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क्या आपने सागर, पहाड़ और रेगिस्तान में बीएसएफ का योग देखा है? अगर नहीं तो देखिये
Thu, 20 Jun 2019 05:26 PM IST
Jitendra Bhardwaj
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: Jitendra Bhardwaj
Updated Thu, 20 Jun 2019 05:26 PM IST
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बीएसएफ के जवान समुद्र में योगाभ्यास करते हुए
- फोटो : Amar Ujala
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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) है तो कोई सरल पोस्टिंग मिलेगी नहीं। यानी बॉर्डर पर ही तैनाती होगी, जहां सागर, पहाड़, दलदल, घने जंगल और रेगिस्तान होगा। और हां, इनके अलावा दुश्मन की आहट, यह संभावना तो सदा ही बनी रहती है। तापमान 10-20 डिग्री है या 50 के पार, बीएसएफ को हर हाल में योगासन तो करना ही है। ऐसा नहीं है कि ये जवान खुद को तंदुरुस्त रखने के लिए योगासन करते हैं, बल्कि इन्हें ड्यूटी के दौरान अपने शरीर के विभिन्न अंगों के बीच एक सामंजस्य, संतुलन और नियंत्रण रखना पड़ता है। दुश्मन पर नजर रखने या उससे जूझने के लिए जिस एकाग्रता की जरूरत होती है, उसे ये जवान योगासन से प्राप्त कर लेते हैं। अब बीएसएफ योगासन में इतनी पारंगत हो गई है कि वह केवल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए योगासन नहीं करती, बल्कि जवानों ने उसे अपनी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है।
सबसे पहले बात करते हैं रेगिस्तान की। राजस्थान के कई हिस्सों में, खासतौर से जून में यहां का तापमान 50 डिग्री के पार चला जाता है। अंदाजा लगा सकते हैं कि दिनभर इतनी तपन में कई किलोमीटर की पैदल गश्त लगाने के बाद शरीर में क्या बचता होगा। आधी रात के बाद जब रेत ठंडी पड़ती है तो नींद आना स्वाभाविक है। इसे जवानों का जुनून कहें या उन्होंने योगाभ्यास से खुद के अंगों पर इतना नियंत्रण और संयम हासिल कर लिया है कि वे सुबह उठते ही योगासन की क्रियाओं में जुट जाते हैं। नींद भले ही तीन घंटे की मिले या चार घंटे की, योगासन उन्हें करना ही करना है।
इसी तरह गुजरात बॉर्डर पर कच्छ के रण में भी योग के प्रति बीएसएफ का जुनून देखने को मिलता है। वहां दलदल भी होती है, जिसमें हमारे जवानों को गश्त करनी पड़ती है। इसके बाद वे अपनी बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) पर योग करते हैं। अगर कोई जवान समुद्र में तैरने वाली बीओपी पर तैनात है तो वह वहीं योगासन करने लगता है। बीओपी की ऊपरी सतह पर दर्जनभर जवान एक साथ योग कर सकते हैं। इसी तरह दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों में भी योग क्रियाएं जारी रहती हैं।
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सबसे पहले बात करते हैं रेगिस्तान की। राजस्थान के कई हिस्सों में, खासतौर से जून में यहां का तापमान 50 डिग्री के पार चला जाता है। अंदाजा लगा सकते हैं कि दिनभर इतनी तपन में कई किलोमीटर की पैदल गश्त लगाने के बाद शरीर में क्या बचता होगा। आधी रात के बाद जब रेत ठंडी पड़ती है तो नींद आना स्वाभाविक है। इसे जवानों का जुनून कहें या उन्होंने योगाभ्यास से खुद के अंगों पर इतना नियंत्रण और संयम हासिल कर लिया है कि वे सुबह उठते ही योगासन की क्रियाओं में जुट जाते हैं। नींद भले ही तीन घंटे की मिले या चार घंटे की, योगासन उन्हें करना ही करना है।
