जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली की बड़ी तैयारी में जुट गई है केंद्र सरकार
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भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जम्मू-कश्मीर से जुड़ा पूरा विंग सक्रिय है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर का प्रभारी पार्टी के उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना को बनाया है। केंद्र सरकार ने भी राज्य में हालात को सामान्य करने के लिए कमर कस ली है। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल महामहिम सत्यपाल मलिक से केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार संपर्क में है, वहीं पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, एनसी के उमर अब्दुल्ला और कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने केंद्र सरकार के रुख को देखते हुए प्रयास तेज कर दिया है। दरअसल साल के अंत तक जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव कराना केंद्र सरकार की मजबूरी बन रही है और केंद्र शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने की हर तैयारी को मुकम्मल कर लेना चाहता है।
अराजक को माफ नहीं करेगी सरकार
केंद्र सरकार लगातार राज्य के अराजक तत्वों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी इसी के पक्षधर हैं। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने भी समन्वय बनाकर राज्य में सूचना के आदान-प्रदान को गति दे दी है। फिलहाल सुरक्षा बलों से केंद्रीय और राज्य एजेंसियों का मुख्य मकसद आतंकियों, अलगाववादी नेताओं तथा गुटों के वित्तीय स्रोत पर निगाह रखना और गलत तरीके से होने वाली फंडिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है। सुरक्षा संबंधी तमाम चुनौतियों को देखते हुए केंद्र ने राज्य में अर्ध सैनिक बलों की 100 कंपनियों की तैनाती को बढ़ाया है। सेना और सीमा सुरक्षा बल से नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आतंकवाद को रोकने के लिए लगातार सतर्क रहने के लिए कहा गया है। बताते हैं इसके बाबत केंद्र गृहमंत्री लगातार राज्य के हालात का जायजा ले रहे हैं।
केंद्रीय योजनाओं का सीधा लाभ
केंद्र जम्मू-कश्मीर में हालात को सामान्य करने के लिए दो नीतियों पर अमल कर रहा है। अलगाववादी नेताओं, अराजक तत्वों की निगरानी तथा उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने के साथ-साथ सरकार राज्य के लोगों का दिल जीतने पर काम कर रही है। जम्मू-कश्मीर के लोगों को केंद्रीय योजनाओं का लाभ देश के अन्य भागों की तरह तेजी से उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन काफी मुस्तैदी दिखा रहा है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में भी आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के प्रावधानों को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार चाहती है कि राज्य में आखिरी व्यक्ति तक केंद्रीय योजनाओं का लाभ पहुंचे। राज्य के लोगों को सब्सिडी समेत अन्य लाभ सीधे उनके पास जाए। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि राज्य में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए पंचायत चुनाव के बाद वह अक्टूबर तक राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए भयरहित शांतिपूर्ण मतदान का वातावरण तैयार कर लेगी।