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मुश्किल: केंद्र में तैनाती के लिए राजी नहीं आईपीएस 'डीआईजी', मनोनयन प्रक्रिया से छूट देने के बाद भी खाली पड़े हैं आधे पद
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केंद्र सरकार में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के जरिए भरे जाने वाले विभिन्न पद खाली पड़े हैं। इनमें सबसे ज्यादा कमी 'आईपीएस डीआईजी' के पदों पर महसूस की जा रही है। विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों, आयोगों और जांच एवं खुफिया एजेंसियों में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 252 पद स्वीकृत हैं। 17 फरवरी 2022 की स्थिति के अनुसार, 123 डीआईजी के पद अभी खाली हैं।
गत मार्च में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत विभिन्न पदों पर कार्यरत आईपीएस 'एसपी' स्तर के अधिकारियों का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें वहां खाली पड़े डीआईजी के पद पर लगाया गया है। खास बात ये है कि गत फरवरी में केंद्र सरकार ने डीआईजी (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल) रैंक के आईपीएस अधिकारियों के लिए मनोनयन की पैनल प्रक्रिया को समाप्त कर दिया है। अब केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आईपीएस डीआईजी बिना किसी देरी के ज्वाइन कर सकते हैं।
सीएपीएफ के पूर्व अफसरों का कहना है, भले ही केंद्र ने आईपीएस डीआईजी के लिए प्रतिनियुक्ति पर आने की राह आसान बना दी है, मगर वे नहीं आना चाहते। वजह, उन्हें मनपसंद पोस्टिंग नहीं मिलती। केंद्रीय सुरक्षा बलों में 'डीआईजी' का पद ज्यादातर, फील्ड पोस्टिंग के दायरे में आता है। इसमें बॉर्डर, पहाड़, रेगिस्तान, जंगल और दूसरे कई तरह के खतरनाक इलाके शामिल होते हैं।
एसपी 'आईपीएस' के 203 पदों में से 97 पद रिक्त
केंद्रीय गृह मंत्रालय की आईपीएस मनोनयन की 17 फरवरी 2022 की स्थिति के अनुसार, केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर डीजी रैंक के लिए 15 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से तीन पद खाली हैं। एसडीजी 'आईपीएस' के लिए 10 पद मंजूर किए गए हैं, जिनमें से अभी एक पद रिक्त है। एडीजी 'आईपीएस' के 25 पद हैं, जो सभी भरे हुए हैं। आईजी 'आईपीएस' के लिए 140 पद स्वीकृत हैं। इनमें से अभी 29 पद खाली पड़े हैं। डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 252 पदों को मंजूरी दी गई थी, लेकिन 123 पद अभी खाली हैं। एसपी 'आईपीएस' के लिए स्वीकृत 203 पदों में से 97 पद रिक्त हैं। बीएसएफ में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 26 पद स्वीकृत हैं। खास बात है कि इनमें से 24 पद खाली हैं। जब आईपीएस डीआईजी नहीं आए तो 15 पदों को कैडर अधिकारियों की ओर डायवर्ट कर दिया गया। इसके बावजूद 9 पद अभी खाली हैं।
ज्वाइन न करने के कारण पद हो रहे डायवर्ट ...
