फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu Kashmir: no arrest of jawans in Jammu-Kashmir, Ladakh! This protection was not in Ranbir Penal Code

Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में नहीं होगी जवानों की गिरफ्तारी! 'रणबीर पीनल कोड' में नहीं था ये संरक्षण

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 02 May 2023 04:47 PM IST
विज्ञापन
सार
Jammu Kashmir: आदेशों में कहा गया है कि राज्य सरकार भी अपने पुलिस बलों/फोर्स को उक्त सेक्शन के सब-सेक्शन (1) के अंतर्गत प्रोटेक्शन प्रदान कर सकती है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सेना के अलावा जितने भी केंद्रीय बल हैं, उन सभी के जवानों को गिरफ्तारी से संरक्षण मिलेगा...
loader
Jammu Kashmir: no arrest of jawans in Jammu-Kashmir, Ladakh! This protection was not in Ranbir Penal Code
Jammu Kashmir: श्रीनगर में जवान - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 'भारत संघ के सशस्त्र बल' के जवानों को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया है। यह आदेश केंद्रीय अर्धसैनिक बलों पर भी लागू होता है। राज्य में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद इस प्रोटेक्शन का प्रावधान किया गया है। अब केंद्र सरकार की सहमति के बिना किसी जवान की गिरफ्तारी नहीं हो सकेगी। तीन वर्ष पहले तक राज्य में 'रणबीर पीनल कोड 1989' लागू था। इस वजह से वहां पर दंड प्रक्रिया संहिता 'सीआरपीसी' के सेक्शन 45 '1973' के तहत 'सशस्त्र बलों के सदस्यों को गिरफ्तारी से संरक्षण प्राप्त नहीं था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे लेकर जम्मू-कश्मीर के कानून, न्याय और संसदीय मामलों के विभाग से चर्चा करने के बाद उक्त प्रपोजल को अपनी मंजूरी दी है। गृह मंत्रालय ने भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय से भी सलाह ली है। सीआरपीएफ मुख्यालय सहित अन्य बलों ने उक्त आदेश जारी कर दिया है।

गृह मंत्रालय में हुआ मंथन

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 की समाप्ति से पहले वहां पर 'रणबीर पीनल कोड 1989' लागू था। इस वजह से केंद्र सरकार के कई कानून वहां पर लागू नहीं हो सकते थे। 2019 में जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को खत्म किया गया, तो सशस्त्र बलों के जवानों को ड्यूटी के दौरान हुई किसी घटना में गिरफ्तारी से छूट प्रदान करने की राह प्रशस्त हो गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय में इस विषय को लेकर खासा मंथन हुआ है। जम्मू-कश्मीर में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें सशस्त्र बलों के जवानों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है।

यह भी पढ़ें: BSF: क्या टूटेगा बीएसएफ को नियमित DG न मिलने का रिकार्ड? दर्जनों IPS और कैडर अफसर होने पर भी किसी को अवसर नहीं

स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस के साथ तनातनी रही है। जवानों को हिरासत में लेने जैसी घटनाएं हुई हैं। ऐसे गंभीर मामलों में अपने जवान का बचाव करने के लिए सेना, स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस के साथ सख्ती से पेश आई है। चूंकि किसी भी तरह की ड्यूटी में कोई जवान अपनी मनमर्जी से कुछ नहीं करता है। वह केवल अपने अधिकारी की आज्ञा का पालन और तय ड्यूटी का निर्वहन करता है।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों का ऑपरेशन हो, नाका ड्यूटी या कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखना, इस तरह की ड्यूटी के दौरान जवानों पर भीड़ द्वारा हमला किया जाता रहा है। कुछ वर्ष पहले तक कश्मीर में पत्थराव की घटनाएं सामान्य बात थी। इनमें अनेक जवान घायल हो जाते थे।

सेना, केंद्रीय बलों के जवानों को मिलेगा संरक्षण

यहां तक कि जब सशस्त्र बलों के जवान किसी ऑपरेशन में आतंकियों के साथ लोहा लेते थे, तब एकाएक भीड़ द्वारा सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया जाता था। सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों के साथ ऐसी घटनाएं होती रही हैं। उस वक्त स्थिति को संभालने के लिए जवानों द्वारा जब बल प्रयोग किया जाता, तो उन्हें ही आरोपी बनाकर कानूनी कार्रवाई के दायरे में लेने का प्रयास होता था। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दोनों जगहों पर जवानों को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया गया है। आदेशों में कहा गया है कि राज्य सरकार भी अपने पुलिस बलों/फोर्स को उक्त सेक्शन के सब-सेक्शन (1) के अंतर्गत प्रोटेक्शन प्रदान कर सकती है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सेना के अलावा जितने भी केंद्रीय बल हैं, उन सभी के जवानों को गिरफ्तारी से संरक्षण मिलेगा। सीआरपीएफ के आदेश में लिखा है कि अगर सशस्त्र बल का कोई जवान ड्यूटी के तहत यात्रा कर रहा है, तो वहां भी संरक्षण का प्रावधान रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed