Israel Hamas War: गाजा में है 1300 सुरंगों से बना एक भूमिगत शहर, 500 किमी के क्षेत्रफल में फैली हैं ये सुरंगें
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विस्तार
बीते 13 दिनों से चल रही इस्राइल और हमास के आतंकियों की जंग अभी भी जारी है। इस जंग में हमास के आतंकियों पर लगातार इस्राइल की ओर से हमला किया जा रहा है। लेकिन हमास के आतंकी इस हमले में न सिर्फ बच जाते हैं, बल्कि इस्राइल पर भी हमला करने के लिए अपनी पूरी तैयारी के साथ फिर से अटैक करना शुरू कर देते हैं। दरअसल इस हमले में आतंकियों के बचने की सबसे बड़ी वजह गाजा पट्टी के अंदर हमास के आतंकियों की ओर से बनाई गई वह सुरंगें हैं, जिसमें एक तरह से आतंक की पूरी दुनिया बसाई जा चुकी है। जानकारी के मुताबिक पूरी गाजा पट्टी में 1300 टनल के माध्यम से 500 किलोमीटर के क्षेत्रफल से ज्यादा इलाके में यह सुरंगें हमास के आतंकियों की ओर से बनाई गई हैं। इसमें युद्ध में इस्तेमाल किए जाने वाले सभी हथियारों समेत महीनों तक रहने का पूरा बंदोबस्त भी है। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यही वजह है कि लगातार इस्राइल की ओर से हमला किए जाने के बाद भी हमास के आतंकी इन सुरंगों के माध्यम से बचते जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस पूरी टनल पर हमास ने तकरीबन डेढ़ बिलियन डॉलर खर्च किए हैं।
जानकारी के मुताबिक बीते कई सालों से हमास लगातार गाजा पट्टी के अलग-अलग इलाकों में कई किलोमीटर की सुरंग बनाता आया है। इन सुरंगों को बाकायदा स्थानीय स्तर के मिस्त्री और दिहाड़ीदार, जो कि हमास के आतंकी समूह में शामिल हैं, उनके माध्यम से मैनुअली तैयार किया गया है। गाजा पट्टी की भौगोलिक परिस्थितियों और वहां के आतंकियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखने वाली खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हमास के आतंकियों ने बीते कई सालों के भीतर समूचे गाजा पट्टी में तकरीबन 500 किलोमीटर से ज्यादा का अपना टनल नेटवर्क तैयार कर लिया है। सूत्रों का कहना है कि इनमें सबसे ज्यादा टनल गाजा शहर की जमीन के भीतर बनी हुई हैं। इनमें से बहुत सी सुरंगें तो एक दूसरे से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक यह वे टनल हैं जिनमें रहकर हमास के आतंकी न सिर्फ इस्राइल पर आतंकी हमले कर रहे हैं, बल्कि बीते कई सालों से इन टनल के माध्यम से लगातार युद्ध भी कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक जो टनल गाजा पट्टी के अलग-अलग इलाकों से लेकर गाजा शहर की जमीन के अंदर बनाई गई हैं, उनमें बाकायदा बिजली का भी पूरा बंदोबस्त किया गया है। इसके अलावा इन सुरंगों के भीतर हमास के आतंकियों के रहने खाने-पीने का पूरा साजो सामान भी तैयार रहता है। जानकारी के मुताबिक तकरीबन 500 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैली इन टनल के भीतर न सिर्फ रॉकेट बल्कि अन्य युद्ध में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों को भी तैयार किया जाता है। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि गाजा की इन सुरंगों के भीतर एक तरह का पूरा 'अंडरग्राउंड टनल टाउन' बसाया गया है। जिसमें रहने खाने पीने से लेकर महीनों तक बसने का पूरा बंदोबस्त भी है। इन्हीं टनल में रॉकेट रखने के लिए दीवारों के भीतर किलोमीटरों का पूरा स्पेस दिया गया है। यहां पर न सिर्फ रॉकेट रखे जाते हैं बल्कि रॉकेट से लेकर अन्य गोला बारूद के निर्माण का भी काम इन्हीं टनल के भीतर ही किया जाता है।
जानकारी के मुताबिक गाजा पट्टी के अलग-अलग इलाकों में 1300 से ज्यादा टनल हमास के आतंकियों ने बीते कई सालों में बनाई हैं। इन टनल को बनाने में हमास ने तकरीबन डेढ़ मिलियन डॉलर का खर्चा भी किया है। रक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ये टनल पूरी तरह से कंक्रीट से तैयार की गई हैं। गाजा के 41X10 किलोमीटर के इलाके में 1300 टनल बनाई गई हैं। इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद समेत दुनिया की अलग-अलग एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक इन सुरंगों की गहराई तकरीबन 18 से 20 मीटर की होती है। जबकि एक टनल की लंबाई तकरीबन डेढ़ से 2 किलोमीटर की होती है। जानकारों का कहना है कि गाजा पट्टी के अलग-अलग इलाकों में तैयार की गई इन टनल का रास्ता इतना चौड़ा होता है कि आतंकियों और उनके समर्थकों के आने-जाने में कोई दिक्कत ना हो।
रक्षा मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट कर्नल बीके मिश्रा कहते हैं कि आतंकियों के लिए सुरंग हमेशा से सबसे ज्यादा सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर मानी जाती रही हैं। वह कहते हैं कि अफगानिस्तान में तालिबानियों ने भी सबसे ज्यादा टनल बनाकर खुद को सुरक्षित रखने की बड़ी कोशिशें की थीं। अफगानिस्तान के पूरे युद्ध के दौरान तालिबानी लगातार टनल से निकलकर के ही हमले करते थे। इसी तरह वियतनाम के युद्ध में भी बड़ी-बड़ी सुरंगें बनाई गईं थीं। लेफ्टिनेंट कर्नल मिश्रा कहते हैं कि हमास ने जिन सुरंग को 500 किलोमीटर से ज्यादा के क्षेत्रफल में गाजा पट्टी में तैयार किया है, दरअसल वह बीते कई सालों से इसका निर्माण करते आए हैं। उनका कहना है कि ऐसा नहीं है कि इस्राइल को इन सुरंगों के बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन हवाई हमले में इन सुरंगों को उतना नुकसान नहीं हो पा रहा है जितना कि वहां पर खड़ी इमारत को हो रहा है। वह कहते हैं कि इन सुरंगों को नुकसान करने के लिए जब तक जमीनी स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी या सेना इन सुरंगों तक नहीं पहुंचेगी तब तक इनका सीधे तौर पर नुकसान नहीं किया जा सकता।