फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Jammu-kashmir has more cases pendingin courts than in other states

इंसाफ की चौखट पर सिसक रही आस

Sat, 25 Feb 2017 04:10 PM IST
ब्रजेश कुमार सिंह/अमर उजाला, जम्मू
ब्रजेश कुमार सिंह/अमर उजाला, जम्मू Updated Sat, 25 Feb 2017 04:10 PM IST
विज्ञापन
Jammu-kashmir has more cases pendingin courts  than in other states

रियासत में न्याय पाने के लिए लोग इंसाफ की चौखट पर दरबदर भटकने को मजबूर हैं। आतंकवाद प्रभावित तथा बार्डर स्टेट होने के नाते यहां के लोगों का आए दिन गोलियों से सामना होता है। इनकेबीच रहने के यहां के बाशिंदे आदी हो चुके हैं, लेकिन इंसाफ पाने के लिए भी यहां कम जद्दोजहद नहीं करनी पड़ती है। आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो यहां लंबित केस की सं या भले ही अन्य राज्यों की तुलना में कम दिखती हो, लेकिन पांच या 10 साल से अधिक समय से इंसाफ की आस लिए लोगों का प्रतिशत राष्ट्रीय स्तर से ज्यादा है। 

विज्ञापन


नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड में दर्ज आंकड़ों के अनुसार 10 साल से अधिक समय से राष्ट्रीय स्तर पर लंबित मुकदमों का प्रतिशत 10.13 है, जबकि जम्‍मू कश्मीर का 13.73। पांच से दस साल के बीच राष्ट्रीय और जम्‍मू कश्मीर में लंबित मुकदमों का प्रतिशत क्रमश: 16.98 व 30.94 है। इसी तरह दो से पांच साल के बीच राष्ट्रीय स्तर पर 29.22 और जम्‍मू कश्मीर में 32.53 फीसदी मुकदमे लंबित हैं। दो साल से कम लंबित मुकदमों में जम्‍मू कश्मीर की स्थिति राष्ट्रीय स्तर से बेहतर जरूर है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर 43.66 और जम्‍मू कश्मीर में 22.8 प्रतिशत मुकदमे लंबित हैं।
विज्ञापन


जम्‍मू कश्मीर में कुल 57206 मामले लंबित हैं। इनमें सिविल के 23591 और क्रिमिनल के 33615 मामले हैं। जनवरी महीने में 10 साल से अधिक पुराने सिविल के सात और क्रिमिनल के एक मामले निबटाए गए। वरिष्ठ नागरिकों के 395 मामले लंबित हैं। इनमें से 339 सिविल और 56 क्रिमिनल के हैं। महिलाओं की ओर से दर्ज 4411 मामलों में से 2683 सिविल और 1725 क्रिमिनल केस हैं। रियासत में दो से पांच साल के बीच 18609 और पांच से 10 साल के बीच 17699 मामलों का निबटारा नहीं हो सका है। 23 फरवरी तक दर्ज आंकड़ों केअनुसार 10 साल से अधिक समय से 7855 मामले विभिन्न अदालतों में लटके पड़े हैं। दो साल से कम समय से लंबित मुकदमों की संख्या 13043 (22.8 प्रतिशत) है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट के वकीलों का कहना है कि बहुत सारे मामले काफी समय से लंबित पड़े हुए हैं। इससे वादकारी आते हैं और परेशान होकर लौट जाते हैं। न्याय प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। साथ ही वादकारियों के अधिवक्ताओं को भी केस जल्द से जल्द निबटाने के लिए प्रयास करने चाहिए। प्रत्येक जज के लिए महीने में केस निबटाने की संख्‍या निर्धारित है। इस वजह से वे निर्धारित संख्‍या में मामलों का निबटारा तो करते ही हैं।  


लंबित वादों की स्थिति (प्रतिशत में)

मामले                           राष्ट्रीय               जम्‍मू-कश्मीर 

दस साल से अधिक            10.13               13.73

पांच से 10  साल               16.98               30.94 

दो से 5 साल                     29.122            32.53 

दो साल से कम                  43.66               22.8 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed