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IS: इस्लामिक स्टेट का खतरनाक प्लान, विदेशी मॉडयूल के जरिये भारत में कराना चाहता है श्रीलंका जैसे हमले
Mon, 11 May 2026 02:54 PM IST
निर्मल कांत
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 11 May 2026 02:54 PM IST
सार
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने आगाह किया है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट भारत में हमलों के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत वह पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका में मौजूद अपने विदेशी मॉड्यूल का इस्तेमाल कर भारत में चरमपंथ और आतंकी गतिविधियां फैलाने की कोशिश कर सकता है। पढ़िए रिपोर्ट-
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आतंकियों की पहचान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एडॉब स्टॉक
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विस्तार
आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने भारत के खिलाफ एक नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत वह भारत के पड़ोसी देशों में मौजूद अपने चरमपंथी तत्वों का इस्तेमाल करेगा और दुष्प्रचार और आतंकी हमले के लिए करेगा।
साल 2013 के अंत में जब आईएस ने वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी, तब भारत से भी कई लोग इस संगठन में शामिल होने के लिए देश छोड़कर चले गए थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एजेंसियों ने कई लोगों को सीरिया, इराक और अफगानिस्तान जाकर संगठन में शामिल होने से रोकने में सफलता हासिल की है।
साथ ही, सफल कट्टरपंथ मुक्त अभियानों के जरिये उन लोगों को भी मुख्यधारा में वापस लाया गया, जो संगठन में शामिल होने की योजना बना रहे थे।
खुफिया ब्यूरो के एक कर्मी के अनुसार, भारत में यह समस्या काफी हद तक नियंत्रण में है। लेकिन अब संगठन अन्य देशों से कट्टरपंथी तत्वों को भारत में भेजने की कोशिश कर रहा है। इस्लामिक स्टेट ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका में अपने अलग-अलग मॉड्यूल स्थापित किए हुए हैं।
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तमिलनाडु और मंगलुरु में दिखा श्रीलंका मॉड्यूल का असर
श्रीलंका मॉड्यूल का असर तमिलनाडु और मंगलुरु में देखने को मिला था। दोनों जगहों पर इस्लामिक स्टेट से प्रभावित कट्टरपंथी व्यक्तियों ने हमले की कोशिश की थी। हालांकि, वे असफल रहे।
इन मामलों में समानता यह थी कि आरोपी जेमेशा मुबीन और मोहम्मद शारिक दोनों को श्रीलंका के एक ही व्यक्ति ने कट्टरपंथी बनाया था। श्रीलंका में हुए 'ईस्टर बम धमाकों' का मास्टरमाइंड जहरान हाशिम वहां इस्लामिक स्टेट का प्रमुख था। वह दक्षिण भारत आया था और काफी समय तक यहां रहा था। इसी दौरान उसने मुबीन और शारिक को कट्टरपंथी बनाया।
पश्चिम बंगाल और बिहार में भर्ती करने वालों को भेजने पर फोकस
आधिकारिक सूत्र ने आगे कहा कि बांग्लादेश में मौजूद मॉड्यूल पश्चिम बंगाल और बिहार में भर्ती करने वालों को भेजने पर ज्यादा केंद्रित हैं। दूसरी ओर, दक्षिणी राज्यों में श्रीलंका और मालदीव के जरिये चरमपंथी तत्वों को भेजने की तैयारी है।
अधिकारी ने इसे खतरनाक बताते हुए आगे कहा कि बांग्लादेश को इसके लिए सबसे मुफीद माना जा रहा है। इस्लामिक स्टेट के मुख पत्र दाबिक के हाल के संस्करण में 'बंगाल में फिर से जिहाद शुरू' शीर्षक के साथ एक लेख छपा था। इसका मकसद युवाओं को जिहाद के लिए उकसाना था। अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार था जब बांग्लादेश में स्थापित इस्लामिक स्टेट मॉड्यूल भारत में अपना एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।
श्रीलंका से खतरा सबसे कम
एक और अधिकारी ने कहा कि श्रीलंका से खतरा सबसे कम है। ईस्टर बम धमाकों के बाद इस गुट का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है। हालांकि, यह मानना गलत होगा कि गुट ने देश में अपनी दुकान बंद कर दी है। अधिकारी ने आगे कहा कि यही वजह है कि मालदीव से दक्षिण भारत में बड़ी कोशिश की जा रही है।
ये भी पढ़ें: मिल गया जवाब: 'जंग के बीच विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत', वैष्णव ने बताया पीएम ने क्यों की ईधन बचाने की अपील?
इसका मकसद भारत में उसी पैमाने पर हमले का है, जैसे श्रीलंका में किए गए थे। इस्लामिक स्टेट चाहता है कि हमले विदेशी चरमपंथी करें। इसके दो कारण बताए जा रहे हैं। पहला- विदेशी लड़ाकों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि भारत की तुलना में विदेशी लड़ाकों को कट्टरपंथ की ओर धकेलना ज्यादा आसान होता है। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि मकसद भारत में बड़ा हमला करना है। लेकिन दूसरा प्लान इसे रिक्रूटमेंट टूल (भर्ती करने के तरीके) के तौर पर इस्तेमाल करना है।
इस्लामिक स्टेट अपने कुछ भारतीय मॉड्यूल को भारत में हमले करने के लिए उकसा रहा है। लेकिन वे कई बार विफल हो चुके हैं। इस्लामिक स्टेट को लगता है कि विदेशी मॉड्यूल के हमले एक मिसाल बन सकते हैं और भारतीय गुर्गों को देश के भीतर हमले करने को प्रेरित कर सकते हैं।
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साल 2013 के अंत में जब आईएस ने वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी, तब भारत से भी कई लोग इस संगठन में शामिल होने के लिए देश छोड़कर चले गए थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एजेंसियों ने कई लोगों को सीरिया, इराक और अफगानिस्तान जाकर संगठन में शामिल होने से रोकने में सफलता हासिल की है।
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साथ ही, सफल कट्टरपंथ मुक्त अभियानों के जरिये उन लोगों को भी मुख्यधारा में वापस लाया गया, जो संगठन में शामिल होने की योजना बना रहे थे।
खुफिया ब्यूरो के एक कर्मी के अनुसार, भारत में यह समस्या काफी हद तक नियंत्रण में है। लेकिन अब संगठन अन्य देशों से कट्टरपंथी तत्वों को भारत में भेजने की कोशिश कर रहा है। इस्लामिक स्टेट ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका में अपने अलग-अलग मॉड्यूल स्थापित किए हुए हैं।
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तमिलनाडु और मंगलुरु में दिखा श्रीलंका मॉड्यूल का असर
श्रीलंका मॉड्यूल का असर तमिलनाडु और मंगलुरु में देखने को मिला था। दोनों जगहों पर इस्लामिक स्टेट से प्रभावित कट्टरपंथी व्यक्तियों ने हमले की कोशिश की थी। हालांकि, वे असफल रहे।
इन मामलों में समानता यह थी कि आरोपी जेमेशा मुबीन और मोहम्मद शारिक दोनों को श्रीलंका के एक ही व्यक्ति ने कट्टरपंथी बनाया था। श्रीलंका में हुए 'ईस्टर बम धमाकों' का मास्टरमाइंड जहरान हाशिम वहां इस्लामिक स्टेट का प्रमुख था। वह दक्षिण भारत आया था और काफी समय तक यहां रहा था। इसी दौरान उसने मुबीन और शारिक को कट्टरपंथी बनाया।
पश्चिम बंगाल और बिहार में भर्ती करने वालों को भेजने पर फोकस
आधिकारिक सूत्र ने आगे कहा कि बांग्लादेश में मौजूद मॉड्यूल पश्चिम बंगाल और बिहार में भर्ती करने वालों को भेजने पर ज्यादा केंद्रित हैं। दूसरी ओर, दक्षिणी राज्यों में श्रीलंका और मालदीव के जरिये चरमपंथी तत्वों को भेजने की तैयारी है।
अधिकारी ने इसे खतरनाक बताते हुए आगे कहा कि बांग्लादेश को इसके लिए सबसे मुफीद माना जा रहा है। इस्लामिक स्टेट के मुख पत्र दाबिक के हाल के संस्करण में 'बंगाल में फिर से जिहाद शुरू' शीर्षक के साथ एक लेख छपा था। इसका मकसद युवाओं को जिहाद के लिए उकसाना था। अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार था जब बांग्लादेश में स्थापित इस्लामिक स्टेट मॉड्यूल भारत में अपना एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।
श्रीलंका से खतरा सबसे कम
एक और अधिकारी ने कहा कि श्रीलंका से खतरा सबसे कम है। ईस्टर बम धमाकों के बाद इस गुट का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है। हालांकि, यह मानना गलत होगा कि गुट ने देश में अपनी दुकान बंद कर दी है। अधिकारी ने आगे कहा कि यही वजह है कि मालदीव से दक्षिण भारत में बड़ी कोशिश की जा रही है।
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इसका मकसद भारत में उसी पैमाने पर हमले का है, जैसे श्रीलंका में किए गए थे। इस्लामिक स्टेट चाहता है कि हमले विदेशी चरमपंथी करें। इसके दो कारण बताए जा रहे हैं। पहला- विदेशी लड़ाकों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि भारत की तुलना में विदेशी लड़ाकों को कट्टरपंथ की ओर धकेलना ज्यादा आसान होता है। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि मकसद भारत में बड़ा हमला करना है। लेकिन दूसरा प्लान इसे रिक्रूटमेंट टूल (भर्ती करने के तरीके) के तौर पर इस्तेमाल करना है।
इस्लामिक स्टेट अपने कुछ भारतीय मॉड्यूल को भारत में हमले करने के लिए उकसा रहा है। लेकिन वे कई बार विफल हो चुके हैं। इस्लामिक स्टेट को लगता है कि विदेशी मॉड्यूल के हमले एक मिसाल बन सकते हैं और भारतीय गुर्गों को देश के भीतर हमले करने को प्रेरित कर सकते हैं।