फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जल्लीकट्टू: यह सांड़ों नहीं जातीय वर्चस्व की लड़ाई है

Sun, 12 Feb 2017 04:41 PM IST
स्वामीनाथन नटराजन / बीबीसी हिन्दी
स्वामीनाथन नटराजन / बीबीसी हिन्दी Updated Sun, 12 Feb 2017 04:41 PM IST
विज्ञापन
Jallikattu: It is battle of Racial supremacy not bull fight

तमिलनाडु में ज्यादातर लोगों ने जल्लीकट्टू की वापसी का जश्न मनाया। इस पारंपरिक प्रतियोगिता में लोग सांड़ों से लड़ते हैं और उसे वश में करते हैं। कोर्ट ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था और इस प्रतिबंध को खत्म करने के लिए तमिलनाडु में व्यापक पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया था।



हालांकि दलितों का कहना है कि जल्लीकट्टू खेल में उन्हें भाग लेने से अब भी रोका जाता है। कभी-कभी तो यह मामला हिंसक हो जाता है। मदुरई के उत्तर में 60 किलोमीटर की दूरी पर कल्लापुर नाम का एक गांव है। इस गांव में जीवा नगर दलित कॉलोनी के द्वार पर एक देवता को समर्पित एक मंदिर है।


 

इन ट्रॉफियों को दलित टीम ने कबड्डी खेल में जीता है

Jallikattu: It is battle of Racial supremacy not bull fight

यह मंदिर ट्रॉफियों और शील्ड से घिरा हुआ है। इन ट्रॉफियों को दलित टीम ने कबड्डी खेल में जीता है। यहां दर्जनों मेडल भी हैं जिनकी चमक मौसम की मार से फीकी पड़ गई है। दलित समुदाय के अलग्गू नाम के एक बुजुर्ग ने कहा, ''इन्हें पिछले तीन सालों में हमारे लड़कों ने जीता है।

यहां जगह खाली करने के लिए पुराने कप और शील्ड हटा दिए गए हैं।'' जीवा नगर से राज्य स्तर के कई कबड्डी खिलाड़ी भी सामने आए, लेकिन जल्लीकट्टू दलितों के लिए प्रतिबंधित है।

'ऊंची जातियों का खेल जल्लीकट्टू'

उन्होंने कहा, ''करीब 40 साल पहले इस गांव के युवाओं ने जल्लीकट्टू में भाग लिया था, लेकिन जब हमारे नौजवानों ने हिन्दू जातियों के सांड़ों को अपने कब्जे में कर लिया तो हिंसक झड़प का सामना करना पड़ा।


 

हालांकि जल्लीकट्टू में हिस्सा नहीं लेने के फैसले से हिंसक झड़प थम नहीं गई

Jallikattu: It is battle of Racial supremacy not bull fight
1990 के दशक की शुरुआत में हमारे गांव के बुजुर्गों ने इस खेल में नहीं शामिल होने का फैसला किया। तब से हमलोग लगातार दर्शक की भूमिका में हैं।'' हालांकि जल्लीकट्टू में हिस्सा नहीं लेने के फैसले से हिंसक झड़प थम नहीं गई। 48 साल के कुमार बेघर हैं। इनके पास आय का कोई जरिया नहीं है। 15 जनवरी को इन्हें अज्ञात हमलावरों ने पीटा था। हमलावर जीवा नगर में घुस आए थे।

कुमार ने कहा, ''मेरे कूल्हे और घुटने के जोड़ अलग हो गए हैं। मैं केवल लाठी की मदद से ही चल सकता हूं। मुझे सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां एक इंजेक्शन तक नहीं दिया गया। मुझे नहीं पता कि कितने समय तक मैं ऐसे रहूंगा।'' शुरू में कुमार को पता नहीं था कि उन पर हमला क्यों हुआ। हालांकि, बाद में उन्हें इसकी वजह पता चली।  

 

विज्ञापन
विज्ञापन

इस खेल के दौरान दलित और हिन्दू जाति के युवाओं के बीच विवाद हुआ

Jallikattu: It is battle of Racial supremacy not bull fight

कुमार ने कहा, ''हिन्दू जाति के लोगों ने हमारे गांव में जल्लीकट्टू का आयोजन किया था। इस खेल के दौरान दलित और हिन्दू जाति के युवाओं के बीच किसी बात पर विवाद हुआ। इसी दौरान हिन्दू जाति के लोगों ने हिंसक हमला बोल दिया।'' कई स्थानीय जमींदार हिन्दू जाति व्यवस्था में ऊंची जाति वालों से नीचे हो सकते हैं, लेकिन ये संख्या के मामले में राजनीतिक रूप से शक्तिशाली हैं।

दलित जातीय संरचना में हाशिए पर हैं और ये उनके खेतों में काम करते हैं।

दलितों और गैरदलितों में साफ दीवार

तमिलनाडु के ज्यादातर गावं की तरह कल्लापुर भी दो हिस्सों में बंटा है। दलित और गैरदलितों में साफ लकीर खींची हुई है। जीवा नगर गांव में एक सड़क 200 परिवारों को बाकी बचे गांव से विभाजित करती है।


 
विज्ञापन

उन्हें दलितों का आगे बढ़ना रास नहीं आता है

Jallikattu: It is battle of Racial supremacy not bull fight

रेखा 36 साल की एक मां हैं। जब उनके पड़ोस में तोड़फोड़ हुई तो वह छुपी हुई थीं। रेखा ने कहा, ''वे गाली दे रहे थे और उन्होंने मोटरबाइकों में आग लगा दी। उन्होंने हमारे पानी टैंको में छेद कर दिया, उन्हें जो भी मिला उस पर डंडे से हमला बोला।'' हालांकि यहां असली मामला जल्लीकट्टू का नहीं है।

रेखा ने कहा कि वे हम पर हमला करने के लिए एक बहाना बनाते हैं। उन्हें दलितों का आगे बढ़ना रास नहीं आता है। जल्लीकट्टू प्रतियोगिता सदियों से लोकप्रिय है, लेकिन 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पशु अधिकारों की रक्षा करने वालों की शिकायत पर इस पर प्रतिबंध लगा दिया था।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed