CJI बोले: ध्रुव तारे की तरह दिशा देती है संविधान की मूल संरचना, न्यायिक व्याख्या के साथ हुई इसकी पहचान
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, ध्रुव तारे की तरह हमारे संविधान की मूल संरचना व्याख्याताओं और कार्यान्वयन करने वालों को तब एक तय दिशा देती है, जब आगे का रास्ता पेचीदा होता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि संविधान की आत्मा को अक्षुण्ण रखते हुए बदलते समय के साथ उसकी व्याख्या करने में एक न्यायाधीश का कौशल निहित है। उन्होंने कहा कि जब आगे का रास्ता कठिन हो तो भारतीय संविधान की मूल संरचना अपने व्याख्याताओं और कार्यान्वयन करने वालों का मार्गदर्शन करती है और उन्हें निश्चित दिशा देती है।
नानी ए पालखीवाला मेमोरियल में अपने संबोधन उन्होंने कहा, भारत के कानूनी परिदृश्य में हाल के दशकों में कड़े नियमों को हटाने, उपभोक्ता कल्याण को बढ़ाने और वाणिज्यिक लेनदेन का समर्थन करने के पक्ष में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
नागरिकों से संवाद के साथ हुई भारतीय संविधान की पहचान
सीजेआई ने कहा, भारतीय संविधान की पहचान संविधान के साथ नागरिकों के संवाद के माध्यम से विकसित हुई है और न्यायिक व्याख्या के साथ हुई है। एक न्यायाधीश की शिल्पकारी संविधान की आत्मा को अक्षुण्ण रखते हुए बदलते समय के साथ संविधान के पाठ की व्याख्या करने में निहित है।
ध्रुव तारे की तय दिशा देती है भारतीय संविधान की मूल संरचना
उन्होंने आगे कहा, ध्रुव तारे की तरह हमारे संविधान की मूल संरचना व्याख्याताओं और कार्यान्वयन करने वालों को तब एक तय दिशा देती है, जब आगे का रास्ता पेचीदा होता है। हमारे संविधान का मूल ढांचा या दर्शन संविधान की सर्वोच्चता, कानून का शासन, शक्तियों का विकेंद्रीकरण, न्यायिक समीक्षा, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद, स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता व अखंडता पर आधारित है।
उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था ने मिटी दी राष्ट्रों के बीच की सीमा
सीजेआई ने कहा कि उभरती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था ने राष्ट्रीय सीमाओं को मिटा दिया है और कंपनियां अब सीमा पर नहीं रुकती हैं। उन्होंने कहा, 'हाल के दशकों में भारत के कानूनी परिदृश्य में भी गला घोंटने वाले नियमों को हटाने, उपभोक्ता कल्याण को बढ़ाने और वाणिज्यिक लेनदेन का समर्थन करने के पक्ष में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
असहज आर्थिक उदारवाद के पक्ष में नहीं भारतीय संविधान
निष्पक्ष बाजार प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिस्पर्धा कानून और दिवाला और दिवालिया संहिता जैसे कानून बनाए गए हैं। इसी तरह, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर अप्रत्यक्ष कराधान को सुव्यवस्थित करने की मांग की है। उन्होंने कहा, 'अगर आप संविधान को देखें तो यह असहज आर्थिक उदारवाद के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय, हमारा संविधान सही संतुलन खोजने की कोशिश करता है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि संविधान राज्य को सामाजिक मांगों को पूरा करने के लिए अपनी कानूनी और आर्थिक नीतियों को बदलने और विकसित करने की अनुमति देता है।
दुनिया में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देता है हरेक व्यक्ति का विकास
सीजेआई चंद्रचूड़ ने आगे कहा, जब व्यक्तियों को अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग करने और उनके प्रयासों के लिए काफी पुरस्कृत होने का अवसर मिलता है, तो आर्थिक न्याय जीवन के कई अंतर-संबंधित आयामों में से एक बन जाता है। अंतत: हम इस हद तक समान भरोसा साझा करते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति का विकास पूरी दुनिया में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देता है
भारतीय भाषाओं में फैसलों के अनुवाद के लिए एआई का होगा इस्तेमाल
सीजेआई चंद्रचूड़ ने शनिवार को सभी भारतीय भाषाओं में फैसलों की अनुवादित प्रतियां देने में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के इस्तेमाल का संकेत दिया और सूचना अवरोध को दूर करने में टेक्नोलॉजी के महत्व पर जोर दिया। सितंबर 2022 में जस्टिस चंद्रचूड़ के नेतृत्व में शीर्ष कोर्ट ने अपनी संविधान पीठ की सुनवाई का सीधा प्रसारण करना शुरू किया था।
जस्टिस चंद्रचूड़ यहां महाराष्ट्र एवं गोवा विधिज्ञ परिषद द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, टेक्नोलॉजी के जरिए सूचना तक पहुंच की बाधा को दूर करने का विचार है। विचार वकीलों को मुफ्त में जानकारी उपलब्ध कराने का है। चंद्रचूड़ ने कहा, "अंग्रेजी की बारीकियां ग्रामीण वकीलों की मदद नहीं करेंगी। इसलिए विचार सभी के लिए जानकारी को सुलभ बनाने का है।"
सीजेआई ने कहा कि उन्होंने मद्रास के एक प्रोफेसर से मुलाकात की जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में काम करते हैं। अगला कदम सभी भारतीय भाषाओं में फैसलों की अनुवादित प्रतियां देना है।