चंद्रयान-3: इसरो ने कहा- लैंडिंग के लिए विक्रम ने समतल क्षेत्र का किया चयन, फोटो में सतह पर दिख रही परछाई
इसरो ने बताया कि सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए लैंडर में कई सेंसर लगाए गए थे। इसके अलावा लैंडर में एक्सेलेरोमीटर, अल्टीमीटर, डॉपलर वेलोमीटर, इनक्लिनोमीटर, टचडाउन सेंसर भी लगाए गए हैं।
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विस्तार
चांद की सतह पर पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग कर भारत ने इतिहास रच दिया है। कैमरों द्वारा ली गई तस्वीरों से पता चला कि चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर ने लैंडिंग के लिए समतल क्षेत्र चुना है। इसरो ने बताया कि लैंडिंग के तुरंत बाद ली गई तस्वीरों में विक्रम का एक पैर और विक्रम की परछाई भी दिखाई दे रही है।
एक चंद्र दिन तक संचालित करने के लिए किया डिजाइन
इसरो ने बताया कि लैंडिंग के बाद लैंडर और ऑपरेशंस कॉम्पलेक्स के बीच संचार स्थापित किया गया था। बता दें, एमओएक्स इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क पर स्थित है। इसरो का कहना है कि लैंडर और रोवर को एक चंद्र दिन (धरती के लगभग 14 दिन) तक संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है। सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए लैंडर में कई सेंसर लगाए गए थे। इसके अलावा लैंडर में एक्सेलेरोमीटर, अल्टीमीटर, डॉपलर वेलोमीटर, इनक्लिनोमीटर, टचडाउन सेंसर भी लगाए गए हैं। वहीं, स्थिति और खतरे की जानकारी एकत्रित करने के लिए कैमरों का एक सूट भी शामिल है।
इन नायकों की बदौलत रचा गया इतिहास
चंद्रयान-3 मिशन पर एक हजार से ज्यादा वैज्ञानिक और इंजीनियर दिनरात जुटे थे। जानिये सात वैज्ञानिकों की कहानी, जिन पर मिशन की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी थी।
एस सोमनाथ, अध्यक्ष, इसरो
एस सोमनाथ एयरोस्पेस इंजीनियर हैं। सोमनाथ ने लॉन्च व्हीकल मार्क-3 खुद डिजाइन किया है, जिसे बाहुबली रॉकेट भी कहा जाता है। इसने चंद्रयान-3 को कक्षा में पहुंचाया। सोमनाथ ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बंगलूरू से पढ़ाई की है। संस्कृत बोल सकते हैं और उन्होंने 'यानम' नामक संस्कृत फिल्म में अभिनय भी किया है। सोमनाथ के पास ही आदित्य एल-1 और गगनयान मिशन की जिम्मेदारी भी है।
एस उन्नीकृष्णन नायर, निदेशक, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
एयरोस्पेस इंजीनियर नायर अंतरिक्ष में भारत के मानव मिशन की अगुआई कर रहे हैं। वे रॉकेट के विकास व निर्माण से जुड़े विक्रम साराभाई स्पेस केंद्र के निदेशक भी हैं। उन्होंने बंगलूरू में आईआईएससी से पढ़ाई की है।
वीरमुथुवेल पी, परियोजना निदेशक, चंद्रयान-3 मिशन
चंद्रयान-3 मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वीरमुथुवेल ही हैं। चंद्रयान-2 व मंगलयान में भी अहम भूमिका निभाई। तमिलनाडु निवासी वीरमुथुवेल ने आईआईटी मद्रास से पढ़ाई की है।
एम शंकरन, निदेशक, यू आर राव सैटेलाइट सेंटर
2021 में शंकरन ने यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के निदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसी सेंटर के पास इसरो के सभी उपग्रहों को डिजाइन व निर्माण की जिम्मेदारी है। शंकरन की टीम कम्युनिकेशन, नेविगेशन, रिमोट सेंसिंग, मौसम पूर्वानुमान और ग्रहों की खोज करने वाले उपग्रहों को तैयार कर रही है। शंकरन ने चंद्रयान-1, मंगलयान और चंद्रयान-2 के लिए भी काम किया है।
मोहना कुमार, मिशन निदेशक
चंद्रयान-3 के मिशन निदेशक। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के वैज्ञानिक। एलवीएम-3 एम-3 मिशन में भी अहम जिम्मेदारी।
ए राजराजन, प्रमुख, लॉन्च ऑथराइजेशन बोर्ड
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक। चंद्रयान को चांद की कक्षा में स्थापित करने का दायित्व।
कल्पना के, डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर
मिशन की डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर। चंद्रयान-2 और मंगलयान मिशन में भी अहम भूमिका।