{"_id":"5d4304c38ebc3e6ccb57e4eb","slug":"issue-of-wrong-hindi-translation-of-questions-in-upsc-exam-raised-in-rajya-sabha","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘स्टील प्लांट’ का हिंदी में अनुवाद ‘इस्पात का पौधा’, राज्यसभा में उठा गलत हिंदी अनुवाद का मुद्दा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
‘स्टील प्लांट’ का हिंदी में अनुवाद ‘इस्पात का पौधा’, राज्यसभा में उठा गलत हिंदी अनुवाद का मुद्दा
Thu, 01 Aug 2019 10:05 PM IST
Gaurav Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Thu, 01 Aug 2019 10:05 PM IST
विज्ञापन
भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में सवालों के हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में गलत अनुवाद की वजह से परीक्षार्थियों को होने वाली समस्या पर भाजपा के एक सदस्य ने चिंता जाहिर की। भाजपा के हरनाथ सिंह यादव आरोप लगाया कि गूगल से इस तरह का गलत अनुवाद किया जाता है।
विज्ञापन
भाजपा के हरनाथ सिंह यादव ने उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा ‘संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में सवालों का हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद इस तरह होता है कि मेधावी छात्र भी उसे समझ नहीं पाते। अंग्रेजी के प्रश्नपत्रों का अनुवाद गूगल से किया जाता है। सवाल ही गलत होगा तो उत्तर कैसे दिया जा सकेगा।’
विज्ञापन
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अंग्रेजी में लिखे शब्दों ‘स्टील प्लांट’ का हिंदी में अनुवाद ‘इस्पात का पौधा’ लिखा गया। इसे कौन समझ पाएगा। गलत अनुवाद की वजह से हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के परीक्षार्थियों की सफलता का प्रतिशत प्रभावित होता है।
विज्ञापन
यादव ने कहा ‘जब प्रधानमंत्री दूसरे देशों की यात्रा पर जाते हैं और वहां पर हिंदी में बोलते हैं या संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर हिंदी में भाषण देते हैं तो पूरा देश गौरवान्वित होता है। लेकिन हमारे ही देश में हिंदी किस कदर उपेक्षित है, उसका पता संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में सवालों के हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में गलत अनुवाद से चल जाता है।’
उन्होंने सरकार से सिविल सेवा सर्विसेज के एप्टीट्यूड टेस्ट को बंद करने तथा हिंदी की उपेक्षा खत्म करने की मांग की। विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।