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Hindi News ›   India News ›   'It was his dream': Mother recalls Biraj Biswas's journey as he becomes youngest Bengal min at 32 Kolkata

पश्चिम बंगाल: 32 साल की उम्र में मंत्री बने विराज बिस्वास, मां बोलीं- बचपन का सपना हुआ साकार

Mon, 01 Jun 2026 10:36 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 01 Jun 2026 10:36 PM IST
सार

भाजपा विधायक विराज बिस्वास 32 वर्ष की उम्र में पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री बने हैं। करनदीघी से विधायक बने विराज ने शपथ लेने के साथ ही अपने बचपन के मंत्री बनने के सपने को साकार किया। पढ़िए रिपोर्ट-

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'It was his dream': Mother recalls Biraj Biswas's journey as he becomes youngest Bengal min at 32      Kolkata
विराज बिस्वास - फोटो : फेसबुक/विराज बिस्वास

विस्तार

भाजपा विधायक विराज बिस्वास सोमवार को 32 वर्ष की उम्र में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मंत्रिपरिषद के सबसे युवा सदस्य बन गए हैं। इसके साथ ही उनका बचपन का सपना पूरा हो गया, जिसने उन्हें छात्र राजनीति से सत्ता के गलियारों तक पहुंचाया।
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उत्तर दिनाजपुर जिले के करनदीघी से विधायक विराज बिस्वास ने लोक भवन में 34 अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ राज्य मंत्री पद की शपथ ली। भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें शामिल किया गया है।
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उनकी मां बीना बिस्वास ने पीटीआई से कहा, मुझे ऐसे बेटे को जन्म देने पर गर्व है। आज उसका सपना पूरा हो गया है और मैं बहुत खुश हूं। अपने बेटे के शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि छात्र जीवन से ही विराज की राजनीति में गहरी रुचि थी। वह अक्सर सार्वजनिक जीवन में आने की बात करते था। बीना बिस्वास ने कहा, वह हमेशा कहता था कि पढ़ाई पूरी मेहनत से करेगा। लेकिन राजनीति में भी सक्रिय रहेगा और एक दिन मंत्री बनेगा। यह उसका सपना था। 
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विराज बिस्वास की यह उपलब्धि उनके राजनीतिक सफर का एक और अहम पड़ाव है। उन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत की और वर्षों तक भाजपा तथा उससे जुड़े संगठनों में काम करते हुए आगे बढ़े।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े विराज बिस्वास ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और संगठन में लगातार जिम्मेदारियां संभालते हुए आगे बढ़े।

कानून की पढ़ाई कर चुके बिस्वास पहली बार सितंबर 2018 में इस्लामपुर के दारीभिट हाई स्कूल में दो छात्रों की कथित गोलीबारी और बमबाजी में मौत के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान चर्चा में आए थे। बाद में उन्होंने एबीवीपी के प्रदेश सचिव के रूप में काम किया। फिर संगठन के राष्ट्रीय सचिव भी बने। विराज बिस्वास उत्तर बंगाल में कई छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे। 

भाजपा नेताओं का कहना है कि क्षेत्र में पार्टी के विस्तार के दौरान उन्होंने छात्रों और युवाओं को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। वकालत शुरू करने के बाद भी उन्होंने उन लोगों के मामलों की पैरवी की, जो खुद को राजनीतिक प्रताड़ना का शिकार बताते थे।

हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने करनदीघी सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार गौतम पाल को करीब 20 हजार वोटों के अंतर से हराया था। गौतम पाल दोबारा चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे थे।

उत्तर बंगाल में भाजपा के मजबूत प्रदर्शन का असर नई मंत्रिपरिषद में भी दिखाई दिया है। इस क्षेत्र के कई विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। इनमें विराज बिस्वास सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, क्योंकि वह कम उम्र में तेजी से पार्टी के शीर्ष तक पहुंचे हैं।

भाजपा नेताओं का मानना है कि उनका मंत्रिमंडल में शामिल होना पार्टी की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें युवा नेतृत्व और प्रशासनिक अनुभव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।

विराज बिस्वास के शपथ लेने के बाद करनदीघी में जश्न का माहौल बन गया। वहीं, उनकी मां के लिए यह उपलब्धि बेहद भावनात्मक और व्यक्तिगत है। उन्होंने कहा, उसे हमेशा विश्वास था कि वह एक दिन इस मुकाम तक पहुंचेगा। आज उसका वह सपना सच हो गया है।

मंत्री न बनाए जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता: आरजी कर पीड़िता की मां
आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने सोमवार को कहा कि उन्हें मंत्री न बनाए जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे एक विधायक के रूप में पश्चिम बंगाल की जनता की सेवा जारी रखेंगी। अगस्त 2024 में उनकी बेटी के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के बाद वे न्याय की मांग को लेकर राजनीति में आई थीं।


देबनाथ ने कहा कि राजनीति में आना या सत्ता पाना उनकी प्राथमिकता कभी नहीं रही। वे केवल अपनी बेटी के लिए न्याय चाहती हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा कैबिनेट विस्तार के बाद उन्होंने यह प्रतिक्रिया दी। पानीहाटी से विधायक रत्ना देबनाथ और हिंगलगंज की विधायक रेखा पात्रा को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। भाजपा सूत्रों ने बताया कि इन दोनों के नामों पर कभी विचार नहीं किया गया था। सोमवार को स्वपन दासगुप्ता और तापस रॉय सहित 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। अब बंगाल मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 41 हो गई है। राज्यपाल आरएन रवि ने लोक भवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई।
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