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SC: जम्मू-कश्मीर पुलिस की याचिका खारिज, केन्याई नागरिक की सजा पर विचार 21 को, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें

Mon, 17 Oct 2022 10:11 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 17 Oct 2022 10:11 PM IST
सार

शीर्ष कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह भारतीय मूल के एक केन्याई नागरिक की सजा पर शुक्रवार 21 अक्तूबर को विचार करेगा। उसे एक बाल अभिरक्षा मामले में दोषी ठहराया गया है। 

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jK Polices petition dismissed Kenyan citizens sentence to be considered on oct 21 read important news of SC
सुप्रीम कोर्ट

विस्तार

पीडीपी नेता वहीद उर रहमान पारा की जमानत अर्जी को चुनौती देने वाली जम्मू-कश्मीर पुलिस की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। जस्टिस संजय कौल और जस्टिस अभय एस. ओका ने पुलिस की विशेष जांच एजेंसी (एसआईए) की अनुमति याचिका खारिज कर दी।  

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कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए कहा, विभिन्न पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद हम जमानत देने के पहलू में हस्तक्षेप नहीं करना चाहेंगे, लेकिम हम निश्चित तौर पर यूएपीए की व्याख्या के संबंध में की गई किसी भी टिप्पणी को अपनी मंजूरी नहीं दे रहे हैं। 
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता समेत अन्य वकीलों ने पारा की जमानत याचिका रद्द करने का अनुरोध किया था। पीडीपी के वकील शरीफ रियाज ने इसका विरोध किया। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के विश्वासपात्र रहे पारा को आतंकवाद से जुड़े एक मामले में 25 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 9 जनवरी 2021 को जमानत मिल गई थी। 
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सेवानिवृत्ति के बाद डीजीपी का कार्यकाल बढ़ाने पर शीर्ष अदालत ने अपनाया कड़ा रुख
वहीं, नगालैंड में सेवानिवृत्ति के बाद भी डीजीपी टी. जे लोंककुमेर के कार्यकाल में वृद्धि को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने नए पुलिस प्रमुख की नियुक्त के लिए यूपीएससी से राज्य काडर के आईपीएस के योग्य अधिकारियों के नामों की सिफारिश करने के लिए कहा। 

1991 बैच के आईपीएस अधिकारी लोंगकुमेर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई राज्य पुलिस स्थापना बोर्ड की उस बैठक में शामिल थे, जिसने उनके कार्यकाल को छह महीने का विस्तार दिए जाने की सिफारिश की थी। अदालत ने इसको लेकर कड़ा रुख अपनाया। 

कोर्ट ने राज्य की ओर से पेश हुए वकील से कहा, यह व्यक्ति सेवानिवृत्त हो गए हैं। उन्हें शांति से सेवानिवृत्त होने दीजिए। यदि आप अपने यहां चीजों को व्यवस्थित करना चाहते हैं, तो हम आपको एक मौका देते हैं, वरना आपको न्यायालय से परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अपने मुख्य सचिव को बताइए कि हमने इस तथ्य पर बहुत कड़ा रुख अपनाया है कि यह व्यक्ति एसपीईबी की उस बैठक में शामिल थे, जिसमें कार्यकाल विस्तार का प्रस्ताव पारित किया गया है। 

भारतीय मूल के केन्याई नागरिक की सजा पर 21 अक्तूबर को सजा
शीर्ष कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह भारतीय मूल के एक केन्याई नागरिक की सजा पर शुक्रवार 21 अक्तूबर को विचार करेगा। उसे एक बाल अभिरक्षा मामले में दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने कहा कि उसको पूरा मौका दिया गया, लेकिन उसने कोर्ट के सामने पेश नहीं होने का फैसला किया। 

सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा, यदि एक व्यक्ति पर्याप्त मौका दिए जाने के बावजूद पेश नहीं होने का फैसला करता है, तो कोर्ट असहाय नहीं हो सकती। पीठ ने आगे कहा, दोषी ठहराए गए पेरी कांसग्रा की अनुपस्तति में भी मामला चलाया जाएगा। 


11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने बच्चेच की अभिरक्षा हासिल करने के लिए धोखाधड़ी करने क लिए पेरी को अवमानना का दोषी ठहराया था। लेकिन पेरी इसके बाद भी कोर्ट में दोबारा हाजिर नहीं हुआ। उसके पास ब्रिटेन और केन्या की दोहरी नागरिकता है। उसने अपने बेटे की अभिरक्षा हासिल करने के लिए अलग रह रही पत्नी से भारतीय कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ना शुरू किया और लिखित में आश्वासन दिया था कि वह शर्तों का पालन करेगा।  
 

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