जम्मू-कश्मीर: 38 पाकिस्तानी आतंकी खत्म, निशाने पर सीमा पार के 71 दहशतगर्द, ऐसे भेदी जाएंगी पीर पंजाल की गुफाएं
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के जंगलों में, खासतौर पर पीर पंजाल की गुफाओं में छिपे आतंकियों को अब बाहर निकालने के लिए सुरक्षा बलों की नई टीमें एक विशेष ऑपरेशन को अंजाम देंगी। विशेष दस्ते के निशाने पर पाकिस्तान से आए 71 दहशतगर्द होंगे। जम्मू कश्मीर में इस साल 38 पाकिस्तानी आतंकी खत्म किए गए हैं। जेकेपी के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, अनंतनाग का कोकरानाग एनकाउंटर, जिसमें सेना के कर्नल, मेजर और जेकेपी के डीएसपी हुमायूं भट सहित एक जवान शहीद हुआ था, के बाद ऑपरेशन की रणनीति बदली जा रही है। जम्मू कश्मीर में सेना, जेकेपी और सीआरपीएफ के दस्ते में अब 'कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) के करीब सौ जवानों को शामिल किया गया है। अभी इन जवानों की तैनाती को लेकर होमवर्क किया जा रहा है। सीआरपीएफ की कोबरा यूनिट को 'जंगल वॉरफेयर' का खासा अनुभव हासिल है।
अभी 111 सक्रिय आतंकवादी कहीं पर छिपे हैं
कश्मीर में इस वर्ष अभी तक 31 आतंकी मारे गए हैं। जेकेपी, सेना व एसएसबी के संयुक्त ऑपरेशन में एक आतंकी, जेकेपी, सेना व बीएसएफ के ज्वाइंट ऑपरेशन में दो आतंकी, जेकेपी, सेना व सीआरपीएफ के ज्वाइंट ऑपरेशन में पांच आतंकी और जेकेपी व सेना के ज्वाइंट ऑपरेशन में 23 आतंकी खत्म हुए हैं। जम्मू कश्मीर में गत वर्ष 137 आतंकी सक्रिय थे। इनमें 55 लोकल और 82 विदेशी दहशतगर्द शामिल हैं। मारे गए कुल आतंकियों की संख्या 187 रही थी। इनमें 130 लोकल और 57 विदेशी आतंकी थे। इस साल जम्मू कश्मीर में कुल 111 सक्रिय आतंकवादी बताए गए हैं। इनमें से 71 विदेशी यानी पाकिस्तानी हैं। इस साल अभी तक 47 आतंकी मारे गए हैं, जिनमें 38 विदेशी और 9 लोकल दहशतगर्द शामिल हैं। 2021 में 180, 2020 में 221, 2019 में 157 और 2018 में 257 आतंकी मारे गए थे।
कोबरा को पहली बार कश्मीर में उतारा गया
जेकेपी के सूत्रों का कहना है कि आतंकियों के खिलाफ सेना, पुलिस और सीआरपीएफ, ज्वाइंट ऑपरेशन करती है। कभी कभार दूसरे बल भी किसी ऑपरेशन का हिस्सा बन जाते हैं। यह सब आतंकियों की लोकशन पर निर्भर करता है। कोबरा को जम्मू कश्मीर के घने जंगलों और पीर पंजाल की पहाड़ियों में बनीं गुफाओं के बारे में जानकारी दी गई है। उन्हें संबंधित क्षेत्रों में अभ्यास भी कराया गया है। पिछले दिनों पीर पंजाल की गुफाओं में छिपे एक ही आतंकी ने भारतीय सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। हालांकि सातवें दिन वह आतंकी मारा गया, लेकिन उससे पहले सेना के कर्नल, मेजर, जवान और जेकेपी के डीएसपी शहीद हो गए थे। पीर पंजाल की पहाड़ियों पर घना जंगल है। मुजफ्फराबाद से किश्तवाड़ तक फैले जंगल में आतंकी छिप जाते हैं। दूसरा, वहां पर प्राकृतिक गुफाएं बनी हैं। लगभग पौने दो सौ किलोमीटर के क्षेत्र में तलाशी अभियान आसान नहीं है। यहां पर नब्बे डिग्री एंगल वाली खड़ी पहाड़ियां हैं। वहां पर छिपे आतंकियों को नीचे के क्षेत्रों की गतिविधियां दिखती रहती हैं। ऐसे में वे कई बार सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचा देते हैं।
कोबरा के बेहतरीन इस्तेमाल की रणनीति
सूत्रों का कहना है कि आतंक रोधी ऑपरेशनों में कोबरा कमांडो का बेहतर इस्तेमाल हो, इसकी रणनीति बनाई जा रही है। ये भी संभव है कि कोबरा कमांडो को पहले सर्च ऑपरेशनों में लगाया जाए। कोबरा जवानों को किस बटालियन में रखा जाए या उन्हें छोटी टीमों में विभाजित कर सेना व जेकेपी दस्तों में शामिल किया जाए, इस बाबत विचार हो रहा है। कोबरा यूनिट का गठन करने से पहले यूएस मरीन कमांडो, उनकी ट्रेनिंग, वर्किंग स्टाइल, सर्जीकल स्ट्राइक और दूसरे कई तरह के ऑपरेशन की जानकारी ली गई थी। यह विशिष्ट कमांडो फोर्स जंगल में बिना किसी मदद के 11 दिन तक लड़ सकती है। घने जंगलों में नक्सलियों, आतंकियों से लड़ने और दूसरे बड़े ऑपरेशनों के लिए इस विशिष्ट फोर्स को खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है। हथियार, वर्दी एवं तकनीकी उपकरणों के मामले में भी कोबरा दूसरे सभी बलों से पूरी तरह अलग है। बिना किसी मदद के लगातार डेढ़ सप्ताह तक जंगलों में लड़ते रहना इस फोर्स की खासियत है।