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IAF Rape Case: जूनियर महिला अफसर ने वायुसेना की इंटरनल कमेटी पर उठाए सवाल, सेना में भी हो POSH कमेटी

Wed, 11 Sep 2024 12:47 PM IST
Harendra Chaudhary हरेंद्र चौधरी
Updated Wed, 11 Sep 2024 12:47 PM IST
सार

एयरफोर्स प्रवक्ता का कहना है कि वे इस मामले पर ज्यादा कुछ बोलना उचित नहीं समझते है, क्योंकि यह मामला कोर्ट के अधीन है। पुलिस इस मामले में अपनी जांच कर रही है। इस मामले में बड़गाम थाने की पुलिस ने श्रीनगर वायु स्टेशन से संपर्क किया था। जांच में पूरी तरह से सहयोग किया जा रहा है। 

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Junior woman officer raised questions on IAF internal committee there should be POSH committee in army too
IAF Case - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारतीय वायुसेना के श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन में तैनात महिला फ्लाइंग अफसर ने अपने साथ हुए दुष्कर्म मामले में   एयरफोर्स स्टेशन की गठित इंटरनल कमेटी पर सवाल उठाए हैं। जूनियर महिला अफसर ने उसी स्टेशन पर तैनात विंग कमांडर पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए बडगाम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता ने स्टेशन के वरिष्ठ भारतीय वायुसेना अधिकारियों पर उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि एयरफोर्स स्टेशन के सीनियर अफसरों को इंटरनल कमेटी बनाने में दो महीने का वक्त क्यों लगा, जबकि पीड़ित फ्लाइंग अफसर पिछले दो वर्षों से यौन उत्पीड़न और मानसिक यातना झेल रही है। 

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इंटरनल कमेटी पर सवालिया निशान
इस मामले में पीड़िता के वकील रिटायर्ड कर्नल अमित कुमार ने अमर उजाला से हुई बातचीत में बताया कि पीड़िता को आज मजिस्ट्रेट के सामने बयान देने के लिए बुलाया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में इंटरनल कमेटी पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं कि दोषी अफसर के खिलाफ उन्होंने क्या कार्रवाई की। एयरफोर्स स्टेशन को इंटरनल कमेटी बनाने में दो महीने लग गए औऱ यह कमेटी 2 अप्रैल, 2024 को बनाई गई। पीड़िता को इंसाफ क्यों नहीं दिया गया। कर्नल अमित के मुताबिक स्टेशन अधिकारियों ने पीड़िता का साथ देने की बजाय आरोपी विंग कमांडर का साथ दिया। पीड़िता के कई बार जोर देने पर भी उसकी मेडिकल जांच नहीं की गई। इंटरनल कमेटी के अंतिम दिन ही उसकी जांच कराई गई। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने  इंटरनल कमेटी से एक गवाह को बुलाने का आग्रह किया था, लेकिन उसे बयान देने से पहले ही कैंप से भगा दिया गया। 
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POSH से दूर क्यों हैं सेनाएं?
कर्नल अमित कुमार के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब देश के हर संस्थान में POSH (प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट) कमेटी होती है, तो भारतीय सेनाएं इससे दूर क्यों हैं। सेना में यौन अपराध, छेड़छाड़ और दुष्कर्म के मामलों में सेनाओं में इंटरनल कमेटियां बनाई जाती हैं, लेकिन इन कमेटियों में शामिल होने वाले सदस्य सेना के अधिकारी ही होते हैं और आरोपी का पक्ष लेते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। पीड़िता जूनियर अफसर है और आरोपी वायुसेना का वरिष्ठ अफसर है। ऐसे में पीड़िता को न्याय कैसे मिलेगा। जबकि पोश कमेटी में संस्थान के बाहर के सदस्य भी होते हैं, और इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा होनी चाहिए। 
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इंटरनल कमेटी ने दिया ये जवाब
अमर उजाला को मिली एफआईआर की कॉपी में शिकायतकर्ता ने लिखा है कि इंटरनल कमेटी ने बाद में कहा कि चश्मदीद गवाहों के न होने से यह 'अनिश्चित है कि घटना हुई थी या नहीं'। जांच 15 मई को समाप्त हो गई और इस मामले में 'आज तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है और पीड़िता को कोई सूचना नहीं दी गई है।' महिला अधिकारी का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि भारतीय वायुसेना के अधिकारियों की तरफ से आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, तो उन्हें मजबूरन जम्मू-कश्मीर पुलिस में एफआईआर दर्ज करानी पड़ी।

