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JNU: कश्मीर फाइल्स के बहाने फिर चर्चा में आया जेएनयू, यह विश्वविद्यालय कब-कब रहा है विवादों में?
Thu, 17 Mar 2022 04:13 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 17 Mar 2022 04:13 PM IST
सार
पिछले कुछ समय से जेएनयू को राष्ट्रवाद' बनाम 'देशद्रोह' की बहस में कई बार घसीटा गया है। जाने-अंजाने जेएनयू पर शिक्षा के सर्वोच्च संस्थान के बदले राष्ट्र विरोधी संस्था बनने के आरोप अब तक कई बार लग चुके हैं।
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विवेक अग्निहोत्री, पल्लवी जोशी, दर्शन कुमार
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
विस्तार
निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’की बॉक्स ऑफिस पर धूम मची हुई है। फिल्म को दर्शकों का बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ उमड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री तक इस फिल्म की तारीफ कर चुके हैं। कई राज्यों में फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया गया है।
फिल्म में 1990 में कश्मीर पंडितों की हत्या, उनके पलायन और विस्थापन की दर्दभरी दास्तां बयां की गई है। 'द कश्मीर फाइल्स’ के जरिए निर्देशक ने इस मुद्दे को बेहद तीखे और जोरदार ढंग से सामने लाने का काम किया है। कश्मीर पंडितों के दर्द से शुरू हुई बात गोधरा नरसंहार तक पहुंच गई। यही नहीं फिल्म में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) विवाद को भी चर्चा में घसीटा गया है।
फिल्म में जेएनयू की क्यों चर्चा?
दरअसल कुछ लोगों का आरोप है कि इस फिल्म में जो विश्वविद्यालय दिखाया गया है, वो जेएनयू है और इस विश्वविद्यालय को टारगेट करके फिल्म में उसका नाम जानबूझकर बदला गया है। अभिनेत्री पल्लवी जोशी ने जिस प्रोफेसर का किरदार निभाया है, उन्हें जेएनयू की ही प्रोफेसर राधिक मेनन बताया जा रहा है। फिल्म के मुताबिक राधिका ने ही स्टूडेंट्स को 'आजाद कश्मीर' के लिए लड़ाई करने को मोटिवेट किया था।
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अनुपम खेर ने इस विवाद पर एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा ‘हमने सच को फिल्म में दिखाया है, हमने उस विश्वविद्यालय का नाम बदल दिया है, जहां हमने आजादी के गीत सुने थे। जहां हमने ये सुना कि 'अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिदा हैं'। हमने वहां हर किसी को सुना, तो उसे चित्रित करने में क्या गलत है? आप मुझे ये बताइए कि आखिर टुकड़े-टुकड़े गैंग शब्द कहां से आया है?'
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फिल्म में 1990 में कश्मीर पंडितों की हत्या, उनके पलायन और विस्थापन की दर्दभरी दास्तां बयां की गई है। 'द कश्मीर फाइल्स’ के जरिए निर्देशक ने इस मुद्दे को बेहद तीखे और जोरदार ढंग से सामने लाने का काम किया है। कश्मीर पंडितों के दर्द से शुरू हुई बात गोधरा नरसंहार तक पहुंच गई। यही नहीं फिल्म में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) विवाद को भी चर्चा में घसीटा गया है।
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फिल्म में जेएनयू की क्यों चर्चा?
दरअसल कुछ लोगों का आरोप है कि इस फिल्म में जो विश्वविद्यालय दिखाया गया है, वो जेएनयू है और इस विश्वविद्यालय को टारगेट करके फिल्म में उसका नाम जानबूझकर बदला गया है। अभिनेत्री पल्लवी जोशी ने जिस प्रोफेसर का किरदार निभाया है, उन्हें जेएनयू की ही प्रोफेसर राधिक मेनन बताया जा रहा है। फिल्म के मुताबिक राधिका ने ही स्टूडेंट्स को 'आजाद कश्मीर' के लिए लड़ाई करने को मोटिवेट किया था।
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अनुपम खेर ने इस विवाद पर एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा ‘हमने सच को फिल्म में दिखाया है, हमने उस विश्वविद्यालय का नाम बदल दिया है, जहां हमने आजादी के गीत सुने थे। जहां हमने ये सुना कि 'अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिदा हैं'। हमने वहां हर किसी को सुना, तो उसे चित्रित करने में क्या गलत है? आप मुझे ये बताइए कि आखिर टुकड़े-टुकड़े गैंग शब्द कहां से आया है?'
JNU
- फोटो : Amar Ujala
JNU का विवादों से कैसा नाता है ?
