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Jairam Ramesh: '1971 में निक्सन-किसिंजर पर भारी पड़े थे पीएन हक्सर और इंदिरा गांधी', जयराम रमेश का खुलासा

Thu, 30 Nov 2023 12:17 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 30 Nov 2023 12:17 PM IST
सार

जयराम रमेश ने लिखा कि 'हेनरी किसिंजर बेहद अहम शख्सियत थे लेकिन वह उतने ही विवादित भी रहे। हालांकि उनकी बेहतरीन बुद्धिमत्ता और उनकी शख्सियत के जादू पर किसी को शक नहीं है।' 

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Jairam ramesh recall henry kissinger and richard nixon outplayed by indira gandhi pn haksar in 1971 india paki
इंदिरा गांधी और हेनरी किसिंजर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर का निधन हो गया है। किसिंजर को याद करते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गुरुवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि 1971 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और तत्कालीन विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर ने भारत को काफी सिरदर्द दिया था लेकिन तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके सहयोगी पीएन हक्सर उन पर भारी पड़े थे।
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जयराम रमेश का दावा 
बता दें कि वियतनाम से अमेरिका के निकलने के बाद से अमेरिकी विदेश नीति पर हेनरी किसिंजर का जबरदस्त प्रभाव रहा था। किसिंजर का 100 साल की उम्र में बुधवार को निधन हो गया। जयराम रमेश ने लिखा कि 'हेनरी किसिंजर बेहद अहम शख्सियत थे लेकिन वह उतने ही विवादित भी रहे। हालांकि उनकी बेहतरीन बुद्धिमत्ता और उनकी शख्सियत के जादू पर किसी को शक नहीं है।' कांग्रेस नेता ने लिखा कि 'बीते तीन दशकों से वह भारत के अच्छे दोस्त और समर्थक रहे और बेशक वह भारत के समर्थक थे लेकिन ऐसा हमेशा नहीं था। 1971 में खासकर राष्ट्रपति निक्सन और उन्होंने (किसिंजर) भारत को काफी सिरदर्द दिया और उन्हें लगता था कि वह भारत को झुका देंगे लेकिन इंदिरा गांधी और पीएन हक्सर उन पर भारी पड़े थे।'
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किसिंजर पर लगे हैं कई आरोप
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि मैंने अपनी किताब 'Intertwined Lives: PN Haksar & Indira Gandhi' में किसिंजर और हक्सर और रिचर्ड निक्सन और इंदिरा गांधी के बीच हुई बातचीत की विस्तार से जानकारी दी है। जयराम रमेश ने लिखा कि गैरी बास ने भी अपनी किताब  'The Blood Telegram: Nixon, Kissinger and a Forgotten Genocide' में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को लेकर किसिंजर पर कई आरोप लगाए हैं। 
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इंदिरा गांधी ने कूटनीतिक तौर पर दी थी अमेरिका को पटखनी
बता दें कि 1971 की लड़ाई में भारत पर दबाव बनाने के उद्देश्य से अमेरिका ने अपने समुद्री बेड़े यूएसएस एंटरप्राइज को बंगाल की खाड़ी की तरफ रवाना कर दिया था। अमेरिका के इस कदम पर सोवियत संघ भी चुप नहीं बैठा और उसने भी भारत के समर्थन में अपना एक समुद्री बेड़ा हिंद महासागर में अमेरिकी बेड़े के पीछे लगा दिया था। सोवियत संघ का बेड़ा जनवरी 1972 तक अमेरिकी बेड़े के पीछे लगा रहा, जब तक अमेरिकी बेड़ा वापस नहीं लौट गया। इसे भारत की अमेरिका पर कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा गया। साथ ही सोवियत संघ ने तीन बार सुरक्षा परिषद में भारत पाकिस्तान युद्धविराम के लिए लाए गए प्रस्ताव पर वीटो कर भारत को बचाया था। इससे तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर इतने नाराज हो गए थे कि उन्होंने राष्ट्रपति निक्सन से पूछे बिना ही अगले कुछ दिनों में सोवियत संघ के साथ होने वाली शिखर वार्ता को रद्द करने की धमकी दे डाली थी। 
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