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गरीब बच्चे के एडमिशन के लिए जज ने की फीस भरने की पेशकश

Sun, 26 Jun 2016 09:22 AM IST
एजेंसी/ मुंबई
एजेंसी/ मुंबई Updated Sun, 26 Jun 2016 09:22 AM IST
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Judge gets ready to pay admission fee of poor kid

बांबे हाईकोर्ट के जस्टिस वीएम कनाडे ने शुक्रवार को उस समय एक गरीब बच्चे की फीस भरने की पेशकश की जब उसकी विधवा मां ने एक बार में 10,500 रुपये देने की असमर्थता जताई।

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जस्टिस एमएस सोनक के साथ शुक्रवार को सुनवाई में बैठे जस्टिस वीएम कनाडे ने चेंबूर के लोकमान्य तिलक हाईस्कूल से कहा कि वह चार साल के बच्चे की मां को किस्त में फीस देने की इजाजत दे क्योंकि वह तुरंत पूरी रकम देने में असमर्थ हैं। 
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मुख्य न्यायाधीश के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति कनाडे ने कहा, ‘कृपया इस पर विचार करें या फिर मैं अदा करूंगा...बच्चे को शिक्षा पाने से वंचित नहीं करें।’ 
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न्यायमूर्ति कनाडे बच्चे की मां की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जो स्कूल में अपने बच्चे का दाखिला कराना चाहती है। महिला रीता कनौजिया विधवा है और लोगों के घरों में काम करती है। वह स्कूल के ही पास एक झुग्गी में रहती है। उसके पति की मौत जुलाई 2014 में कैंसर से हो गई।

Judge gets ready to pay admission fee of poor kid
अदालत को बताया गया कि रीता की दो बेटियां उसी स्कूल में तीसरी और पांचवीं कक्षा में पढ़ती हैं। अब वह अपने बेटे कार्तिक को जूनियर केजी में दाखिला दिलवाना चाहती है और स्कूल की फीस देने में असमर्थ है।

पिछली सुनवाई में अदालत ने स्कूल से कहा था कि वह भवन विकास कोष के लिए 19,500 रुपये की अदायगी पर जोर दिए बगैर बच्चे को दाखिला दे।

बाद में स्कूल ने रीता से फीस के तौर पर 10,500 रुपये मांगे। चूंकि रीता यह रकम एकमुश्त देने में सक्षम नहीं थी, उसने स्कूल से आग्रह किया कि वह उसे किस्त में फीस अदा करने की इजाजत दे।
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