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रामवृक्ष के एक फोन पर एलाट हो गया था जवाहर बाग, किसी प्रमुख सचिव ने किया था फोन

Sun, 05 Jun 2016 05:21 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा Updated Sun, 05 Jun 2016 05:21 AM IST
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Jawahar bagh is Alloted on a call by Ramvriksh ,jawahar bagh issue
ramvriksha yadav mathura 2 - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा-बरेली

उत्तर प्रदेश के मथुरा में बीते 2 जून को हुए बवाल में नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि 14 मार्च, 2014 को गाजीपुर निवासी रामवृक्ष भारी भीड़ लेकर मथुरा आया था। उसने जवाहर बाग में दो दिन का पड़ाव डालने की अनुमति प्रशासन से मांगी थी। तत्कालीन डीएम और एसएसपी ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इस पर रामवृक्ष ने सीधे शासन में फोन किया और तत्काल जवाहर बाग उसके नाम से एलाट हो गया। कहा जा रहा है कि शासन से एक प्रमुख सचिव का फोन आने पर ऐसा हुआ।

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वहीं जवाहर बाग को पुलिस ने पूरी तरह से अपने कब्जे में ले रखा है। पुलिस का पहरा इतना सख्त है, वहां प्रवेश तो दूर किसी को उसकी चहारदीवारी के ऊपर से झांकने तक नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अब जवाहर बाग में ऐसा क्या छिपा है, जिसकी इतनी चौकसी की जा रही है। इसके चलते मृतकों की संख्या को लेकर भी अफवाह उड़ रही है।
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दो जून को अवैध कब्जाधारियों से बाग को मुक्त कराने की कार्रवाई में एसपी सिटी और थानाध्यक्ष फरह समेत 28 लोगों की मौत हुई थी। बाग को तो पूरी तरह से खाली करा लिया गया, लेकिन अब इस पर पुलिस का सख्त पहरा है। लोग जवाहर बाग के भीतर का हाल देखना चाहते हैं, जानना चाहते हैं कि आखिर उस दिन जवाहर बाग में क्या हुआ था, लेकिन वहां पर किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है। मुख्य गेट पर भारी फोर्स तैनात है, हर तरफ से पुलिस इसकी घेराबंदी किए है। यह भी सवाल खड़े हो रहे है कि कुछ छिपाया तो नहीं जा रहा है। कभी शव मिलने तो कभी नर कंकाल मिलने की अफवाह उड़ती है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जब कब्जाधारियों पर फायरिंग का आदेश हुआ था, तब अंधाधुंध गोली चलाई गई थी। इसमें तमाम लोगों की मौत हुई है। पुलिस के पहरे से अफवाहों को भी बल मिल रहा है।
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रात के अंधेरे में होती है खुदाई
जवाहर बाग के आसपास के मोहल्लों में रहने वाले लोगों का कहना है कि दो दिन से रात को कुछ लोग बाग में आते हैं और फावड़े से खुदाई करते हैं। अब यह क्यों खुदाई करते हैं इसकी जानकारी नहीं हो पा रही है। लोगों का कहना है कि कभी तो पुलिस वाले भी नजर आ जाते हैं। एक बार पुलिस जीप में सादे कपड़ों में कुछ लड़के पहुंचे थे। उन्होंने भी खुदाई की थी।


 एक साथ गरजे थे 150 असलहे
जिस वक्त एसपी सिटी जवाहर बाग खाली कराने के लिए दीवार तुड़वाने पहुंचे थे उस वक्त तो करीब पचास पुलिस वाले उनके साथ थे। इनमें तीस रायफलधारी थे। जब बवाल बढ़ा तो और फोर्स पहुंची। एसपी सिटी और थानाध्यक्ष पर हुए हमले के बाद जब फायरिंग का आदेश हुआ तो करीब 150 असलाह एक साथ गरजे थे। पुलिस इस कदर नाराज थी कि ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं गईं।

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