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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu-kashmir: sources said, as part of a special strategy, Indian security forces have cracked down on Hizbul Mujahideen chief Syed Salahuddin and other terrorist organizations

जम्मू-कश्मीर: घाटी में खामोश हुआ हिजबुल मुजाहिदीन! क्या अब मोस्ट वांटेड सलाहुद्दीन को नहीं झेल पा रहा पाकिस्तान?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 22 Mar 2022 06:25 PM IST
सार

पाकिस्तान में मौजूद सैयद सलाहुद्दीन, जिसका दूसरा नाम सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह है, उसे आर्मी अफसरों और खुफिया एजेंसी के अधिकारियों की तर्ज पर सुरक्षा एवं दूसरी सुविधाएं मिलती हैं। वह जिस गाड़ी में चलता है, उसकी नंबर प्लेट काले रंग की होती है। सलाहुद्दीन की सुरक्षा में आईएसआई के कमांडो और आतंकी दस्ते तैनात किए जाते हैं...

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Jammu-kashmir: sources said, as part of a special strategy, Indian security forces have cracked down on Hizbul Mujahideen chief Syed Salahuddin and other terrorist organizations
आतंकी सैयद सलाहुद्दीन - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी तंजीमों में से एक हिजबुल मुजाहिदीन कुछ समय से खामोश है। आजकल इस संगठन के नाम से बड़ी आतंकी घटनाएं दर्ज नहीं हो रहीं। भारतीय खुफिया एजेंसियों के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी आईएसआई तो लगातार हिजबुल मुजाहिदीन को जम्मू कश्मीर के लिए टास्क देती रहती है। इतना भी कहा गया है कि अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों पर हमला करो। जम्मू कश्मीर का पुलिसकर्मी जब ड्यूटी खत्म कर घर जाता है या बाजार में है, उस पर निशाना लगा दो। इतने टारगेट होने के बावजूद आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन खामोश है। क्या अब लड़खड़ाती पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था, एचएम सरगना 'सलाहुद्दीन' का खर्च नहीं झेल पा रही है? सलाहुद्दीन पाकिस्तान में बैठकर आतंकी गतिविधियां संचालित करता रहा है। जम्मू कश्मीर में उसके पांच बेटे और दो बेटियां रहती हैं। भारतीय सुरक्षा बलों की एक अचूक रणनीति ने आईएसआई के मोहरे को घाटी में खामोश बैठने के लिए मजबूर कर दिया है।

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'परिवार' और 'सीक्रेट' ऑपरेशन है एक बड़ी वजह...

पाकिस्तान में मौजूद सैयद सलाहुद्दीन, जिसका दूसरा नाम सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह है, उसे आर्मी अफसरों और खुफिया एजेंसी के अधिकारियों की तर्ज पर सुरक्षा एवं दूसरी सुविधाएं मिलती हैं। वह जिस गाड़ी में चलता है, उसकी नंबर प्लेट काले रंग की होती है। पाकिस्तान में सेना, आईएसआई और पुलिस के वाहनों की नंबर प्लेट काले रंग की होती है। उस पर सफेद रंग में अक्षर या संख्या अंकित रहती है। सलाहुद्दीन की सुरक्षा में आईएसआई के कमांडो और आतंकी दस्ते तैनात किए जाते हैं। अधिकारी के मुताबिक, एक विशेष रणनीति के तहत भारतीय सुरक्षा बलों ने हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन और दूसरे आतंकी संगठनों पर शिकंजा कसा है। सलाहुद्दीन के अनेक एजेंट यानी आतंकी, घाटी में खत्म हो चुके हैं। नई भर्ती का संकट खड़ा हो गया है।

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एनआईए कोर्ट ने शनिवार को लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम जैसे कई कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के खिलाफ यूएपीए की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत आरोप तय करने का आदेश दिया है। कश्मीर में रह रहे सलाहुद्दीन के पांच बेटे और दोनों बेटियां, अधिकांश सरकारी नौकरी में रहे हैं। हालांकि गत वर्ष सलाउद्दीन के दोनों बेटे, अहमद शकील को स्वास्थ्य विभाग और शाहिद यूसुफ सलाउद्दीन को सिंचाई विभाग से बर्खास्त कर दिया गया था। दोनों बेटे जेल में बंद किए गए। उन पर हवाला के जरिए आतंकियों की मदद करने का आरोप था।

