Politics: ‘क्या महिलाओं के अधिकारों के लिए खड़ा होना गंदी राजनीति है?’: बीजेपी सांसद ने अखिलेश से किया सवाल
भाजपा सासंद अपराजिता सारंगी ने अखिलेश यादव से सवाल किया है कि क्या महिलाओं के अधिकारों की बात करना गंदी राजनीति है? दरअसल अखिलेश यादव ने कहा था कि कोलकाता में महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या के बाद भाजपा राजनीति कर रही है और वह ममता बनर्जी के बचाव में उतरे हैं।
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समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा शनिवार को की गई टिप्पणी के बाद, भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने पलटवार करते हुए कहा है कि क्या महिलाओं के अधिकारों के लिए खड़ा होना गंदी राजनीति है?
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर के बलात्कार और हत्या पर सपा प्रमुख की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए, सारंगी ने कहा, "क्या महिलाओं के अधिकारों के लिए खड़ा होना गंदी राजनीति है? वहां जो हुआ उसकी क्रूरता और चल रही घटनाओं को देखते हुए बंगाल में - अगर भाजपा कार्यकर्ता महिलाओं के साथ खड़े हैं और इस घटना की निंदा कर रहे हैं - तो क्या इसे राजनीति माना जाएगा?"
उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सकारात्मक राजनीति में संलग्न है, उन्होंने कहा कि वे "गरीबों, शोषितों, वंचितों, उत्पीड़ित महिलाओं और युवाओं के अधिकारों की वकालत करते हैं।"
इससे पहले शनिवार को, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार और हत्या की घटना का भाजपा राजनीतिक लाभ ले रही है।
अखिलेश बोले- ममता महिलाओं का दर्द समझती हैं
अखिलेश ने भाजपा की ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग पर आपत्ति जताते हुए तर्क दिया था कि बनर्जी एक महिला होने के नाते अन्य महिलाओं का दर्द समझती हैं और उन्होंने उचित कार्रवाई की है।
अखिलेश यादव ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था, ‘बंगाल में जो घटना हुई है वह दर्दनाक है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद एक महिला हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना के दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। लेकिन, भाजपा को इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। क्या उप्र में बेटियां सुरक्षित हैं। देश के आंकड़े निकलवाएं तो सबसे ज्यादा बेटियों के साथ घटनाएं उप्र में हुई है।’
9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के दौरान एक स्नातकोत्तर प्रशिक्षु डॉक्टर की बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई, जिसके बाद चिकित्सा समुदाय ने देशव्यापी हड़ताल और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।