ISRO: श्रीहरिकोटा में तीसरा लॉन्च पैड विकसित करेगा इसरो, प्रक्षेपण अभियानों में आएगी तेजी
वैज्ञानिक पद्मकुमार ईएस ने कहा कि अंतरिक्ष में विभिन्न कक्षाओं में 14 हजार किलो से अधिक वजनी उपग्रहों को स्थापित करने के लिए इसरो को बड़े प्रक्षेपण यानों की आवश्यकता है। इसके लिए तीसरे लॉन्च पैड की जरूरत है।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र पर तीसरा प्रक्षेपण पैड विकसित करने की प्रक्रिया में है और वर्तमान में इसके लिए उपयुक्त कंपनियों की तलाश की जा रही है। यह जानकारी सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक पद्मकुमार ईएस ने रविवार को दी। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर पूर्व में स्थित श्रीहरिकोटा परिसर 175 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह बंगलूरू स्थित अंतरिक्ष एजेंसी को विभिन्न प्रक्षेपण यानों के जरिये उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाने की सेवा मुहैया कराता रहा है।
इसरो तीसरे प्रक्षेपण पैड की योजना बना रहा- पद्मकुमार ईएस
पद्मकुमार ईएस ने कहा कि अंतरिक्ष में विभिन्न कक्षाओं में 12,000-14,000 किलोग्राम से अधिक वजन वाले बड़े उपग्रहों को स्थापित करने की योजना पर आगे बढ़ने के लिए इसरो को बड़े प्रक्षेपण यानों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए इसरो तीसरे प्रक्षेपण पैड की योजना बना रहा है। हमारी योजना चार साल में तीसरा ‘लॉन्च पैड’ स्थापित कर संचालित करने की है। इसके लिए प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने कहा, हम खरीद प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं और इस विशाल परियोजना के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए उपयुक्त कंपनियों की पहचान कर रहे हैं। पद्मकुमार ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि एक बार तीसरा प्रक्षेपण पैड चालू हो जाने के बाद, इसका उपयोग 14,000 किलोग्राम से अधिक वजन के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए किया जाएगा, जिन्हें अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों (एनजीएलवी) द्वारा कक्षा में ले जाया जाएगा।
तूतीकोरिन में निर्माणाधीन इसरो प्रक्षेपण परिसर के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस सुविधा का उपयोग लघु उपग्रह प्रक्षेपण यानों (एसएसएलवी) को प्रक्षेपण करने के लिए किया जाएगा, जो उपग्रहों को पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थापित कर सकते हैं। इन उपग्रहों का वजन लगभग 500 किलोग्राम हो सकता है और इन्हें निम्न-स्तरीय विद्युत क्षेत्र (एलईओ) में स्थापित किया जा सकता है। ऐसे मिशनों के लिए, हम उस (कुलसेकरपट्टिनम) सुविधा का उपयोग करेंगे।
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भारत ने हाल में रचा था कीर्तिमान
इसरो ने 24 दिसंबर को लगभग 6,000 किलोग्राम वजनी अमेरिकी उपग्रह ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 को एलवीएम3-एम6 रॉकेट के जरिये पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थापित किया था। इसके साथ ही अंतरिक्ष एजेंसी ने पहली बार भारतीय धरती से इतने अधिक वजन का उपग्रह कक्षा में भेजा था।