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JDU: अड़ियल रवैये, लालू से नजदीकी, सांसदों से अनबन के चलते हुई ललन की रवानगी, नीतीश ने RJD-BJP को भी दिया मैसेज

Fri, 29 Dec 2023 05:10 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Fri, 29 Dec 2023 05:10 PM IST
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सार
दिल्ली में जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हुए एक वरिष्ठ सदस्य ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि ललन बाबू अपने अड़िलय रवैये के कारण कार्यकर्ताओं के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे थे। उनके व्यवहार की शिकायत कार्यकर्ता लगातार नीतीश कुमार से कर रहे थे...
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JDU: Lalan singh removal due to arrogant attitude and  closeness to Lalu yadav, Nitish gave message to RJD-BJP
JDU Meeting: Nitish Kumar, Lalan Singh - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए हैं। लोकसभा चुनाव से पहले जेडीयू के लिए ये बड़ा कदम माना जा रहा है। ललन सिंह अध्यक्ष पद से क्यों हटाए गए, इसके पीछे कई कारण सामने निकलकर आए हैं।

दिल्ली में जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हुए एक वरिष्ठ सदस्य ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि ललन बाबू अपने अड़िलय रवैये के कारण कार्यकर्ताओं के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पा रहे थे। उनके व्यवहार की शिकायत कार्यकर्ता लगातार नीतीश कुमार से कर रहे थे। पार्टी के बड़े नेता चाहे वह सांसद हों या फिर विधायक, वह भी उनके व्यवहार के कारण तारतम्य नहीं बिठा पा रहे थे और न ही पार्टी संबंधी गतिविधियों पर उनके साथ खुलकर चर्चा कर पा रहे थे।

उन्होंने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते ललन सिंह को पार्टी की मजबूती के लिए पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों और विभिन्न मोर्चा और प्रकोष्ठों की बैठक लेनी होती थी। लेकिन जब से वे अध्यक्ष बने हैं, तब से बैठक होनी बंद हो गई है। उनके व्यवहार के कारण कई सक्रिय नेता उनसे बात करने से बचते थे। 16 में से 13 सांसद उनसे नाराज चल रहे थे। सभी सांसदों ने अपनी नाराजगी हाल ही में सीएम नीतीश कुमार को भी जताई थी। जेडीयू की विधायकों की बैठक में भी नीतीश कुमार को ललन सिंह के बारे अच्छा फीडबैक नहीं मिल रहा था। हाल ही में सीएम खुद पार्टी कार्यालय औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने यह महसूस किया था कि पार्टी को सुदृढ़ करने के लिए, जो कुछ ललन सिंह को करना चाहिए था, वह उस पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं।

पार्टी में टूट का खतरा दिख रहा था, मंत्री कर रहे थे गोपनीय बैठक

सूत्र कहते हैं कि नीतीश कुमार को अपनी ही पार्टी में टूट का खतरा दिखने लगा था। नीतीश के धुर विरोधी रहे लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान कई बार कह चुके थे कि जेडीयू में असंतोष का माहौल है और कई नेता उनके संपर्क में हैं। भाजपा के नेताओं की तरफ से लगातार इस तरह के बयान सामने आने लगे थे कि ललन सिंह अब नीतीश कुमार से ज्यादा लालू प्रसाद यादव के करीबी हो गए हैं। विधायकों और मंत्रियों की गोपनीय मीटिंग की खबरें बाहर आने लगीं। नीतीश कुमार के इस दांव को इस सभी बातों से जोड़ कर देखा जा रहा है।

लालू-भाजपा को भी दिया संदेश, वोट बैंक भी किया मजबूत

जेडीयू अध्यक्ष के नाते ललन सिंह संसद से लेकर सड़क पर लगातार भाजपा पर हमलावर हैं। वे संसद में भी कई बार पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोलते थे। ललन सिंह पर एक यह आरोप भी लग रहा था कि वे जेडीयू की बजाए आरजेडी के लिए काम कर रहे थे। वे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की जमकर तारीफ कर रहे थे। ऐसे में जेडीयू की छवि पूरी तरह से एंटी मोदी और एंटी भाजपा की बन गई रही थी। ऐसे में ललन सिंह को हटाकर नीतीश कुमार लालू के साथ-साथ भाजपा को संदेश देने की कोशिश की है।

राज्य के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार देश में एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां जातीय गणना हुई है। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य में आरक्षण के दायरे को बढ़ाककर 75 फीसदी किया गया। ऐसे में नीतीश कुमार अपनी इस उपलब्धि को चुनाव में भुनाना चाहते हैं। लेकिन नीतीश की इस ओबीसी राजनीति में ललन सिंह फिर नहीं बैठते थे। ऐसे में ललन को साइड लाइन कर नीतीश ने अपने कोर वोट बैंक को भी संदेश देने की कोशिश की है। क्योंकि नीतीश कुमार इस बात को अच्छे से जानते हैं कि लालू यादव का अभी 30-32 प्रतिशत का आधार वोट बैंक है। ये वोट बैंक उनके साथ मजबूती से खड़ा है। यही वोट बैंक लोकसभा चुनाव के अलावा विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका अदा करता है।

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