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बच्चे के हित की बात हो तो कानून मानना जरूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट

Thu, 02 Jan 2020 04:31 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Thu, 02 Jan 2020 04:31 AM IST
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It is not necessary to follow the law if it is in the interest of the child says Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने एक अनूठा फैसला सुनाते हुए कहा कि बात यदि बच्चे की भलाई या उसके हित की हो तो किसी विधान, प्रक्रिया या मिसाल को मानना जरूरी नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि बच्चे का हित सर्वोपरि होता है। जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने पति-पत्नी के एक मामले में 12 वर्षीय बच्ची को पिता की कस्टडी में देने का आदेश दिया। पीठ ने बच्ची की मां के उस आरोप को खारिज कर दिया कि बच्ची का पिता उसके साथ छेड़छाड़ करता था। मां का कहना था कि बच्ची को पिता के साथ रहने देने की इजाजत देना खतरे से खाली नहीं है।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने बच्ची व उसके माता-पिता से बातचीत के बाद अपने फैसले में कहा, हमने व्यक्तिगत तौर पर बच्ची व उसके माता-पिता से बातचीत की। हमारा मानना है कि नाबालिग बच्ची इस बात से भलीभांति अवगत है और निश्चित रूप से वह अपना मत देने की स्थिति में है कि वह किसके साथ रहना चाहती है और कहां उसकी भलाई है। पीठ ने पाया कि बच्ची सातवीं कक्षा में पढ़ती है। उसने पिता से लगाव की बात कही और साफ तौर पर पिता के साथ रहने की इच्छा जताई। 
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पिता न केवल खानपान, शिक्षा आदि का ध्यान रखते थे, बल्कि उसके स्कूल के प्रोजेक्ट व गतिविधियों में सहयोग करते थे। पीठ ने इस मामले में 2008 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें बच्चे की सहूलियत, संतुष्टि, नैतिक व शारीरिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुकूल वातावरण को तवज्जो दी गई थी।
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निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की एक अदालत द्वारा बच्ची की कस्टडी पिता को देने और मां को बच्ची से मिलने की इजाजत देने के आदेश को सही ठहराया। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मां की याचिका को खारिज करते हुए तीन काउंसलर की रिपोर्ट पर भरोसा किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि बच्ची को पिता का साथ पसंद है। हाईकोर्ट ने मां द्वारा मुहैया कराई डीवीडी को देखने पर पाया कि वह पिता के बच्ची से छेड़छाड़ के दावे की तस्दीक नहीं करती।

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