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चिदंबरम ने सीबीआई की उम्मीदों पर फेरा 'पानी', रिमांड के दौरान नहीं खोल पाई एक भी राज!

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 04 Sep 2019 06:43 PM IST
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पेशी के दौरान पी. चिदंबरम
पेशी के दौरान पी. चिदंबरम - फोटो : PTI- फाइल फोटो

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पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम 21 अगस्त से सीबीआई रिमांड पर हैं। जांच एजेंसी भी अब इस रिमांड अवधि को आगे बढ़वाने की वकालत नहीं कर रही। सूत्र बताते हैं कि करीब दो सप्ताह तक हुई पूछताछ में सीबीआई चिदंबरम से सच उगलवाने में सफल नहीं हो सकी है। खासतौर पर, मुखौटा कंपनियों को लेकर पी.चिदंबरम के सामने एक लंबी चौड़ी सूची रखी गई थी। कई दस्तावेज उन्हें दिखाए गए, मगर उन्होंने किसी को भी पहचानने से इंकार कर दिया।
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जब उनसे इन दस्तावेजों के बारे में सवाल किए गए तो वे मुस्कुराते हुए कहते, मैं कुछ नहीं जानता हूं। एयरसेल-मैक्सिस डील केस में 3500 करोड़ रुपये के एफडीआई प्रपोजल को मंजूरी प्रदान करने के सवालों को भी उन्होंने टाल दिया। जांच एजेंसी के मुताबिक चिदंबरम ने कहा, सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है।

आधा दर्जन देशों को लैटर रोगेटरी भेजा

सीबीआई के अलावा ईडी का भी यही आरोप रहा है कि चिदंबरम परिवार की कई देशों में शैल यानी मुखौटा कंपनियां हैं। जिनमें कई हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। जांच एजेंसियों ने इस बाबत पुख्ता सबूत होने का दावा भी किया था। यही वजह रही कि सीबीआई ने देश-विदेश में फैली इन कंपनियों से जुड़े तमाम दस्तावेज हासिल करने के लिए करीब आधा दर्जन देशों को लैटर रोगेटरी भेजा है। किसी मामले में साक्ष्य हासिल करने के लिए यह एक अदालती प्रार्थना पत्र होता है। इसमें दूसरे राष्ट्र से किसी केस की सच्चाई का पता लगाने के लिए मदद देने का आग्रह किया जाता है।

सीबीआई की उम्मीदों पर पानी फेरा

सीबीआई को उम्मीद थी कि रिमांड के दौरान पी.चिदंबरम ऐसी तमाम जानकारियों से पर्दा हटा देंगे। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ। मुखौटा कंपनियों में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर चिदंबरम परिवार की ओर से कब और किसका पैसा लगा है, उसका स्रोत क्या है, जांच एजेंसी ने इस बाबत चिदंबरम के समक्ष कई सबूत पेश किए। लेकिन उन्होंने सभी दस्तावेजों को पहचाने से साफ इंकार कर दिया। पूर्व वित्तमंत्री के परिवार के पास छह सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की चल-अचल संपत्ति है और इसका एक बड़ा हिस्सा विदेश में है, इस सवाल का भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

सीबीआई ने जब कार्ति चिदंबरम के कुछ दोस्तों के नामों को लेकर पी. चिदंबरम से सवाल पूछे तो उन्होंने जवाब दिए। चिदंबरम ने बताया कि कौन-कौन लोग कार्ति के साथ कारोबार करते हैं और कौन से दोस्त उसके साथ विदेश में पढ़े हैं। हालांकि चिदंबरम ने यहां भी मुखौटा कंपनियों से जुड़े कई सवालों के जवाब बड़ी सफाई के साथ टाल दिए।

29 संपत्तियों का ब्यौरा सामने आया

सीबीआई सूत्रों की मानें तो विदेश में कथित तौर पर चिदंबरम परिवार की 29 संपत्तियां सामने आ चुकी हैं, जिनका ब्यौरा भी जांच एजेंसी के पास मौजूद है। हालांकि अब ऐसी प्रॉपर्टी की संख्या करीब 51 पहुंच गई है। इनमें मॉल, कॉटेज, टेनिस क्लब, मध्यम स्तर के शॉपिंग कांप्लेक्स, दूरसंचार कंपनियां और छोटे-छोटे आईटी हब शामिल हैं। कार्ति चिदंबरम ने करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से स्पेन के बार्सिलोना में टेनिस क्लब और ब्रिटेन में कॉटेज खरीदा था। इनमें से दो चार को छोड़ दें तो बाकी कंपनियां मुखौटों के सहारे ही चल रही हैं।

