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ISRO: अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए उपलब्धियों भरा रहा 2022, नए साल में देश को गगनयान समेत कई मिशनों से उम्मीदें

Sat, 31 Dec 2022 08:56 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 31 Dec 2022 08:56 PM IST
सार

स्काईरूट एयरोस्पेस 2023 में एक ग्रह के लिए उपग्रह कक्षा में भेजने की योजना पर काम कर रही है। वहीं आईआईटी मद्रास कैंपस में शुरू हुआ स्टार्ट-अप अग्निकुल कॉसमॉस भी अपने अग्निबाण रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए तैयार है। 

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ISRO 2022 was full of achievements new year the country hopes from many missions including Gaganyaan
Gaganyan mission

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) साल 2023 में आदित्य और चंद्रयान-3 मिशनों पर काम करेगा। दूसरी ओर, स्टार्ट अप सेक्टर अंतरिक्षा क्षेत्र से जुड़े अपने अनुप्रयोगों के मामले में ऊंची उड़ान भरने के लिए तैयार है। इस साल भारत पहली मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान परियोजना 'गगनयान' से जुड़े प्रयोगों की एक श्रृंखला का भी गवाह बनेगा। 

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केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसी महीने संसद को बताया था कि इसरो अगले साल की शुरुआत में कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एयरोनॉटिकल परीक्षण स्थल से वाहन का पहला रनवे लैंडिंग प्रयोग (आरएलवी-एलईएक्स) करने की योजना बना रहा है। 
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देश का स्टार्ट अप भी अंतरिक्ष के क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। श्रीहरिकोटा से स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-एस रॉकेट का हाल ही में प्रक्षेपण किया गया था। यह किसी निजी कंपनी द्वारा किया गया पहला रॉकेट परीक्षण था। वहीं, दूसरी ओर पिक्सल नामक कंपनी ने अप्रैल में स्पेसएक्स कंपनी के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए अपने हाइपरस्पेक्ट्रल उपग्रह शकुंतला का प्रक्षेपण किया। नवंबर में पिक्सल ने इसरो के पीएसएलवी के जिरए आनंद नामक हाइपरस्पेक्ट्रल उपग्रह प्रक्षेपित किया। 
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स्काईरूट एयरोस्पेस 2023 में एक ग्राह के लिए उपग्रह कक्षा में भेजने की योजना पर काम कर रही है। वहीं आईआईटी मद्रास कैंपस में शुरू हुआ स्टार्ट-अप अग्निकुल कॉसमॉस भी अपने अग्निबाण रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए तैयार है। 

पिक्सल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवैस अहमद ने कहा, हम छह कॉमर्शियल हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजरी सैटेलाइट विकसित कर रहे हैं, जो अगले साल प्रक्षेपण के लिए तैयार होंगे। उन्होंने कहा, दुनिया भर में कई और रॉकेट कंपनियां प्रक्षेप करेंगी, जिससे रॉकेट प्रक्षेपण की दौड़ को बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने की दौड़ में कुछ ही कंपनियां शामिल हैं। 


ये कंपनियां विशाल अंतरिक्ष अनुप्रयोग बाजार पर नजर गड़ाए हुए हैं, जिस पर अब तक इसरो का ही दबदबा है। ये कंपनियां पृथ्वी अनुसंधान क्षेत्र, छोटे उपग्रहों के प्रक्षेप के लिए रॉकेट विकसित करने, उपग्रहों के लिए सस्ता ईधन उपलब्ध कराने और पर्यटकों को अंतरिक्ष यात्रा पर ले जाने तक की योजना पर काम कर रही हैं। 


 
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