बगदादी की मौत से भारत में पांव जमाने का प्रयास कर रहे IS को झटका, अब समर्थकों की कमर टूटना तय
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इस्लामिक स्टेट के सरगना अबू बकर अल-बगदादी के खात्मे के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। बगदादी की मौत से आईएसआईएस को तगड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के जानकार और एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के अधिकारी बताते हैं कि आईएसआईएस के आतंकी भारत में पांव जमाने के लिए कई सालों से प्रयास कर रहे हैं। हालांकि अभी तक उन्हें कोई खास कामयाबी नहीं मिली। एनआईए ने लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए आईएसआईएस की ओर झुकाव के 28 केस दर्ज कर 127 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
अब जांच एजेंसियां इंटरनेट पर प्रचार और वित्तीय मदद के स्रोतों को खत्म करने के लिए जुट गई हैं। अगर यह सब हो जाता है, तो देश में आईएस की कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ने का प्रयास कर रहे लोगों की कमर टूटना तय है।
पैसों के लालच में जुड़े युवा
एनआईए के एक अधिकारी के मुताबिक पिछले दो-तीन वर्षों से देश में आईएस के मामले सामने आ रहे हैं। ये मामले केवल एक राज्य में नहीं, बल्कि कई प्रदेशों में देखने को मिले हैं। आतंकी हमला करने की साजिश रचने के आरोप में एनआईए और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भी केस दर्ज किए हैं। खुफिया एजेंसियों के निर्देश पर भी एफआईआर दर्ज की गई हैं। जिनमें लिखा गया कि सीरिया और इराक के आतंकी संगठन भारत में कई जगहों पर हमले की साजिश कर रहे हैं।
जांच हुई, लेकिन कुछ साफ नहीं हुआ। कई मामलों में यह सामने आया कि थोड़े से पैसों के लालच में युवा आईएस की कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।
110 हुए गिरफ्तार
इस आतंकी समूह से सहानुभूति रखने के आरोप में करीब 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी का कहना है कि आईएस अपनी विचारधारा का दुष्प्रचार करने के लिए इंटरनेट आधारित सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल कर रहा है। बहरहाल, केंद्रीय और राज्य एजेंसियां अब इसी ओर ध्यान लगा रही हैं। आईएसआईएस के नए मॉडयूल 'हरकत उल हर्ब ए इस्लाम' जैसे संगठनों से जुड़े मामलों में भी दर्जनों गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
नए मॉड्यूल की जांच के सिलसिले में एनआईए अलग-अलग शहरों में खुफिया तरीके से संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले रही है। बगदादी के मरने के बाद अब जांच एजेंसी इंटरनेट के जरिए आईएस से जुड़ने वालों पर नजर रख रही है।
पहला जिहादी केस नवंबर 2014 में दर्ज
बता दें कि आईएस को लेकर देश में पहला जिहादी केस नवंबर 2014 में दर्ज हुआ था। अभी तक 28 केस दर्ज हो चुके हैं। एनआईए के आईजी आलोक मित्तल ने हाल ही में आयोजित हुई एंटी टेरर स्क्वॉड (एटीएस) और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की नेशनल कॉफ्रेंस में यह जानकारी दी थी। अलग-अलग मॉड्यूल्स की जांच से पता चला कि स्थानीय स्तर पर भर्ती किए गए लोगों के तार सीरिया, इराक या किसी अन्य देश से जुड़े थे।
उत्तरप्रदेश, केरल, तमिलनाडु, दिल्ली, तेलंगाना, कश्मीर, महाराष्ट्र पश्चिम बंगाल और दूसरे कई प्रदेशों में आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। ये आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल होने का प्रयास कर रहे थे। इनके पास मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड, पेन ड्राइव और दूसरे डिजिटल उपकरण बरामद किए गए थे।
जांच एजेंसियों को दिखानी होगी सतर्कता
मेजर जन. योगी बहल (सेवानिवृत) का कहना है, जांच एजेंसियों को अब लगातार दबिश देकर आईएस की कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों को बाहर निकालना होगा। बगदादी की मौत के बाद आईएस में कई बदलाव होंगे। जब तक ये बदलाव हों, तब तक देश में इनकी कथित विचारधारा से जुड़ने की फिराक में बैठे युवकों को गिरफ्तार करना होगा। यही समय है जब जांच एजेंसियों को सतर्कता दिखानी होगी। रणनीतिकार कमर आगा बताते हैं, देखिए हमारे देश में अभी यह विचारधारा ज्यादा नहीं फैली है। अभी इसका कोई खास प्रभाव नहीं है।
यह सही है कि अब इस संगठन के लोग इंटरनेट की मदद से युवकों को गुमराह कर रहे हैं। वे जिहाद की गलत परिभाषा देकर और थोड़े बहुत पैसे से हमारे युवाओं को अपनी बातों में फंसा लेते हैं। जांच एजेंसियों को देखना होगा कि ये किस साधन की मदद से आईएस की विचारधारा के प्रभाव में आ रहे हैं। उन पर रोक लगानी होगी। इसमें युवाओं के परिजनों से बात करनी होगी। अगर एक बार युवाओं को इनकी कट्टरपंथी विचारधारा का भयानक रूप समझ आ गया, तो जांच एजेंसियों को इस आतंकी संगठन के प्रारंभिक कदमों को उखाड़ फेंकने में दिक्कत नहीं आएगी।
आईएस के नब्बे फीसदी मामले ऑनलाइन प्लेटफार्म पर
जांच एजेंसियों का कहना है कि भारत में अभी तक जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें करीब 90 फीसदी मामले ऑनलाइन प्लेटफार्म पर मिले हैं। कुछ केस ऐसे भी देखे गए हैं, जिनमें युवाओं को सीरिया भेजा गया था। लेकिन बाद में वे वापस भी आ गए। आईएस को आगे बढ़ाने के लिए तैयार प्रचार सामग्री इंटरनेट के जरिए ही मुहैया कराई जाती है। जांच एजेंसी के मुताबिक आईएस के गुर्गे भोले-भाले युवकों को जिहाद के नाम पर मौजूदा राजनीतिक संस्थाओं के प्रति भड़काते हैं। उन्हें कुछ सुविधाओं के नाम पर अपने संगठन में शामिल कर लेते हैं।
सोशल मीडिया साइट्स पर 24 घंटे नजर
आईएस अपने प्रचार वाले वीडियो में भड़काऊ हिंसा और हमलों की बात करता है। शुरू में आईएस के सदस्य अबू-उल-ब्रा-अल-कश्मीरी ने स्थानीय लोगों से कहा था कि वे भारत या पाकिस्तान का समर्थन बंद करें। बाद में आईएस अपनी बात पर टिक नहीं सका और कश्मीर के आतंकी संगठनों की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने लगा। सुरक्षा एजेंसियां अब फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर 24 घंटे नजर रख रही हैं। भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में अलकायदा के गुर्गों के करीब एक हज़ार इंटरनेट अकांउट हैं। ये भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।