सीआरपीएफ में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 38 पद रिजर्व हैं। जब आईपीएस ने प्रतिनियुक्ति पर ज्वाइन नहीं किया तो इनमें से 30 पदों को 31 दिसंबर 2021 तक कैडर अधिकारियों की तरफ डायवर्ट कर दिया गया। इसके बाद भी 6 पद खाली रह गए। सीआईएसएफ में 20 पद आईपीएस डीआईजी के हैं, मगर 17 पद खाली हैं। सीबीआई के 34 पदों में से 15 पद रिक्त हैं। हैरानी की बात तो ये है कि देश की प्रमुख केंद्रीय जांच एजेंसी में भी आईपीएस अधिकारी नहीं आना चाह रहे। यहां पर आईपीएस एसपी के लिए 63 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 40 पद खाली पड़े हैं। आईबी में आईपीएस डीआईजी के लिए 63 पद मंजूर हैं। इनमें से 45 पद खाली हैं। एसपी रैंक की बात करें तो 83 स्वीकृत पदों में से 43 पद खाली हैं।
डीआईजी के खाली पदों पर लगाए जा रहे एसपी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 21 मार्च 2022 को जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के जरिए 'एसवाईपीएनपीए' में प्रतिनियुक्ति पर एसपी 'आईपीएस' स्तर में काम कर रहे मेघना यादव, सेजू पी कुरुविला, डॉ. रोहिणी कटोच सेपत, डॉ. राम निवास सेपत और एस.अजीथा बेगम को डीआईजी लेवल प्रदान किया था। इसी तरह से सीआईएसएफ में तैनात ममता राहुल आईपीएस और राहुल जैन आईपीएस को वहीं पर डीआईजी के खाली पड़े पद पर लगाया गया है। गत मार्च में ही एनआईए में एसपी 'आईपीएस' के पद पर कार्यरत अमित सिंह, उमा, विक्रम खलाटे, तेजिंद्र सिंह व ज्योति प्रिया सिंह को खाली पड़े डीआईजी के पद पर लगाया गया है। एनएसजी में एसपी सिमर दीप सिंह को भी वहीं पर डीआईजी बनाया गया है। सुनील कुमार मीणा, जो एनएचआरसी में तैनात हैं, उन्हें वहीं पर खाली पड़े डीआईजी के पद पर लगाया गया है। ये आदेश भी 21 मार्च को जारी किए गए हैं।
2021 में हुआ था 109 आईपीएस का मनोनयन
'बीपीआरएंडडी' में एसपी 'आईपीएस' अंशुमन सिंह, अमनदीप सिंह कपूर और सराह अफजल अहमद रिजवी को वहीं पर खाली पड़े डीआईजी के पद पर लगाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की 223 वीं सेंट्रल पुलिस ऐस्टब्लिशमेंट बोर्ड 'सीपीईबी' की बैठक में 13 अप्रैल 2021 को 109 आईपीएस अधिकारियों का केंद्र में डीआईजी के पद पर मनोनयन किया था। हालांकि उस वक्त भी डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 252 पद स्वीकृत थे। गत 18 फरवरी को आईपीएस प्रदीप कुमार को बीएसएफ में डीआईजी के रिक्त पद पर लगाया गया था। 28 जनवरी 2020 को केंद्रीय गृह मंत्रालय की 223वीं सेंट्रल पुलिस ऐस्टब्लिशमेंट बोर्ड 'सीपीईबी' की बैठक में 96 आईपीएस का केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए मनोनयन किया गया था।
10 फरवरी से डीआईजी की मनोनयन प्रक्रिया खत्म हो गई थी
केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर लंबे समय से डीआईजी रैंक के आईपीएस अधिकारी ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। गृह मंत्रालय की एक कमेटी ने सुझाव दिया था कि इन अधिकारियों के लिए पैनल प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाए। इसके पूरा होने में काफी समय लगता है। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सरकार के इस कदम का उद्देश्य केंद्र में डीआईजी-रैंक के अधिकारियों की भारी कमी को दूर करना है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति के पास यह प्रस्ताव कई बार भेजा गया था।
गत 10 फरवरी को इसे कमेटी ने मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि डीआईजी-रैंक के अधिकारियों के लिए पैनल सिस्टम को खत्म करने से अब प्रतिनियुक्ति पर अधिक आईपीएस केंद्र में आ सकेंगे। मनोनयन प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक साल लग जाता है। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद का कहना है कि राज्य पुलिस से डीआईजी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए तैयार नहीं होते। उन्हें यहां पर पोस्टिंग में च्वाइस नहीं मिलती। जब मन मुताबिक पोस्टिंग नहीं मिलती तो वे क्यों आएंगे। स्टेट पुलिस में डीआईजी का ज्यादा रोल नहीं बचा है। अब तो कई राज्यों में आईएएस के पदों पर भी आईपीएस लगाए जाने लगे हैं। सबसे खराब स्थिति सीएपीएफ में है। यहां तो डीआईजी के लगभग 70 फीसदी पद रिक्त पड़े रहते हैं।
मजबूरन, आईपीएस के खाली पदों को कैडर अफसरों से भरा जाता है। सीएपीएफ में डीआईजी की सख्त पोस्टिंग होती है, इसलिए वे प्रतिनियुक्ति पर नहीं आते। जो आते भी हैं, वे विभिन्न आयोगों में या मेट्रो सिटी में जिन एजेंसियों का कार्यालय है, वहां पोस्टिंग कराने में कामयाब हो जाते हैं।