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Foreign Policy : भारत का अमेरिकी या चीन के खेमे में शामिल होना जरूरी नहीं, जयशंकर की खरी-खरी

Fri, 03 Jun 2022 03:14 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 03 Jun 2022 03:14 PM IST
सार

जयशंकर ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के आठ साल के कार्यकाल के दौरान देश की विदेश नीति का कायाकल्प हुआ है। 
 

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Jaishankar clears: It is not necessary for India to join any axis, Modi government transformed foreign policy
विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : ANI

विस्तार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत का अमेरिका या चीन के नेतृत्व वाली किसी धुरी या खेमे में शामिल होना आवश्यक नहीं है। भारत को अपनी पसंद चुनने का हक है, जो उसके मूल्यों व हितों पर आधारित हो। 
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जयशंकर ने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के आठ साल के कार्यकाल के दौरान देश की विदेश नीति का कायाकल्प हुआ है। जयशंकर से एक साक्षात्कार में पूछा गया था कि दुनिया में एक अमेरिका नीत धड़ा और दूसरा चीन के नेतृत्व वाला धड़ा है, भारत किस में शामिल होगा? जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि यह आप भारत पर थोप नहीं सकते। देश के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह किसी धड़े में शामिल हो। 

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उन्होंने कहा कि मैं नहीं सोचता कि हमें किसी दायरे में सीमित रहना चाहिए, सिर्फ इसलिए कि मैं आपसे सहमत नहीं हूं। इसका मतलब है कि हम हमारी राय पर कायम हैं। दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां क्या हैं? जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, सुरक्षा...आदि। आप इनमें से कोई भी या सारी चुनौतियों को ले लीजिए, इनका भारत से कोई न कोई उत्तर जरूर मिलेगा। 
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यूरोप को कही दो टूक बातें 
विदेश मंत्री ने कहा कि यूरोप को इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा कि उसकी समस्याएं दुनिया की समस्याएं हैं, लेकिन दुनिया की समस्याएं यूरोप की समस्याएं नहीं हैं। आज चीन और भारत के बीच संबंध बन रहे हैं, लेकिन यूक्रेन में क्या हो रहा है?


पीएम मोदी के नेतृत्व में विदेश नीति का कायाकल्प
मोदी सरकार के आठ साल होने के मौके पर जयशंकर ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व देश की विदेश नीति का कायाकल्प् हुआ है। एक ट्वीट कर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी देश का आगे बढ़कर नेतृत्व करते हैं। सोशल मीडिया में साझा किए गए एक वीडियो में जयशंकर ने पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास, सुरक्षा, अनिवासी भारतीयों से संपर्क, व्यापार व विदेश नीति को लेकर हुई प्रगति का विस्तार से जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि ध्रुवीकृत विश्व में हमने हमारी आजादी कायम रखी है। महामारी से त्रस्त दुनिया के लिए हम एक राहत का स्रोत रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों से निपटने में हम भलाई करने वाली ताकत बने हैं। हम नागरिक केंद्रित कूटनीति का स्वागत करते हैं। 



11 साल पहले हुई थी मोदी से पहली मुलाकात
जयशंकर ने बताया कि पीएम मोदी से उनकी पहली मुलाकात 2011 में तब हुई थी जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। जयशंकर ने कहा कि 11 साल पहले, नवंबर 2011 में वह चीन में राजदूत थे। तब मोदी ने उनसे बात की थी। उन्हें याद आया कि इस मुलाकात के दौरान गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था, 'मैं गुजरात का मुख्यमंत्री हो सकता हूं, लेकिन मैं भारत का नागरिक हूं। जब मैं बाहर जाऊंगा तो हमारी राष्ट्रीय समझ से एक मिलीमीटर भी अलग नहीं रहूंगा।'
 
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