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सुप्रीम कोर्ट से मायूस लौटे फ्लैट खरीदार, बोले- जहां से चले थे फिर से वहीं पहुंच गए
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 10 Aug 2018 01:26 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
जेपी इंफ्राटेक के फ्लैट खरीदारों को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट से बैरंग लौटना पड़ा। अदालत ने कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की इलाहाबाद पीठ जेपी इंफ्राटेक के दिवालियेपन की कार्यवाही मामले पर विचार करेगा। फ्लैट खरीदारों की मानें तो वह जहां से चले थे फिर से वहीं पहुंच गए।
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करीब एक साल तक सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई फिलहाल बिना किसी अंतिम नतीजे के वापस एनसीएलटी के पास चली गई है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने एनसीएलटी को छह महीने के भीतर मामले का हल करने को कहा है। साथ ही जेपी इंफ्राटेक की नीलामी की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने के लिए कहा है, पर जेपी एसोसिएट्स या उसके प्रमोटर को शामिल करने पर पाबंदी लगा दी है।
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पीठ ने जेपी इंफ्राटेक द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जमा कराए गए 750 करोड़ रुपये को एनसीएलटी में ट्रांसफर करने के लिए है। इस रकम का क्या किया जाएगा, एनसीएलटी इस पर फैसला लेगा। इसके अलावा पीठ ने रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया को यह इजाजत दे दी है कि वह जेपी एसोसिएट के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू कर सकती है।
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इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड में बदलाव करते हुए फ्लैट खरीदारों को भी क्रेडिटर में शामिल किया गया है। लिहाजा कोर्ट ने कमेटी ऑफ क्रेडिटर का पुनर्गठन कर इसमें फ्लैट खरीदारों को भी शामिल करने के लिए कहा गया है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट जेपी इंफ्राटेक से जुड़े मामले का निपटारा कर दिया। मालूम हो कि आईडीबीआई बैंक ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ 526 करोड़ रुपये का कर्ज न चुकाने के आरोप में एनसीएलटी में दिवालियापन कानून के तहत मामला दर्ज किया था। जिसके बाद फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।