जेएनयू देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एक गिना जाता है। कई विषयों पर शोध और अध्ययन के लिए यह दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखता है। लेकिन पिछले कुछ समय से जेएनयू विवादों में रहा है।
2016 में जेएनयू परिसर में एक ऐसा विवाद हुआ जिसने अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं। वहीं सोशल मीडिया पर 'शट डाउन जेएनयू' हैशटैग ट्रेंड करने लगा। जेएनयू पर कई बार यह आरोप लगे कि छात्रसंघ के वामपंथी छात्रों की वजह से विश्वविद्यालय की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
देश विरोधी नारे लगने के आरोप
जेएनयू से जुड़ा सबसे बड़ा विवाद 9 फरवरी 2016 का है। जब कैंपस में 2001 में भारतीय संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की तीसरी बरसी पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कथित तौर पर इस कार्यक्रम में 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे देश विरोधी नारे लगाए थे। जिस पर खूब बवाल हुआ।
इस नारेबाजी के कुछ वीडियो सामने आए थे, जिसमें कुछ चेहरा ढके हुए छात्र देश विरोधी नारे लगा रहे थे। कार्यक्रम का ABVP ने विरोध किया था। इसको लेकर छात्र गुट आपस में भिड़ गए थे।
11 फरवरी को टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर देश विरोधी नारे लगाने के वीडियो टेलीकास्ट हुए जिसमें देश विरोधी नारे लगाने का मुख्य आरोप तत्कालीन जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और तत्कालीन छात्रसंघ के सदस्य उमर खालिद पर लगा। हालांकि वामपंथी छात्रों ने इस तरह के नारे लगाने के आरोपों से इनकार किया।
जेएनयू देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एक गिना जाता है। कई विषयों पर शोध और अध्ययन के लिए यह दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखता है। लेकिन पिछले कुछ समय से जेएनयू विवादों में रहा है।
2016 में जेएनयू परिसर में एक ऐसा विवाद हुआ जिसने अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं। वहीं सोशल मीडिया पर 'शट डाउन जेएनयू' हैशटैग ट्रेंड करने लगा। जेएनयू पर कई बार यह आरोप लगे कि छात्रसंघ के वामपंथी छात्रों की वजह से विश्वविद्यालय की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
देश विरोधी नारे लगने के आरोप
जेएनयू से जुड़ा सबसे बड़ा विवाद 9 फरवरी 2016 का है। जब कैंपस में 2001 में भारतीय संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की तीसरी बरसी पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कथित तौर पर इस कार्यक्रम में 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे देश विरोधी नारे लगाए थे। जिस पर खूब बवाल हुआ।
इस नारेबाजी के कुछ वीडियो सामने आए थे, जिसमें कुछ चेहरा ढके हुए छात्र देश विरोधी नारे लगा रहे थे। कार्यक्रम का ABVP ने विरोध किया था। इसको लेकर छात्र गुट आपस में भिड़ गए थे।
11 फरवरी को टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर देश विरोधी नारे लगाने के वीडियो टेलीकास्ट हुए जिसमें देश विरोधी नारे लगाने का मुख्य आरोप तत्कालीन जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और तत्कालीन छात्रसंघ के सदस्य उमर खालिद पर लगा। हालांकि वामपंथी छात्रों ने इस तरह के नारे लगाने के आरोपों से इनकार किया।
कन्हैया कुमार (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी
जिसके बाद दिल्ली के वसंतकुंज थाने में धारा 124A के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 12 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उन पर देशद्रोह के आरोप लगे। वहीं उमर खालिद अंडरग्राउंड हो गया था।
देशविरोधी गतिविधियों में छात्रसंघ की भूमिका को लेकर उठे थे सवाल
इस पूरे मामले में देशविरोधी गतिविधियों में छात्र संघ की भूमिका और जेएनयू को लेकर खूब विवाद हुआ। दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दायर कर की है। जानकारी के अनुसार इस चार्जशीट में कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य समेत कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया। हालांकि कन्हैया कुमार अपने ऊपर लगे आरोपों को कई बार खारिज कर चुके हैं।
2019 में फीस बढ़ोत्तरी को लेकर जेएनयू में जंग शुरू हो गई। कैंपस में कोहराम मच गया था और छात्रों ने संसद तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच खूब झड़प हुई।
2020 में जेएनयू फिर सुर्खियों में आया जब पांच दिसंबर को कैंपस में नकाबपोश लोगों ने हॉस्टल में घुसकर छात्रों के साथ मारपीट की। कई छात्रों को इस दौरान अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा। लेकिन अभी तक गुनहगार पकड़े नहीं गए हैं।
महिषासुर बलिदान दिवस का भी आयोजन
