फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ISRO chief K Sivan said spent my childhood without shoe or sandal, wore pants for first time in MIT

बिना चप्पलों के गुजरा बचपन, पढ़ाई के दम पर पाया मुकाम और बन गए इसरो अध्यक्ष

Tue, 30 Jul 2019 09:08 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 30 Jul 2019 09:08 AM IST
विज्ञापन
ISRO chief K Sivan said spent my childhood without shoe or sandal, wore pants for first time in MIT
इसरो प्रमुख के सिवन (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के सराक्कलविलाई गांव के एक किसान के बेटे कैलाशवडीवू सिवन (के सिवन) आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं। इसके अलावा वह चंद्रयान-2 मिशन का नेतृत्व भी कर रहे हैं। सिवन ने एक सरकारी स्कूल में तमिल माध्यम से पढ़ाई की है। नागेरकोयल के एसटी हिंदू कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया। सिवन ने 1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

विज्ञापन


इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसिज (आईआईएससी) से इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। 2006 में उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। सिवन स्नातक करने वाले अपने परिवार के पहले सदस्य हैं। उनके भाई और बहन गरीबी के कारण अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर पाए। 
विज्ञापन


उन्होंने कहा, 'जब मैं कॉलेज में था तो मैं खेतों में अपने पिता की मदद किया करता था। यही कारण था कि पिता ने मेरा दाखिला घर के पास वाले कॉलेज में कराया था। जब मैंने 100 प्रतिशत अंकों के साथ बीएससी (गणित) पूरी कर ली तो उन्होंने अपना मन बदल लिया। मेरा बचपन बिना जूतों और सैंडल के गुजरा है। मैं कॉलेज तक धोती पहना करता था। जब मैं एमआईटी में गया तब पहली बार मैंने पैंट पहनी थी।' 
विज्ञापन
विज्ञापन


सिवन 1982 में इसरो में शामिल हुए थे। यहां उन्होंने लगभग हर रॉकेट कार्यक्रम में काम किया है। जनवरी 2018 में इसरो अध्यक्ष का पदभार संभालने से पहले वह विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) के निदेशक थे। यह सेंटर रॉकेट बनाता है। उन्हें साइक्रोजेनिक इंजन, पीएसएलवी, जीएसएलवी और रियूसेबल लॉन्च व्हीकल  कार्यक्रमों में योगदान देने के कारण इसरो का रॉकेट मैन कहा जाता है। 

उन्होंने 15 फरवरी 2017 को भारत द्वारा एकसाथ 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में अहम भूमिका निभाई थी। यह इसरो का विश्व रिकॉर्ड भी है। रॉकेट विशेषज्ञ सिवन को खाली समय में तमिल क्लासिकल गाने सुनना और गार्डनिंग करना पसंद है। उनकी पसंदीदा फिल्म राजेश-खन्ना की 1969 में आई आराधना है। उन्होंने कहा, 'जब मैं वीएसएससी का निदेशक था तब मैंने तिरुवनंतपुरम स्थित अपने घर के बगीचे में कई तरह के गुलाब उगाए थे। अब बंगलूरू में मुझे समय नहीं मिल पाता है।' 


15 जुलाई को जब चंद्रयान-2 अपने मिशन के लिए उड़ान भरने ही वाला था कि कुछ घंटों पहले तकनीकी कारणों से इसे रोकना पड़ा। इसके बाद सिवन ने एक उच्च स्तरीय टीम बनाई ताकि दिक्कत का पता लगाया जा सके और इसे 24 घंटे के अंदर ठीक कर दिया और सात दिनों बाद चंद्रयान-2 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में तकनीकी खामी को दूर करने के लिए इसरो के वैज्ञानिकों की प्रशंसा की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed