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कोलकाता में जय श्रीराम के नारे: ममता बनर्जी व भाजपा दोनों अपने मकसद में कामयाब, जानिए कैसे

Sun, 24 Jan 2021 05:46 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 24 Jan 2021 05:46 PM IST
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Jai Shri Rams slogan in Kolkata: Mamta Banerjee and BJP both succeed in their cause, know how
ममता बनर्जी - फोटो : social media

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती के मौके पर शनिवार को कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित कार्यक्रम में लगे ‘जय श्रीराम‘ को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व भाजपा दोनों अपने मकसद में कामयाब रहे। नारेबाजी के विरोध में ममता द्वारा भाषण नहीं देने के कदम को मीडिया में जहां तृणमूल कांग्रेस प्रमुख की छवि सशक्त नेता के तौर पर उभरी, वहीं भाजपा ने उन्हें लगे हाथ हिंदुत्व विरोधी बता दिया। सवाल उठाया जा रहा है कि जय श्रीराम के नारे में आपत्तिजनक क्या था? वह कोई हूटिंग तो थी नहीं? 

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बता दें, नेताजी की जयंती पर विक्टोरिया मेमोरियल में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खासतौर से शिरकत करने पहुंचे थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी लंबे अरसे बाद पीएम के साथ किसी कार्यक्रम में मंचासीन थीं। कार्यक्रम की शुरुआत के बाद जैसे ही ममता बनर्जी को भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया तो श्रोताओं में मौजूद कुछ लोग अचानक जय श्रीराम के नारे लगाने लगे।
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चिढ़कर ममता ने यह कहा था-
नारेबाजी से चिढ़कर ममता बनर्जी ने अपने भाषण में सिर्फ इतना कहा-आपने कोलकाता में प्रोग्राम किया इसके लिए आभारी हूं, यह एक सरकारी कार्यक्रम है, कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं। एक गरिमा होनी चाहिए। किसी को लोगों को आमंत्रित करके अपमानित करना शोभा नहीं देता। यदि आप किसी को किसी सरकारी कार्यक्रम में आमंत्रित करते हैं, तो आपको उसका अपमान नहीं करना चाहिए। मैं नहीं बोलूंगी। जय बंगला, जय हिंद।
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ममता के विरोध के निहितार्थ
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ममता बनर्जी ने पीएम मोदी की मौजूदगी में भाषण नहीं देकर राज्य की जनता को आगामी चुनाव की दृष्टि से साफ संदेश दिया है कि वह अपने वोटबैंक को बचाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। नारेबाजी के बाद कार्यक्रम का एक तरह से बहिष्कार कर उन्होंने खुद को धर्मनिरपेक्ष नेता बताने की कोशिश की है। यदि वह नारेबाजी के बीच भाषण देतीं तो जनता में यह संदेश जाता कि वह भी हिंदू वोट बैंक के आगे झुक रही हैं। ऐसा न हो इसलिए ममता ने इशारों-इशारों में बात कह कर सशक्त नेता की छवि पेश की है। इससे कुछ देर के लिए लग सकता है कि भाजपा बैकफुट पर आ गई। 


बैकफुट पर नहीं आई भाजपा
जानकारों का कहना है कि चुनावी राज्य में जय श्रीराम के नारे व उसे लेकर ममता द्वारा कार्यक्रम में सरेआम नाराजगी जाहिर करने को भाजपा ने हाथों-हाथ लिया। तृणमूल को चुनावी पटखनी देने की तैयारी  में जुटी भाजपा ने ममता के विरोध को भगवान राम व हिंदुत्व के विरोध का रूप देने में देर नहीं की। सवाल उठाने लगे कि जय श्रीराम के नारे में आपत्तिजनक क्या था? ममता बनर्जी को बुरा क्यों लगा? क्या उन्हें भगवान राम में आस्था नहीं है? क्या वह हिंदुत्व विरोधी हैं? भाजपा ने इस मुद्दे पर ममता बनर्जी को घेरना शुरू कर दिया है। तृणमूल प्रमुख को हिंदुत्व व राम विरोधी बताया जाने लगा है। 

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