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पूर्व चीफ जस्टिस बोले : कई चुनौतियों का सामना कर रही न्यायपालिका, इसके खिलाफ एकजुट हो न्यायिक बिरादरी

Sun, 05 Mar 2023 01:48 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Sun, 05 Mar 2023 01:48 PM IST
सार

पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा, 'न्यायपालिका को आज विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए हमें एक न्यायिक बिरादरी के रूप में मजबूत होना होगा। हमें हर तरह के दबाव, हमले या किसी भी तरह के हस्तक्षेप को रोकना होगा।'

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Judiciary dealt with attempts at interference appropriately to ensure its independence: Former CJI Lalit
पूर्व सीजेआई यूयू ललित - फोटो : ANI

विस्तार

पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित का न्यायपालिका की आजादी को लेकर बड़ा बयान आया है। कलकत्ता में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व चीफ जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि न्यायपालिका ने काफी चुनौतियों का सामना किया है। अगर कोई न्यायपालिका की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने की कोशिश करता है तो उनसे उचित तरीकों से निपटा भी जाता है। जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि एक फलते-फूलते लोकतंत्र के लिए एक स्वतंत्र न्यायपालिका होनी चाहिए क्योंकि विवाद समाधान के माध्यम से ही समाज को कानून के शासन द्वारा शासन का आश्वासन दिया जाता है।
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और क्या बोले जस्टिस यूयू ललित? 
पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा, 'न्यायपालिका को आज विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए हमें एक न्यायिक बिरादरी के रूप में मजबूत होना होगा। हमें हर तरह के दबाव, हमले या किसी भी तरह के हस्तक्षेप को रोकना होगा।'
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शनिवार की शाम कलकत्ता में भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा 'स्वतंत्र न्यायपालिका: एक जीवंत लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अदालती फैसलों के कई उदाहरण हैं जो कार्यकारी हस्तक्षेप के अधीन हैं, लेकिन इन्हें सुनिश्चित करने के लिए उचित तरीके से निपटाया गया है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता।
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पूर्व CJI ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के गुण विवाद समाधान के उद्देश्य से निष्पक्षता, कार्रवाई में निष्पक्षता, तर्कशीलता और पूर्ण सत्यनिष्ठा हैं। यह देखते हुए कि किला कभी भीतर से नहीं गिरता। पूर्व सीजेआई ने कहा कि यह वह अभिव्यक्ति है जिसके साथ जिला न्यायपालिका की रक्षा की जानी है।

ललित ने कहा कि जिला न्यायपालिका राज्य में उच्च न्यायालय को छोड़कर किसी के नियंत्रण में नहीं होनी चाहिए। उनकी सभी पोस्टिंग, पदोन्नति, नियुक्तियां और यहां तक कि तबादले भी उच्च न्यायालयों की सिफारिश पर ही होने चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के कामकाज में कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। जस्टिस ललित ने कहा कि संविधान में कई लेख यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक न्यायाधीश या सामान्य रूप से न्यायपालिका के कामकाज में कोई हस्तक्षेप न हो।

न्यायपालिका के कंधे किसी भी बाहरी हमले से निपटने के लिए मजबूत हैं
जस्टिस यूयू ललित ने आगे कहा, 'न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का एक तरीका यह है कि ऐसा माहौल हो जहां न्यायिक कार्यों के निर्वहन के लिए जिम्मेदार लोगों में पूर्ण स्वतंत्रता की भावना हो और किसी भी एजेंसी के हस्तक्षेप की कमी हो।' उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के कंधे किसी भी तरह के बाहरी हमले से निपटने के लिए काफी मजबूत हैं।

जस्टिस हिमा कोहली ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता सिर्फ एक सिद्धांत नहीं बल्कि एक नैतिक अनिवार्यता है। उन्होंने कहा, 'एक स्वतंत्र न्यायपालिका की प्रासंगिकता को बढ़ा-चढ़ा कर पेश नहीं किया जा सकता है, खासकर हमारे जैसे देश में जो सिर्फ एक लोकतांत्रिक गणराज्य नहीं है, इसे संविधान में एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में वर्णित किया गया है।'


न्यायमूर्ति कोहली ने कहा कि संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए न्यायपालिका को स्वतंत्र और निष्पक्ष होना चाहिए। यह किसी भी बाहरी और आंतरिक प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा, न्यायिक स्वतंत्रता नागरिकों के मौलिक अधिकारों का एक पहलू ही नहीं है, बल्कि एक जीवंत और लोकतांत्रिक सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए एक आवश्यक शर्त भी है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सर्वोच्च न्यायालय ने कई ऐतिहासिक मामलों में बरकरार रखा है।
 
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