चिदंबरम इस बाबत कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए कि ये सभी प्रॉपर्टी खरीदने के लिए उनके पास रुपया कहां से और कैसे आया है। जब भी उनसे पूछा गया तो वे बोले, मैं कुछ नहीं जानता हूं और ये मेरी संपत्ति नहीं है।

वायदे से मुकरे चिदंबरम

सीबीआई और ईडी का अभी तक यही आरोप रहा है कि चिदंबरम ने जांच में कभी सहयोग नहीं किया। वे हर सवाल का गोलमोल जवाब देते थे। ऐसे में उन्हें रिमांड में लेकर पूछताछ करने की जरुरत है। अब चिदंबरम सीबीआई के रिमांड पर हैं, लेकिन वे किसी सवाल का सीधा जवाब नहीं दे रहे हैं। चिदंबरम ने पिछले साल जांच एजेंसी को भरोसा दिलाया था कि वे 06 जून 2018 को सीबीआई के समक्ष जब पेश होंगे तो दस्तावेज साथ लेकर आएंगे।

लेकिन तय समय पर पेश होने के बाद भी वे अपने साथ कोई दस्तावेज लेकर नहीं आए। जिससे जांच एजेंसी को खासी निराशा का सामना करना पड़ा। अब रिमांड के दौरान भी जांच एजेंसी कोई दस्तावेज हासिल नहीं कर सकी है।

एफआईपीबी से मंजूरी नहीं ली

सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय के कुछ अहम दस्तावेजों कुछ ऐसे भी थे, जो 2007-08 में जब चिदंबरम के वित्तमंत्री रहने के दौरान उनके दफ्तर से जारी हुए थे। आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड से डाउनटाउन स्ट्रीम के माध्यम से आईएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड में निवेश किया गया, इसके लिए एफआईपीबी की मंजूरी नहीं ली गई। बाद में आईएनएक्स समूह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इन सवालों पर भी चिदंबरम चुप रहे। आरोप है कि चिदंबरम ने कथित तौर पर 17 मामलों में कार्ति चिदंबरम और उनके स्वामित्व वाली कई मुखौटा कंपनियों को फायदा पहुंचाया था।

कंपनियों को पहचानने से किया इंकार

जांच एजेंसी ने मनी ट्रेल की भी एक सूची तैयार की थी, जिसमें कार्ति चिदंबरम के कथित तौर पर घूस लेने की करीब 67 पन्नों की एक फाइल भी शामिल थी। रिमांड के दौरान विदेश में चिदंबरम परिवार की जो चल अचल सम्पत्ति है, उसके कई दस्तावेज जांच एजेंसी ने पूर्व वित्तमंत्री के सामने रखे, लेकिन चिदंबरम ने इन्हें पहचाने से ही मना कर दिया।

इनमें एएससीपीएल की बेलेंस सीट, क्रिया एफएमसीजी डिस्ट्रीब्यूटर प्राइवेट लिमिटेड, सीबीएन प्लेसमेंट, नोर्थस्टार सॉफ्टवेयर, यूके की कॉस्टल गॉर्डन अड्वाइजरी लिमिटेड, टाइटस टेनिस लिमिटेड और स्पेन फाइबर आदि कंपनियों के दस्तावेज को भी पी चिदंबरम के सामने रखा गया।

साथ ही वासन हेल्थकेयर, एडवांटेज, आईएस ब्रिक और डीसीबी बैंक से हुए लेनदेन पर भी सवाल पूछे गए। स्पेन फाइबर से कार्ति की कंपनी एएससीपीएल के खाते में एक करोड़ 11 लाख रुपए जमा कराए गए थे। इस बारे में भी चिदंबरम से पूछताछ हुई, लेकिन उन्होंने इन सौदों से खुद को अलग करते हुए कहा कि इनमें मेरा कोई पैसा नहीं लगा है।

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