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अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद कसा है शिकंजा

जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने बताया, घाटी में मौजूद आतंकी संगठनों पर शिकंजा कसा जा रहा है। आतंकी संगठन तो वही हैं, लेकिन नाम बदलकर सामने आ रहे हैं। कहीं यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट-जम्मू एंड कश्मीर (यूएलएफ जेके) हमले की जिम्मेदारी लेता है, तो दूसरी जगह 'गिलानी फोर्स' का नाम आगे आता है। 'लश्कर-ए-तैयबा' की नई शाखा 'द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) भी आजकल खासी सक्रिय है। कश्मीर टाइगर्स, पीएएफएफ, एलईएम व 'हरकत 313' जैसे हाइब्रिड आतंकियों की पौध खड़ी हो रही है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए यह नया गेम प्लान तैयार किया है।


पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-तैयबा', 'जैश-ए-मुहम्मद' और हिजबुल मुजाहिदीन की डोर आईएसआई अपने हाथ में रखती है। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद आतंकी समूहों पर शिकंजा कस गया है। एक साथ कई एजेंसियां कार्रवाई में लग जाती हैं। आतंकी समूहों में शामिल होने वाले स्थानीय युवाओं की संख्या 70 से भी नीचे आ गई है। लोकल हैंडलर कमजोर पड़े हैं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चौपट होने के कगार पर पहुंच गई है। संभावित है कि हिजबुल मुजाहिदीन की फंडिंग में दिक्कत आ रही हो। फंड में भारी कटौती कर दी गई हो। भारतीय सुरक्षा बलों ने कई तरफ से शिकंजा कसा है। गृह मंत्रालय ने सैयद सलाहुद्दीन को मोस्ट वांटेड कैटेगरी के आतंकियों की सूची में शामिल कर दिया है।

भारतीय एजेंसियों के निशाने पर रहा है सलाहुद्दीन

अगस्त 2021 में सैयद सलाहुद्दीन ने भारत को धमकी देने वाला एक ऑडियो मैसेज जारी किया था। उसने अपने संदेश में तालिबान आतंकियों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने में मदद की गुहार लगाई थी। सलाहुद्दीन ने कहा था, मैं अल्लाह से प्रार्थना करता हूं कि वो अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात को मजबूत करे ताकि वो भारत के खिलाफ कश्मीरियों का समर्थन कर सकें। इसके बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसके परिवार को लेकर कई तरह की जांच शुरू की। जुलाई 2021 में सलाउद्दीन के दोनों बेटों पर जम्मू कश्मीर प्रशासन की गाज गिरी। 2017 में सलाहुद्दीन के बेटे सैयद शाहिद यूसुफ के घर पर एनआईए ने छापा मारा था।



2011 के टेरर फंडिंग केस में उसे गिरफ्तार किया गया। सलाहुद्दीन के आदेश पर सीरिया में मौजूद गुलाम मोहम्मद बट नाम के एक संदिग्ध ने यूसुफ को पैसे भेजे थे। यह पैसा 2011 से 2014 के बीच पहुंचा था। यह पैसा आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ था। घाटी में सुरक्षा बलों पर पत्थराव करने के लिए एचएम आतंकी संगठन, युवाओं को भड़काता रहा है। हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान साल 2016 में एक मुठभेड़ में मारा गया था। बुरहान वानी हिजबुल मुजाहिद्दीन का पोस्टर बॉय था। कश्मीर आधारित हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी संगठन की स्थापना 1989 में कश्मीरी अलगाववादी मुहम्मद एहसान डार ने की थी। बाद में इसकी कमान आतंकवादी सलाउद्दीन ने संभाली। वह पाकिस्तान से इस आतंकवादी संगठन को संचालित करता है।

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