Anti‑Terror Conference: आतंक के खिलाफ सरकार का बड़ी तैयारी, सभी राज्यों में होगा एक जैसा आतंकवाद-विरोधी दस्ता
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का पांचवां आतंकवाद विरोधी सम्मेलन, शनिवार को नई दिल्ली में संपन्न हुआ है। सम्मेलन में आतंकवाद विरोधी सम्मेलन के नवगठित ट्रैक 2 में डिजिटल उपकरणों के डेटा, बिग डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल गुमनामी को उजागर करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के आतंकवाद विरोधी सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता' नीति को दोहराया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों को एक समान आतंकवाद विरोधी ढांचा शीघ्रता से लागू करने का निर्देश दिया। आतंकवाद विरोधी सम्मेलन के नवगठित ट्रैक 2 में डिजिटल उपकरणों के डेटा, बिग डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल गुमनामी को उजागर करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में जांच के दौरान सीखे गए सबक, आतंकी मॉड्यूल को पहले से ही निष्क्रिय करने के उपाय, उग्रवादी उग्रवाद, पूर्वोत्तर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सीखे गए सबक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विभिन्न हाइब्रिड खतरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का पांचवां आतंकवाद विरोधी सम्मेलन, शनिवार को नई दिल्ली में संपन्न हुआ है। आतंकवाद-विरोधी क्षमता को बढ़ाने के मकसद से एक आदर्श एटीएस संरचना तैयार करने पर जोर दिया गया है। केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के बीच समन्वय और निर्बाध वास्तविक समय सूचना आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इस सम्मेलन में केंद्र सरकार ने आतंकवाद के किसी भी रूप के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की अपनी नीति को दोहराया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने देश के आतंकवाद-विरोधी तंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
गृह मंत्री ने राज्यों को भारत की आतंकवाद-विरोधी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एकसमान आतंकवाद-विरोधी दस्ते (एटीएस) संरचना को शीघ्रता से लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि पूरे देश में एक मजबूत, एकसमान और सुसंगत परिचालन क्षमता के बिना हम खुफिया जानकारी का उचित उपयोग और प्रभावी समन्वित जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं कर सकते।
'हमने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकी कृत्य की योजना बनाने वालों को सजा दी'
गृह मंत्री ने पहलगाम और दिल्ली के लाल किले पर हुए दो आतंकी हमलों में विभिन्न एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों की सफल कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहलगाम लक्षित हमले के मामले में इन एजेंसियों की गहन कार्रवाई ने देश को गौरवान्वित किया है। इस जघन्य हमले में शामिल तीनों आतंकवादियों को सफलतापूर्वक ट्रैक करके मार गिराने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, यह पहली आतंकी घटना है जिसमें हमने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकी कृत्य की योजना बनाने वालों को सजा दी है। ऑपरेशन महादेव के जरिए हमले को में शामिल आतंकवादियों को खत्म किया गया है।
लगातार बदलती प्रौद्योगिकी और आतंकी परिदृश्य की ओर इशारा करते हुए गृह मंत्री ने इसकी निरंतर जांच और पुनर्मूल्यांकन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने केंद्र और राज्यों की सभी एजेंसियों से साइबर युद्ध, हाइब्रिड युद्ध के प्रति सतर्कता, बहु-सुरक्षा स्तर और खुफिया जानकारी के निर्बाध प्रवाह जैसे अंतरराष्ट्रीय आयामों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। अपनी जांच और अभियोजन क्षमताओं को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित करते हुए शाह ने राज्यों से अपने सुरक्षा और पुलिस कर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण आयोजित करने का आग्रह किया।
शनिवार शाम को समापन भाषण में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने आतंकवाद के किसी भी रूप के प्रति भारत की शून्य सहिष्णुता की नीति को रेखांकित करने का एक साधन बताया है। चाहे वह सीमा पार आतंकवाद हो, मादक पदार्थों से संबंधित आतंकवाद हो या साइबर आतंकवाद। उन्होंने देश के सामने मौजूद विभिन्न खतरों, विशेष रूप से कट्टरता, भर्ती और कमजोर युवाओं के शोषण से उत्पन्न होने वाले खतरों के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
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गृह सचिव ने कहा कि आतंकवाद विरोधी सम्मेलन के नवगठित ट्रैक 2 में डिजिटल डिवाइस डेटा और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिजिटल गुमनामी को उजागर करना। उन्होंने एनआईए द्वारा हासिल की गई 90% से अधिक की उच्च दोषसिद्धि दर की सराहना की। केंद्र का लक्ष्य देश के सभी पुलिस बलों में दोषसिद्धि दर को इसी स्तर तक बढ़ाना है। सम्मेलन में जांच के दौरान सीखे गए सबक, आतंकी मॉड्यूल को पहले से ही निष्क्रिय करने के उपाय, वामपंथी उग्रवाद, पूर्वोत्तर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सीखे गए सबक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विभिन्न हाइब्रिड खतरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
डीपफेक और हाइब्रिड युद्ध जैसे नए सुरक्षा खतरों का पता लगाने और उनका मूल्यांकन करने के लिए एक मंच तैयार करने पर जोर दिया गया। आतंकवाद विरोधी जांच में डिजिटल फोरेंसिक और डेटा विश्लेषण की आवश्यकता पर फोकस किया गया। अन्य महत्वपूर्ण चर्चाओं में आतंकवाद के वित्तपोषण, समुद्री आतंकवाद और अवैध तस्करी का मुकाबला करने और आतंकवाद विरोधी न्यायशास्त्र को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।