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कलकत्ता हाईकोर्ट का नाम बदलने पर राजी नहीं हैं जज

Tue, 19 Jul 2016 07:09 PM IST
रीता तिवारी/अमर उजाला, कोलकाता
रीता तिवारी/अमर उजाला, कोलकाता Updated Tue, 19 Jul 2016 07:09 PM IST
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judges are not agree to change the name of high court

कलकत्ता हाईकोर्ट के जजों ने आम राय से केंद्र के उस प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया है जिसमें इसका नाम बदल कर कोलकाता हाईकोर्ट करने की सिफारिश की गई थी। अदालत के फैसले से केंद्रीय विधि मंत्रालय को भी अवगत करा दिया गया है। लेकिन केंद्र ने अब तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है। जजों ने इतिहास और समृद्ध परंपरा का हवाला देते हुए नाम बदलने से मना किया है।

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ध्यान रहे कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच जुलाई को अपनी बैठक में कलकत्ता, बंबई और मद्रास हाईकोर्ट के नाम बदल कर क्रमश: कोलकाता, मुंबई और चेन्नई करने का फैसला किया था।  लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट के जजों ने बीती 11 जुलाई को एक बैठक में आम राय से हाईकोर्ट का नाम कलकत्ता ही रहने देने का फैसला किया। इस फैसले से केंद्रीय विधि मंत्रालय को भी अवगत करा दिया गया है। डेढ़ सौ साल से भी लंबे अरसे से इस हाईकोर्ट का नाम कलकत्ता रहा है। हालांकि स्थानीय भाषा में लोग इस महानगर को कोलकाता ही कहते रहे हैं।
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इन कारपोरेटेड लॉ सोसायटी ऑफ कलकत्ता (आईएलएससी) के अध्यक्ष आरके खन्ना कहते हैं कि कलकत्ता हाईकोर्ट देश का पहला हाईकोर्ट है। इसका यही नाम पूरी दुनिया में मशहूर है और इससे लोगों की भावनाएं व संवेदनाएं जुड़ी हैं। इसे बदलने का मतलब है पूरी दुनिया में इसका नाम बदलना। बीती 11 जुलाई को केंद्र के प्रस्ताव पर विचार के लिए आयोजित पूर्ण पीठ की बैठक से पहले सोसायटी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजे एक पत्र में हाईकोर्ट का नाम बदलने का विरोध किया था।

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परंपरा को कायम रखने की अपील

judges are not agree to change the name of high court

हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विधि मंत्रालय ने अब तक हाईकोर्ट की ओर से भेजे गए पत्र का जवाब नहीं दिया है। अब आईएलएससी इस मुद्दे पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिख कर परंपरा को कायम रखने की अपील करेगी।

कलकत्ता बार एसोसिएशन के महासचिव सुरंजन दास गुप्ता ने कहा है कि एसोसिएशन इस मुद्दे पर पूर्ण पीठ के फैसले का समर्थन करता है। वे कहते हैं कि इस हाईकोर्ट की स्थापना एक विशेष अधिनियम के तहत की गई थी। उसमें संशोधन नहीं होने या नया कानून नहीं बनाए जाने तक कलकत्ता हाईकोर्ट का नाम नहीं बदला जा सकता।

एसोसिएशन के पूर्व महासचिव उत्तम मजुमदार ने कहा है कि वकील केंद्र के इस फैसले को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या उनकी सरकार ने अब तक इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इससे पहले वाम मोर्चा सरकार के जमाने में वर्ष 2001 में कलकत्ता का नाम बदल कर कोलकाता किया गया था। 

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