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Interpol General Assembly: इंटरपोल को पीछे छोड़ रहे ये अपराधी, क्यों चुनौती बना क्रिप्टोकरेंसी और साइबर क्राइम

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 18 Oct 2022 06:01 PM IST
सार

Interpol General Assembly: अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन (इंटरपोल) के महासचिव जुर्गन स्टॉक ने कहा, दुनिया में संगठित अपराध नेटवर्क का बोलबाला है। वे लोग अरबों डॉलर की कमाई कर रहे हैं। ऐसे अपराधों को रोक पाने की दर एक प्रतिशत भी नहीं है...

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Interpol General Assembly: cryptocurrency and cybercrime become a challenge for interpol
Interpol General Assembly - फोटो : ANI

विस्तार

क्रिप्टोकरेंसी और साइबर अपराध, दुनिया की पुलिस के लिए सिरदर्द बन गए हैं। उच्च तकनीक के जरिए इस तरह के अपराधों को अंजाम देने वाले लोग, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पहुंच से बाहर रहते हैं। वे पुलिस संगठनों के समक्ष चुनौती पेश कर रहे हैं। दूसरी ओर, अपराधियों के पास मौजूद उच्च तकनीक का मुकाबला करने के लिए अनेक देशों की पुलिस एवं जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। उनके पास ट्रेनिंग का अभाव है और ठोस कानूनी ढांचा भी नहीं है।

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एक फीसदी से कम अपराध रोकने की दर

18 से 21 अक्तूबर तक नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित 90वीं इंटरपोल महासभा में यह बात सामने आई है। मंगलवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने महासभा को संबोधित किया। चार दिवसीय आयोजन में पाकिस्तान सहित विश्व के 195 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, इंटरपोल एक एतिहासिक मील के पत्थर के करीब पहुंच रहा है। अगले साल यह अपने 100 साल पूरे करेगा। दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए इंटरपोल, सार्वभौमिक सहयोग का आह्वान करता है। पिछले 99 वर्षों में इंटरपोल ने 195 देशों के पुलिस संगठनों को आपस में जोड़ा है। भले ही किन्हीं देशों के कानूनी ढांचे में मतभेद रहा हो, लेकिन उसके बावजूद इस संगठन की अपनी अहमियत है। अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन (इंटरपोल) के महासचिव जुर्गन स्टॉक ने कहा, दुनिया में संगठित अपराध नेटवर्क का बोलबाला है। वे लोग अरबों डॉलर की कमाई कर रहे हैं। ऐसे अपराधों को रोक पाने की दर एक प्रतिशत भी नहीं है।

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बतौर जुर्गन स्टॉक, हाई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से वे विभिन्न देशों की जांच एजेंसियों को गच्चा देकर वित्तीय लेन देन कर रहे हैं। ऐसे मामलों में करीब 99 फीसदी संपत्ति, अपराधियों के हाथों में ही रहती है। यह चिंता का विषय है। साइबर अपराधों की वैश्विक लगात के अनुमान के अनुसार, इसके 2025 तक 10.5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इंटरपोल, क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते चलन पर गंभीरता से नजर रखे हुए है। चूंकि यह लेन-देन बहुत हाई टेक्नोलॉजी के जरिए होता है, इसलिए इंटरपोल के सदस्य देशों की जांच एजेंसियों एवं पुलिस संगठनों को ट्रेंड किए जाने की सख्त जरुरत है। इसके लिए इंटरपोल ने काम शुरू कर दिया है। क्रिप्टोकरेंसी की तकनीक बहुत उच्च होने के कारण कुछ लोग गैर कानूनी कार्यों में इसका इस्तेमाल करने लगे हैं। वैश्विक स्तर पर भारत सहित अनेक ऐसे देश हैं, जहां इस तरह की उन्नत तकनीक को पकड़ने के संसाधन नहीं हैं। हालांकि अब सभी देश इसकी तकनीक से अपने पुलिस बलों को अवगत करा रहे हैं।

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सिंगापुर में बनी एक विशेष टीम