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इसी तरह गुजरात बॉर्डर पर कच्छ के रण में भी योग के प्रति बीएसएफ का जुनून देखने को मिलता है। वहां दलदल भी होती है, जिसमें हमारे जवानों को गश्त करनी पड़ती है। इसके बाद वे अपनी बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) पर योग करते हैं। अगर कोई जवान समुद्र में तैरने वाली बीओपी पर तैनात है तो वह वहीं योगासन करने लगता है। बीओपी की ऊपरी सतह पर दर्जनभर जवान एक साथ योग कर सकते हैं। इसी तरह दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों में भी योग क्रियाएं जारी रहती हैं।
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योगासन से बीएसएफ को हुआ है ये बड़ा फायदा
बीएसएफ के जवान पहाड़ों पर योगाभ्यास करते हुए
- फोटो : Amar Ujala
बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि जब से सीमाओं पर योग शुरू हुआ है, जवानों को इच्छाशक्ति, संयम और एकाग्रता के बीच संतुलन बैठाने में बड़ी मदद मिली है। चूंकि योग का शरीर, मन व आत्मा को नियंत्रित रखने में अहम योगदान होता है, लिहाजा बीएसएफ ने भी नियमित योगासन कर इस अवस्था को काफी हद तक प्राप्त कर लिया है।
'सीमाएं हमारी जिम्मेदारी हैं पर हमारी जिम्मेदारी की कोई सीमा नहीं' इस नारे को पूर्ण रूप से चरितार्थ करने के लिए बीएसएफ के जवान नियमित योगासन करते हैं। बॉर्डर पर दुश्मनों से घिरे रहने वाले जवानों में आत्मविश्वास व बल, दोनों ही बातों का होना जरूरी है, ऐसे हालात में उनके लिए योग का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। केवल योग क्रियाएं हीं हैं जिसके माध्यम से ये प्रहरी अपनी दैनिक नित्य क्रियाओं के साथ-साथ पारिवारिक व सामाजिक जीवन के बीच सामंजस्य स्थापित कर पाते हैं।
'सीमाएं हमारी जिम्मेदारी हैं पर हमारी जिम्मेदारी की कोई सीमा नहीं' इस नारे को पूर्ण रूप से चरितार्थ करने के लिए बीएसएफ के जवान नियमित योगासन करते हैं। बॉर्डर पर दुश्मनों से घिरे रहने वाले जवानों में आत्मविश्वास व बल, दोनों ही बातों का होना जरूरी है, ऐसे हालात में उनके लिए योग का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। केवल योग क्रियाएं हीं हैं जिसके माध्यम से ये प्रहरी अपनी दैनिक नित्य क्रियाओं के साथ-साथ पारिवारिक व सामाजिक जीवन के बीच सामंजस्य स्थापित कर पाते हैं।
बीएसएफ के जवानों को बड़े राष्ट्रीय योग संस्थानों से मिला है प्रशिक्षण
बीएसएफ के जवान योगाभ्यास करते हुए
- फोटो : Amar Ujala
जवानों को योग की गहराई तक ले जाने और उसके शारीरिक एवं आत्मिक फायदों से अवगत कराने के लिए बीएसएफ ने अपने ट्रेनर को बड़े राष्ट्रीय योग संस्थानों से प्रशिक्षण दिलाया है। बल के ट्रेनर सीमा चौकी पर पहुंचकर जवानों को योगाभ्यास कराते हैं। राष्ट्रीय योग संस्थानों जैसे ‘पतंजलि योग विद्यापीठ’, ‘मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान’ और ‘ईष फाउंडेशन’ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से ट्रेनर का रेफ्रेशर कोर्स भी चलता रहता है।
21 जून को सीमा सुरक्षा बल अपनी सभी यूनिटों में योग कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। इस दौरान योग की कार्यशालाएं, गोष्ठियां और निबंध-लेखन प्रतियोगिता कराई जाएंगी। सीमा चौकियों, नक्सल व हिंसा प्रभावित इलाकों में भी योग को अनिवार्य तौर पर लागू कर दिया गया है।
21 जून को सीमा सुरक्षा बल अपनी सभी यूनिटों में योग कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। इस दौरान योग की कार्यशालाएं, गोष्ठियां और निबंध-लेखन प्रतियोगिता कराई जाएंगी। सीमा चौकियों, नक्सल व हिंसा प्रभावित इलाकों में भी योग को अनिवार्य तौर पर लागू कर दिया गया है।