वहीं एयरफोर्स प्रवक्ता का कहना है कि वे इस मामले पर ज्यादा कुछ बोलना उचित नहीं समझते है, क्योंकि यह मामला कोर्ट के अधीन है। पुलिस इस मामले में अपनी जांच कर रही है। इस मामले में बड़गाम थाने की पुलिस ने श्रीनगर वायु स्टेशन से संपर्क किया था। जांच में पूरी तरह से सहयोग किया जा रहा है। 

ऐसी शिकायतों पर गंभीर हो रक्षा मंत्रालय
कर्नल अमित कुमार का कहना है कि हमें यह समझना चाहिए कि ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए कितनी हिम्मत चाहिए। उन्होंने कहा, वह एक जूनियर अधिकारी है और युवा है। उसे मौजूदा कानूनों और कार्रवाइयों के बारे में ज्यादा जानकारी नही है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों से निपटने में कमांडिंग ऑफिसर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब पीड़िता ने मुझे उसके साथ हो रहे अत्याचार और उत्पीड़न के बारे में बताया, तो मैं हैरान रह गया। महिलाओं की गरिमा के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। भारतीय वायुसेना के अफसरों को मेरी सलाह है कि निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए उसे वर्तमान यूनिट से अलग कर दिया जाना चाहिए। साथ ही, रक्षा मंत्रालय को ऐसी गंभीर शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया न देने के लिए जवाबदेही पर एक मजबूत नीति बनानी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है कानूनी सलाहकारों और कर्मचारियों को लोक सेवकों से संबंधित मौजूदा कानूनों के तहत जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, स्वतंत्र जांच करते समय पुलिस अधिकारियों को स्थानीय कमांडरों की बातों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनके काम से असंतुष्ट होने के चलते ही पीड़ित को बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। 


मानसिक सदमे में चली गई पीड़िता
वहीं, पीड़िता ने इस मामले में बडगाम पुलिस स्टेशन में 8 सितंबर को आईपीसी की धारा 376 (2) के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। पीड़िता की एफआईआर भारतीय न्याय संहिता में इसलिए दर्ज नहीं की गई क्योंकि यह घटना 1 जनवरी, 2024 को बीएनएस लागू होने से पहले हुई थी। महिला अधिकारी ने आरोप लगाया है कि पिछले दो सालों से उसके साथ लगातार यौन उत्पीड़न और मानसिक यातना दी जा रही थी। 31 दिसंबर, 2023 को ऑफिसर्स मेस में नए साल की र्टी में उनके सीनियर ने पूछा कि क्या उन्हें उपहार मिला है। जब उसने कहा कि उसे नहीं मिला, तो विंग कमांडर उसे अपने साथ कमरे में ले गए। आरोप है कि 01 जनवरी की रात दो बजे सीनियर ने उसे सेक्सुअल एक्ट के लिए मजबूर किया और छेड़छाड़ की। महिला अधिकारी ने अपनी शिकायत में कहा कि सेना के माहौल में नया होने के कारण मैं मानसिक सदमे में चली गई। मैं शर्मिंदा थी और... इस हद तक टूट गई थी... रिपोर्ट करने की हिम्मत नहीं थी। मैं मानसिक पीड़ा का वर्णन नहीं कर सकती, एक अविवाहित लड़की होने के नाते...इस तरह के जघन्य व्यवहार के साथ.. घटना और बुरे सपने ने मुझे इस दुविधा में डाल दिया कि क्या चर्चा करूं या चुप रहूं, आखिरकार मैंने फैसला किया और लड़ने का फैसला किया।

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