इंटरपोल, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े क्राइम पर अंकुश लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए सिंगापुर में एक विशेष टीम का गठन किया गया है। यह टीम विभिन्न देशों की सरकारों को क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित अपराधों से निपटने में मदद करेगी। स्टॉक के अनुसार, बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक ठोस कानूनी ढांचे का अभाव (बीटीसी) और ईथर (ईटीएच), पुलिस एवं जांच एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। विभिन्न देशों के पास अभी ऐसी तकनीक का अभाव है, जो आसानी से अपराधियों का मुकाबला कर सके। किसी देश के पास ट्रेनिंग का अभाव होता है, तो कहीं तकनीक उपलब्ध नहीं होती। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष यही कुछ बड़े चैलेंज हैं। अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन, क्रिप्टोकरेंसी और साइबर क्राइम, इन दोनों विषयों पर एक साथ काम करेगा। वजह, ये दोनों विषय, तकनीक से जुड़े हैं। अपराधी, इनका बेखौफ इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें मालूम है कि वे बहुत से देशों में ऐसे अपराधों से बच सकते हैं।


भारत में आयोजित हो रही इंटरपोल की आम सभा में क्रिप्टोकरेंसी और साइबर अपराध, इन दोनों से कैसे निपटा जाए, तकनीक का आदान प्रदान कैसे हो, सदस्य राष्ट्रों की सोच क्या है, आदि महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा हो रही है। क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल जब गैर कानूनी कार्यों के लिए होता है, तो उसकी चपेट में कोई भी देश आ सकता है। विभिन्न राज्यों की सरकारों को राजनीतिक एवं आर्थिक नुकसान पहुंचाने की साजिश होती है। सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर प्रवीण सिन्हा ने बताया, इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए इंटरपोल एक बेहतरीन मंच है। विभिन्न देशों के पुलिस संगठनों के बीच समन्वय, सूचनाओं एवं और तकनीक का त्वरित आदान-प्रदान संभव होता है। अगर इस तरह के हाईटेक अपराधों की सूचना और समन्वय, भरोसे के साथ हो तो अपराधियों को पकड़ पाने में सफलता मिल सकती है। इस अपराध का दायरा बहुत बढ़ा है। हजारों किलोमीटर दूर स्थित देश से किसी दूसरे राष्ट्र में आर्थिक अपराध को अंजाम दिया जा सकता है। ऐसे में किसी देश की पुलिस के लिए अपराधी तक पहुंचना बहुत मुश्किल होता है। इंटरपोल के रेड नोटिस की अपनी सीमाएं हैं।

कई देशों में डाटा इंटेलिजेंस स्टार्टअप शुरू

अभी तक कानूनी प्रवर्तन एजेंसियां, क्रिप्टोकरेंसी के तरीकों का पता लगा रही हैं। ट्रांजेक्शन के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। पुलिस किसी केस में एक तय नेटवर्क पर काम करती है, तभी पता लगता है कि दूसरे केस में तो उससे भी ज्यादा पेचीदगी है। डार्क वेब नेटवर्क जैसी तकनीकों का तोड़ निकाला जा रहा है। दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने डाटा इंटेलिजेंस स्टार्टअप शुरू किए हैं। पीएम मोदी ने यूएन समिट फॉर डेमोक्रेसी में बोलते हुए कहा था, सोशल मीडिया और क्रिप्टोकरेंसी जैसी उभरती तकनीक के लिए वैश्विक नियम बनाने होंगे। इसके लिए दुनिया के सभी देशों को साथ आना होगा। क्रिप्टोकरेंसी, इसका इस्तेमाल लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हो, न कि उसे कमजोर करने के लिए।



क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी तकनीक है, जो शेयर मार्केट की तरह उछाल लेती है, तो दूसरे ही पल धड़ाम से गिर भी जाती है। इसमें हाई तकनीक के चलते धोखाधड़ी या फ्रॉड की संभावना कम होती है। अगर भारत में इसका इस्तेमाल होता है तो संबंधित उपयोगकर्ता को ही रिस्क उठाना पड़ता है। वजह, आरबीआई का इस पर कोई नियंत्रण नहीं होता। उच्च तकनीक के चलते क्रिप्टोकरेंसी की ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल जब गैर कानूनी कार्यों में होता है, तो अपराधियों को पकड़ पाना मुश्किल होता है। सांगठनिक अपराध करने वाले, आतंकी संगठन या किसी देश की सरकार को अस्थिर करने के प्रयासों में लगी ताकतें, वहां तक आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता। कई बार ऐसे आपराधिक तत्व, राज्यों की पहुंच से बाहर हो जाते हैं। वे आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनने लगते हैं।

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