैक पर साफतौर पर पढ़े जाने लायक लेबल लगाने के लिए सख्त मानक और मजबूत कानून की जरूरत है।

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इस शोध के नतीजे जारी करते हुए सीएसई की महानिदेशक सुनिता नारायण ने कहा हमने सभी पैकेज्ड फूड और फॉस्टफूड के नमूनों में नमक और वसा के खतरनाक स्तर पाए हैं। जो हमने परीक्षण किए हैं। उन्होंने कहा आम जन को यह जानने का अधिकार है कि पैकेज में हमें क्या परोसा जा रहा है। लेकिन इस पर एफएसएसएआई की भूमिका बहुत सार्थक नहीं है। क्योंकि उसने अब तक अपने स्वयं के मसौदा लेबलिंग विनियमन को अधिसूचित नहीं किया है।
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उन्होंने कहा यह फॉस्टफूड निर्माताओं के दबाव के कारण हो रहा है, जो कि स्वीकार्य नहीं है। यह जानने के लिए हमारे अधिकार और स्वास्थ से समझौता कर रहा है। नारायण ने कहा खाद्य सुरक्षा मानकों, लेबलिंग और प्रदर्शन विनियमों के मसौदे को अधिसूचित किए जाने का 2013 से इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने कहा पिछले छह सालों में एफएसएसएआई एक के बाद एक समिति का गठन करता जा रहा है। 2018 में अंतिम ड्राफ्ट के मसौदे का दावा किया गया। लेकिन इसके बाद भी इसे संशोधित किया गया। 

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नामी कंपनियों के उत्पाद भी मानक के अनुरूप नहीं

जांच में पाया गया जो फास्टफूड अभी भारतीय बाजार में उपलब्ध हैं। उसमें से ज्यादातर भारतीय खाद्य सुरक्षा के मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के तय मानकों से बिलकुल विपरीत है। शीतल-पेय में कीटनाशक, ब्रेड में पोटेशियम ब्रोमेट, शहद और चिकन में एंटीबायोटिक्स बहुतायत में प्रयोग हो रहे हैं। इस अध्ययन में ईएमएल ने 33 लोकप्रिय फास्टफूड्स में नमक, वसा, ट्रांसफैट और कार्बोहाइड्रेट की जांच की। जिसमें चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, और तुरंत बनने वाले सूप के 14 नमूने लिए । इसके अलावा बर्गर, फ्राइज, फ्राइड चिकन, पिज्जा, सैंडविच के नमूने शामिल हैं। इन नमूनों को राजधानी स्थिति सेंटरों से लिया गया जहां से इन्हें पूरे देश में सप्लाई के लिए भेजा जाता है। 

टीम सीएसई ने दावा किया कि एक मल्टीग्रेन चिप्स का विज्ञापन एक नामी क्रिकेटर करता है। इसके 30 ग्राम चिप्स में एक ग्राम नमक था जो तय मानकों से काफी ज्यादा था। यानि यह एक दिन के पूरे भोजन के नमक का दोगुना है। हल्दीराम के क्लासिक नट क्रैकर्स में सबसे अधिक नमक है। इंस्टेंट नूडल्स, सूप, मैगी और नॉर के उत्पादों में भी नमक का स्तर ज्यादा पाया गया। इसके अलावा बर्गर किंग, पिज्जा हट, डोमिनोज पिज्जा और सबवे के सैंडविच में ज्यादा वसा, नमक व अन्य तत्व हैं।

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