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एक साथ 83 उपग्रह भेजकर विश्व रिकॉर्ड बनाएगा इसरो
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 29 Oct 2016 09:17 AM IST
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इसरो
- फोटो : isro.gov.in
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो का इरादा नए साल की शुरुआत में एक रॉकेट से 83 उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का है। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि कंपनी का ऑर्डर बुक 500 करोड़ रुपये का है, जबकि और 500 करोड़ रुपये के लॉन्च ऑर्डर के लिए सौदेबाजी जारी है।
एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक राकेश शशिभूषण ने कहा कि हमारी योजना साल 2017 की पहली तिमाही में एक रॉकेट से 83 उपग्रहों को लॉन्च करने की है। भेजे जाने वाले अधिकांश उपग्रह नैनो उपग्रह हैं। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा है। उन्होंने कहा कि सभी 83 उपग्रहों को एक ही कक्षा में स्थापित करना है और इसलिए रॉकेट को स्विच ऑफ और स्विच ऑन करने की जरूरत नहीं होगी।
प्रस्तावित मिशन की सबसे बड़ी चिंता सभी उपग्रहों को एक ही कक्षा में छोड़ने तक रॉकेट को एक ही जगह पर टिकाए रखने की होगी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड 83 उपग्रहों की लॉन्चिंग के लिए इसरो ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान एक्सएल (पीएसएलवी-एक्सएल) रॉकेट का इस्तेमाल करेगा। इसरो के लिए एक बार में कई उपग्रहों का प्रक्षेपण कोई नई बात नहीं है, क्योंकि यह अतीत में ऐसा कई बार कर चुका है।
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शशिभूषण के मुताबिक, पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट का टोटल पे लोड लगभग 1,600 किलोग्राम होगा। अनुबंधों की शर्तों का हवाला देते हुए उन्होंने उन ग्राहकों का नाम बताने से इंकार कर दिया, जिनके रॉकेट कक्षा में छोड़े जाने हैं। उन्होंने कहा कि कुछ उपग्रह उनके हैं, जिनके उपग्रहों को पहले भी इसरो कक्षा में भेज चुका है।
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एंट्रिक्स कॉरपोरेशन के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक राकेश शशिभूषण ने कहा कि हमारी योजना साल 2017 की पहली तिमाही में एक रॉकेट से 83 उपग्रहों को लॉन्च करने की है। भेजे जाने वाले अधिकांश उपग्रह नैनो उपग्रह हैं। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा है। उन्होंने कहा कि सभी 83 उपग्रहों को एक ही कक्षा में स्थापित करना है और इसलिए रॉकेट को स्विच ऑफ और स्विच ऑन करने की जरूरत नहीं होगी।
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प्रस्तावित मिशन की सबसे बड़ी चिंता सभी उपग्रहों को एक ही कक्षा में छोड़ने तक रॉकेट को एक ही जगह पर टिकाए रखने की होगी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड 83 उपग्रहों की लॉन्चिंग के लिए इसरो ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान एक्सएल (पीएसएलवी-एक्सएल) रॉकेट का इस्तेमाल करेगा। इसरो के लिए एक बार में कई उपग्रहों का प्रक्षेपण कोई नई बात नहीं है, क्योंकि यह अतीत में ऐसा कई बार कर चुका है।
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शशिभूषण के मुताबिक, पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट का टोटल पे लोड लगभग 1,600 किलोग्राम होगा। अनुबंधों की शर्तों का हवाला देते हुए उन्होंने उन ग्राहकों का नाम बताने से इंकार कर दिया, जिनके रॉकेट कक्षा में छोड़े जाने हैं। उन्होंने कहा कि कुछ उपग्रह उनके हैं, जिनके उपग्रहों को पहले भी इसरो कक्षा में भेज चुका है।
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जीएसएलवी एमके3 में लगभग चार टन वजन ले जाने की क्षमता
इसरो
इस बीच, इसरो अपने क्रायोजेनिक इंजन के साथ हाई-अल्टीट्यूट टेस्ट कर रहा है, जो भारी रॉकेट भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान-एमके3 (जीएसएलवी एमके3) को और ताकतवर बना सकता है। जीएसएलवी एमके3 में लगभग चार टन वजन ले जाने की क्षमता है।
रॉकेट जनवरी, 2017 में उड़ान भरेगा। भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए भारत विदेशों पर निर्भर है। अगर यह परीक्षण सफल होता है, तो जीएसएलवी एमके3 भारत के लिए वरदान साबित होगा। इसरो के अध्यक्ष किरण कुमार ने कहा कि एजेंसी चार टन के कम्युनिकेशन उपग्रह के विकास की योजना बना रहा है, जो छह टन के कम्युनिकेशन उपग्रह के जैसा परिणाम देगा।
रॉकेट जनवरी, 2017 में उड़ान भरेगा। भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए भारत विदेशों पर निर्भर है। अगर यह परीक्षण सफल होता है, तो जीएसएलवी एमके3 भारत के लिए वरदान साबित होगा। इसरो के अध्यक्ष किरण कुमार ने कहा कि एजेंसी चार टन के कम्युनिकेशन उपग्रह के विकास की योजना बना रहा है, जो छह टन के कम्युनिकेशन उपग्रह के जैसा परिणाम देगा।