जेएनयू में विवादों का चोली-दामन का साथ हो गया है। अक्सर यहां कोई न कोई मुद्दा गरम होता है और विश्वविद्यालय से शुरू हुआ विवाद कैंपस के बाहर निकल जाता है। अक्तूबर 2013 में जेएनयू कैंपस में महिषासुर बलिदान दिवस नाम के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आरोप लगे कि इस कार्यक्रम में पर्चे बांटे गए, जिसमें देवी दुर्गा के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। इसे लेकर विरोध हुआ और छात्रों के बीच काफी मारपीट हुई।
जिसके बाद दिल्ली के वसंतकुंज थाने में धारा 124A के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 12 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उन पर देशद्रोह के आरोप लगे। वहीं उमर खालिद अंडरग्राउंड हो गया था।
देशविरोधी गतिविधियों में छात्रसंघ की भूमिका को लेकर उठे थे सवाल
इस पूरे मामले में देशविरोधी गतिविधियों में छात्र संघ की भूमिका और जेएनयू को लेकर खूब विवाद हुआ। दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दायर कर की है। जानकारी के अनुसार इस चार्जशीट में कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बन भट्टाचार्य समेत कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया। हालांकि कन्हैया कुमार अपने ऊपर लगे आरोपों को कई बार खारिज कर चुके हैं।
2019 में फीस बढ़ोत्तरी को लेकर जेएनयू में जंग शुरू हो गई। कैंपस में कोहराम मच गया था और छात्रों ने संसद तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच खूब झड़प हुई।
2020 में जेएनयू फिर सुर्खियों में आया जब पांच दिसंबर को कैंपस में नकाबपोश लोगों ने हॉस्टल में घुसकर छात्रों के साथ मारपीट की। कई छात्रों को इस दौरान अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा। लेकिन अभी तक गुनहगार पकड़े नहीं गए हैं।
महिषासुर बलिदान दिवस का भी आयोजन
जेएनयू में विवादों का चोली-दामन का साथ हो गया है। अक्सर यहां कोई न कोई मुद्दा गरम होता है और विश्वविद्यालय से शुरू हुआ विवाद कैंपस के बाहर निकल जाता है। अक्तूबर 2013 में जेएनयू कैंपस में महिषासुर बलिदान दिवस नाम के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आरोप लगे कि इस कार्यक्रम में पर्चे बांटे गए, जिसमें देवी दुर्गा के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। इसे लेकर विरोध हुआ और छात्रों के बीच काफी मारपीट हुई।
जेएनयू छात्र
- फोटो : ANI
शहीद जवानों को लेकर भी खुशी मनाने का आरोप लग चुका है
वर्ष 2010 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमला हुआ। सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। एनएसयूआई छात्रों ने आरोप लगाए कि वामपंथी छात्र संघ के छात्रों ने इसकी खुशी मनाने के लिए कैंपस में कार्यक्रम का आयोजन किया। यह भी दावा किया गया कि इस दौरान भारत विरोधी नारे लगाए गए।
मनमोहन सिंह का भी विरोध हो चुका है
वर्ष 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जेएनयू कैंपस में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जाना था। तब भारत ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उस पर प्रतिबंध के अमेरिकी प्रस्ताव का समर्थन किया था। जेएनयू कैंपस में छात्रों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर दिया और कथित तौर पर उनका रास्ता भी रोकने की कोशिश की।
पाकिस्तान के समर्थन में मुशायरा
2000 में यूनिवर्सिटी में एक मुशायरा का आयोजन हुआ और कथित तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में कुछ गजलें पढ़ीं गईं जिनका विरोध करने पर सेना के दो अफसरों की बुरी तरह पिटाई कर दी गई थी। तब बीजेपी नेता बीएस खंडूरी ने संसद में जोर-शोर से जेएनयू का मुद्दा उठाया था।
वर्ष 2010 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सली हमला हुआ। सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। एनएसयूआई छात्रों ने आरोप लगाए कि वामपंथी छात्र संघ के छात्रों ने इसकी खुशी मनाने के लिए कैंपस में कार्यक्रम का आयोजन किया। यह भी दावा किया गया कि इस दौरान भारत विरोधी नारे लगाए गए।
मनमोहन सिंह का भी विरोध हो चुका है
वर्ष 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जेएनयू कैंपस में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जाना था। तब भारत ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उस पर प्रतिबंध के अमेरिकी प्रस्ताव का समर्थन किया था। जेएनयू कैंपस में छात्रों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर दिया और कथित तौर पर उनका रास्ता भी रोकने की कोशिश की।
पाकिस्तान के समर्थन में मुशायरा
2000 में यूनिवर्सिटी में एक मुशायरा का आयोजन हुआ और कथित तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में कुछ गजलें पढ़ीं गईं जिनका विरोध करने पर सेना के दो अफसरों की बुरी तरह पिटाई कर दी गई थी। तब बीजेपी नेता बीएस खंडूरी ने संसद में जोर-शोर से जेएनयू का मुद्दा उठाया था।