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Jaishanker: यूएस चुनाव-पश्चिम एशिया में जंग की आहट के बीच जयशंकर चिंतित; अगले पांच साल के लिए की यह भविष्यवाणी
Tue, 13 Aug 2024 11:03 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Tue, 13 Aug 2024 11:03 PM IST
सार
जयशंकर ने कहा कि मैं आशावादी हूं और समस्याओं के समाधान के बारे में सोचता हूं। मेरा मानना है कि उन समस्याओं के बारे में न सोचा जाए जो समाधान से उत्पन्न हों। इस वक्त विश्व एक कठिन दौर से गुजर रहा है।
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एस जयशंकर
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, अमेरिका चुनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चिंता जताई है। उन्होंने अगले पांच सालों का पूर्वानुमान जताते हुए चेतावनी दी है कि अगर तनाव कम न हुए और आपसी बातचीत से मुद्दों का हल न निकाला गया तो विश्व के हालात बेहद खराब जाएंगे। नई दिल्ली में मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया, यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध, दक्षिण पूर्व एशिया में सैन्य तनाव, आर्थिक चुनौतियां और जलवायु परिवर्तन से विश्व की स्थिति ठीक नहीं है।
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विदेश मंत्री ने कहा कि यह संभावनाएं भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधों का आधार हैं। पूरी दुनिया इस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों की ओर देख रही है। जयशंकर ने कहा कि मैं आशावादी हूं और समस्याओं के समाधान के बारे में सोचता हूं। मेरा मानना है कि उन समस्याओं के बारे में न सोचा जाए जो समाधान से उत्पन्न हों। मैं कहूंगा कि इस वक्त विश्व एक कठिन दौर से गुजर रहा है।
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उन्होंने कहा कि मेरे पास अगले पांच साल का पूर्वानुमान है। इस वक्त मध्य पूर्व, यूक्रेन, दक्षिण पूर्व, दक्षिण एशिया में जो हो रहा है। वह ठीक नहीं है। कोविड का प्रभाव जारी है। इससे जो देश बाहर आ गए हैं, वे इसको मामूली मान रहे हैं। मगर कई देश अब भी इससे बाहर नहीं निकल सके हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया के तनाव को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका समेत कई यूरोपीय देशों ने ईरान से पीछे हटने का आह्वान किया है। क्योंकि इस्राइल के हमले में हमास प्रमुख इस्माइल हानिया की हत्या के बाद ईरान की ओर से बदला लेने के लिए युद्ध किए जाने की आशंका बढ़ रही है।
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जयशंकर ने सैन्य संघर्ष से विश्व को होने वाले खतरों को लेकर चेतावनी दी कि इसके परिणाम ठीक नहीं होंगे। जैसे पिछले साल यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद ईंधन और उर्वरक की कीमतें बढ़ गईं थीं, कुछ वैसा ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस वक्त अधिक से अधिक देश संघर्ष कर रहे हैं। व्यापार कठिन हो रहा है। विदेशी मुद्रा की कमी है।
उन्होंने गाजा में फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए हूति विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर किए जा रहे बढ़ते समुद्री डाकुओं के हमलों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लाल सागर जैसी घटनाओं के परिणाम विध्वंसकारी होते हैं। इससे कभी-कभी पूरा का पूरा क्षेत्र नष्ट हो जाता है।
उन्होंने कहा कि इससे भारत-अमेरिका के संबंध मजबूत होंगे। अमेरिकी चुनाव पर चर्चा करने से इनकार करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि हम अन्य देशों के चुनावों पर टिप्पणी नहीं करते। अमेरिका अपना निर्णय देगा। हमें पूरा विश्वास है कि पिछले 20 वर्षों के अनुभव के आधार पर हम नए राष्ट्रपति के साथ काम करेंगे।