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जल शक्ति मंत्री बोले: केंद्र का बांध बनाने का फैसला प्रदूषित नदियों को पुनर्जीवित करेगा, यमुना के मामले में दिल्ली सरकार पूरी तरह नाकाम

Sun, 19 Dec 2021 05:20 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 19 Dec 2021 05:20 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि संचाई योजना को आगे बढ़ाया है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश में रेणुकाजी बांध और उत्तराखंड में लखवर बांध समेत तीन राष्ट्रीय परियोजनाओं में 90 फीसदी का अनुदान दिया गया है। जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि इन बांध का निर्माण देश की नदियों में प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाएगा।

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Jal Shakti Minister Gajendra Singh Shekhawat says decision to build two new dams will rejuvenate Yamuna river blames Delhi Government
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत - फोटो : facebook/mpjodhpur

विस्तार

जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रविवार को कहा कि यमुना नदी का 98 फीसदी प्रदूषण केवल दिल्ली में बहने वाली नदी की दो धाराओं से आता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दो नए बांध बनाने का जो फैसला लिया है वह प्रदूषित नदियों को 'पुनर्जीवित' करेगा। रेणुकाजी और लखवर बांधों का निर्माण राष्ट्रीय राजधानी में जल आपूर्ति की जरूरतों के लिए काफी अहम होगा साथ ही इससे नदियों में प्रदूषण में भी कमी आएगी। 

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समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में शेखावत ने कहा, 'गंदा नदी की तरह ही यमुना के मामले में भी यह निर्देश दिया गया है कि बांध से संबंधित सभी हितधारकों को गैर मानसून के महीनों में पानी की निश्चित मात्रा छोड़नी होगी। हम इसे अनिवार्य बनाएंगे कि यमुना में भी कुछ मात्रा में पानी बहते रहना चाहिए। यदि अपशिष्ट ट्रीटमेंट प्लांट काम कर रहे हैं, तो ताजा और ट्रीटेड पानी दोनों यमुना की स्थिति में सुधार करेंगे।'
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यमुना नदी में 98 फीसदी प्रदूषण की जिम्मेदार है अकेले दिल्ली
यमुना में प्रदूषण के मुद्दे पर शेखावत ने कहा कि दिल्ली में यमुना नदी का क्षेत्र 22 किलोमीटर का है। यह पूरी नदी का केवल दो फीसदी हिस्सा है और पूरी नदी में 98 फीसदी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। दिल्ली में इस नदी के प्रदूषण का मुख्य कारण अनट्रीटेड या सेमी ट्रीटेड औद्योगिक अपशिष्ट या सीवेज है जो सीधे यमुना नदी में बहा दिया जाता है। बता दें कि 1300 किमी लंबी यमुना नदी देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है।
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जो काम दिल्ली सरकार को करना चाहिए था वो केंद्र कर रहा है
शेखावत ने कहा कि दिल्ली सरकार यमुना में प्रदूषण के लिए उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों पर दोष मढ़ती रहती है लेकिन असलियत यह है कि दिल्ली के अपशिष्ट ट्रीटमेंट प्लांट निर्धारित मानक के नहीं है और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को भी अपग्रेड करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, पानी राज्य का विषय है ऐसे में यह जिम्मेदारी भी राज्य की है। यमुना के पुनर्जीवन पर काम करके असल में हम उनका काम कर रहे हैं।


परियोजनाएं बनाने व उन्हें पूरा करने में दिल्ली सरकार नाकाम
जल शक्ति मंत्री ने कहा कि किसी भी परियोजना के लिए केंद्र तकनीकी या वित्तीय सहयोग दे सकता है। लेकिन, एक परियोजना की कल्पना करना, उसे बढ़ाना, उसे लागू करना और उसका संचालन और रखरखाव करना राज्य की जिम्मेदारी है। दिल्ली सरकार इस काम में पूरी तरह से असफल रही है। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं की शुरुआत साल 2012 में की गई थी, दिल्ली सरकार उन्हें भी अब तक पूरा नहीं कर पाई है। 

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