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शिक्षा-मानव कौशल में निवेश करने पर शीर्ष तीन अर्थव्यवस्था में शामिल होगा भारत
Sun, 04 Aug 2019 05:31 AM IST
Nilesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Sun, 04 Aug 2019 05:31 AM IST
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शिक्षा
अगर भारत अगले 15 साल में दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना चाहता है तो उसे शिक्षा और मानव कौशल में निवेश करना चाहिए। एक अग्रणी बिजनेस स्कूल के थिंकटैंक ने एक श्वेत पत्र के माध्यम से यह बात कही।
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एक थिंकटैंक और देश के अग्रणी बिजनेस स्कूल के नेटवर्क एमबीएयूनिवर्स डॉट कॉम ने कहा कि इस दौरान भारत को अपना जीडीपी दोगुना करना होगा, जैसा वर्ष 2000 और 2006 के बीच हुआ था। उस अवधि में देश का जीडीपी दोगुना होकर 476 अरब डॉलर से 949 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था। साथ ही प्रबंधन और इंजीनियरिंग शिक्षा में खासा इजाफा हुआ था।
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रिपोर्ट के मुताबिक, कौशल और रोजगार पर केंद्रित उच्च शिक्षा से भारत को सेवा क्षेत्र पर आधारित अर्थव्यवस्था बनने में खासी मदद मिली। इसमें कहा गया कि भारत के लिए 2025 तक 35 प्रतिशत और 2035 तक 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) का लक्ष्य हासिल करना जरूरी है, जिसके बाद ही भारत, चीन की बराबरी कर पाएगा।
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दिलचस्प है कि वर्तमान में चीन का जीईआर अमेरिका की तुलना मेें आधा ही है। श्वेत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि टिकाऊ जीईआर वृद्धि के लिए भारत को 2025 तक देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 1200 तक ले जाने की जरूरत है, जो फिलहाल 950 के स्तर पर है।