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अराजकता बनाम उत्कृष्टता: जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर PM की टिप्पणी से मचा हंगामा, शिक्षक संघ ने साधा निशाना

Sat, 25 Apr 2026 12:29 PM IST
Shivam Garg न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: Shivam Garg Updated Sat, 25 Apr 2026 12:29 PM IST
सार

जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद शिक्षक संघ ने कहा कि वित्तीय संकट के बावजूद संस्थान ने वैश्विक पहचान हासिल की है और यह शिक्षा व शोध का केंद्र बना हुआ है।

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Jadavpur University Earns Global Recognition Despite Financial Constraints: Teachers Body Responds to PM Remar
जादवपुर विश्वविद्यालय - फोटो : एएनआई

विस्तार

पश्चिम बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए हालिया बयान के बाद विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ (JUTA) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद संस्थान ने वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। शुक्रवार को बारुईपुर में एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री ने जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह प्रतिष्ठित संस्थान वर्तमान में अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है।

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शिक्षक संघ का पलटवार
जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (JUTA) ने प्रधानमंत्री के बयान का जवाब देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है और यह उपलब्धि गंभीर वित्तीय सीमाओं के बावजूद हासिल की गई है। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अग्रणी है, बल्कि सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने में भी इसकी अहम भूमिका रही है। शिक्षक संघ ने यह भी आरोप लगाया कि सभी मानकों को पूरा करने के बावजूद जादवपुर विश्वविद्यालय को इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा नहीं दिया गया, जिससे उसे अपेक्षित संस्थागत लाभ नहीं मिल सका।
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वित्तीय संकट पर केंद्र और राज्य पर सवाल
शिक्षक संघ ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि 'राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA)' के तहत मिलने वाली फंडिंग विश्वविद्यालय को जारी नहीं की गई। साथ ही राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए कि उसने भी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। JUTA ने यह चिंता भी जताई कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को कमजोर करने की कोशिशें सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों के लिए चुनौती बन सकती हैं। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि निजी संस्थानों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है।
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धर्मेंद्र प्रधान का ममता पर हमला, संस्थानों के पतन का लगाया आरोप
जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर छिड़ा विवाद अब राजनीतिक टकराव में बदलता जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए राज्य के शैक्षणिक संस्थानों के पतन का आरोप लगाया है। प्रधान ने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में वर्षों की चुप्पी और गिरावट ने राज्य के संस्थानों को कमजोर कर दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब जब इन संस्थानों के पुनरुद्धार की मांग तेज हो रही है, तो मुख्यमंत्री असहज महसूस कर रही हैं।

धर्मेंद्र प्रधान ने विश्वविद्यालय से जुड़ी एक यूजीसी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि संस्थान में एंटी-रैगिंग व्यवस्था कमजोर पाई गई और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थागत ढांचा कमजोर हुआ है और एक प्रमुख विश्वविद्यालय के अनुरूप जवाबदेही का अभाव दिखा है। रिपोर्ट के आधार पर फंड में कटौती की सिफारिश भी की गई थी। प्रधान ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने संस्थानों की बुनियादी समस्याओं को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनका कहना था कि शिक्षा परिसरों को अकादमिक जिम्मेदारी की बजाय राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।


ममता बनर्जी का पलटवार
वहीं, ममता बनर्जी ने हावड़ा में एक रैली के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री ने जादवपुर विश्वविद्यालय के साथ-साथ अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों का भी अपमान किया है। उन्होंने राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचे (NIRF) का हवाला देते हुए इन संस्थानों की उपलब्धियों को रेखांकित किया।

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