{"_id":"58bb63a84f1c1b462f8315fb","slug":"issue-of-job-of-separatist-leader-syed-ali-shah-geelani-s-grandson-boils-hot","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सैयद अली शाह गिलानी के पोते को नौकरी मामले ने पकड़ा तूल","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सैयद अली शाह गिलानी के पोते को नौकरी मामले ने पकड़ा तूल
amarujala.com {Presented by: पवन नाहर}
Updated Sun, 05 Mar 2017 06:32 AM IST
विज्ञापन
सैयद असी शाह गिलानी
- फोटो : Daily Pakistan
कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के पोते अनीस उल इस्लाम को कश्मीर हिंसा के दौरान नियमों की अनदेखी कर नौकरी दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। विपक्षी नेकां और कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनीस की रिसर्च ऑफिसर पद पर नियुक्ति में पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है।
कश्मीर घाटी में स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) विवादों में आ चुका है। एसकेआईसीसी प्रबंधन पर आरोप है कि इनके द्वारा गिलानी के पोते अनीस-उल-इस्लाम को नौकरी प्रदान करने के लिए न सिर्फ रिसर्च ऑफिसर का पद बनाया गया बल्कि उसे नौकरी पर रखने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। आरोप यह भी है कि अनीस के लिए इस नौकरी का इंतजाम खुद मुख्यमंत्री कार्यालय ने कराया।
इसके लिए पर्यटन विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी ने यह पद बनाया और अनीस की नियुक्ति करवाई। एसकेआईसीसी प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से नकारा है। एसकेआईसीसी के प्रवक्ता शाहनवाज अहमद के अनुसार इस नौकरी के लिए सभी जरूरी नियमों का पालन हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कश्मीर घाटी में स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) विवादों में आ चुका है। एसकेआईसीसी प्रबंधन पर आरोप है कि इनके द्वारा गिलानी के पोते अनीस-उल-इस्लाम को नौकरी प्रदान करने के लिए न सिर्फ रिसर्च ऑफिसर का पद बनाया गया बल्कि उसे नौकरी पर रखने के लिए नियमों की अनदेखी की गई। आरोप यह भी है कि अनीस के लिए इस नौकरी का इंतजाम खुद मुख्यमंत्री कार्यालय ने कराया।
विज्ञापन
इसके लिए पर्यटन विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी ने यह पद बनाया और अनीस की नियुक्ति करवाई। एसकेआईसीसी प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से नकारा है। एसकेआईसीसी के प्रवक्ता शाहनवाज अहमद के अनुसार इस नौकरी के लिए सभी जरूरी नियमों का पालन हुआ है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री पर लग रहा है 'बैक डोर' एंट्री का आरोप
महबूबा मुफ्ती सईद
- फोटो : PTI
उनके अनुसार अक्टूबर में नौकरी का विज्ञापन चार अखबारों में दिया गया था। इसके बाद 196 उम्मीदवारों के आवेदन मिले थे, जिनमें से 35 को इंटरव्यू के लिए शॉर्ट लिस्ट किया गया। 32 उम्मीदवारों ने नवंबर में इंटरव्यू दिया। शाहनवाज ने बताया इनमें से अनीस पहले नंबर पर आया और उसे नौकरी पर रखा गया। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही अनीस को जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से भी क्लीनचिट मिल गई है।
जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी के लिए सीआईडी की क्लियरेंस सर्टिफिकेट मिलना जरूरी है जिस का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उम्मीदवार आतंकी, अलगाववादी या उनका समर्थक तो नहीं। पुलिस की तरफ से भी क्लियरेंस मिलने के बाद अब उसे वेतन भी मिलना शुरू हो जाएगा जो क्लियरेंस न मिलने के चलते बंद था।
इस मामले के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता जूनाइड मट्टू ने बताया कि मौजूदा सरकार में यह बात सामने आ रही है कि मुख्यमंत्री महबूबा के इशारों पर उनके अधिकारी हाई प्रोफाइल पोस्टों को भरने के लिए बैक डोर भर्तियां करवा रहे हैं। इस मामले की जांच होनी चाहिए, चाहे इसके लिए कोर्ट में भी जाना पड़े।
जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी के लिए सीआईडी की क्लियरेंस सर्टिफिकेट मिलना जरूरी है जिस का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उम्मीदवार आतंकी, अलगाववादी या उनका समर्थक तो नहीं। पुलिस की तरफ से भी क्लियरेंस मिलने के बाद अब उसे वेतन भी मिलना शुरू हो जाएगा जो क्लियरेंस न मिलने के चलते बंद था।
इस मामले के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता जूनाइड मट्टू ने बताया कि मौजूदा सरकार में यह बात सामने आ रही है कि मुख्यमंत्री महबूबा के इशारों पर उनके अधिकारी हाई प्रोफाइल पोस्टों को भरने के लिए बैक डोर भर्तियां करवा रहे हैं। इस मामले की जांच होनी चाहिए, चाहे इसके लिए कोर्ट में भी जाना पड़े।