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Jharkhand MNREGA Scam: निलंबित IAS के पति को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

Fri, 23 Jun 2023 02:06 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झारखंड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झारखंड Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 23 Jun 2023 02:06 PM IST
सार

उच्चतम न्यायालय झारखंड कैडर की निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा की उस याचिका पर आज सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने राज्य में कथित मनरेगा घोटाले से जुड़े धनशोधन के एक मामले में अग्रिम जमानत मांगी थी।
 

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Jharkhand MNREGA scam: SC refuses pre-arrest bail to suspended IAS officer's husband
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने आज झारखंड कैडर की निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने अभिषेक को राज्य में कथित मनरेगा घोटाले से जुड़े एक धनशोधन मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।

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यह है मामला

झारखंड कैडर की 2000 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी सिंघल 18.07 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन से जुड़े कथित घोटाले में मुख्य आरोपी हैं। घोटाले के समय वह खूंटी जिले में उपायुक्त थीं। 

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अगली सुनवाई पांच को

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की अवकाशकालीन पीठ ने झा को राहत देने से इनकार कर दिया और मामले में सुनवाई के लिए पांच जुलाई की तारीख तय की। झा ने झारखंड उच्च न्यायालय के 18 मई के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। 

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18 मई को हुई थी याचिका खारिज

उनके वकील ने पहले तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए मामले का जिक्र किया था। उच्च न्यायालय ने 18 मई को झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें चार सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने को कहा था। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि पीएमएलए के तहत अपराधों में सख्ती से धारा 45 लागू होगी। अपराध की व्यापकता (जिसमें करोड़ों रुपये की आपराधिक आय शामिल है) को ध्यान में रखते हुए, इसके सबूतों को देखते हुए यह मामला अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त नहीं लगता है।


ईडी का आरोप
अभियोजन पक्ष (ईडी) के मुताबिक, सिंघल से शादी के बाद झा की वित्तीय संपत्ति बढ़ी और कथित तौर पर भ्रष्ट गतिविधियों के जरिए अधिकारी द्वारा अर्जित अपराध की आय औप  गलत तरीके से अर्जित नकदी उनके बैंक खातों में आने लगी। वहीं, झा ने दावा किया है कि यह धन ऑस्ट्रेलिया में उनकी नौकरी से हुई वैध आय है।

19.76 करोड़ रुपये नकद जब्त
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में इस बात पर गौर किया कि झा की जून 2011 में सिंघल से शादी हुई थी। हाई-प्रोफाइल आईएएस अधिकारी 16 फरवरी, 2009 से 19 जुलाई, 2010 तक खूंटी जिले के उपायुक्त के रूप में तैनात थे। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था, सार्वजनिक धन के बड़े पैमान पर गबन का पता चला है और खूंटी जिले में अभियोजन की शिकायत के पैरा 1.6 में बताया गया है कि 16 प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं,  उस समय पूजा सिंघल उपायुक्त थीं। 16 प्राथमिकियों के मुताबिक गबन की राशि 18.06 थी। सभी 16 प्राथमिकियों को राम बिनोद प्रसाद सिन्हा, आरके जैन और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए गए थे। 

इसमें कहा गया है कि धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच में धन शोधन के विभिन्न स्तरों में अपराध की आय का पता चला और इन संपत्तियों पर ब्याज सहित 4.28 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई। आदेश में रांची, चंडीगढ़, कोलकाता, फरीदाबाद, गुरुग्राम और मुजफ्फरपुर में सिंघल और उनके सहयोगियों से जुड़े लगभग 30 परिसरों में तलाशी और जब्ती अभियान का जिक्र किया गया है, जिसके दौरान आपत्तिजनक दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों के अलावा कुल 19.76 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए थे।

 

 

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