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कर्नाटक: बंगलूरू में आज से अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर समिट, खतरों से निपटने का तैयार होगा ब्लू प्रिंट
Tue, 20 Jan 2026 06:52 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली/बंगलूरू।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली/बंगलूरू।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 20 Jan 2026 06:52 AM IST
सार
बंगलूरू में मंगलवार से शुरू हो रहा अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सम्मेलन आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों पर केंद्रित रहेगा। इसमें कई बड़े देशों के रक्षा विशेषज्ञ भविष्य के 'अदृश्य युद्ध' से निपटने की रणनीति पर मंथन करेंगे। नेटवर्किंग और डाटा आधारित युद्ध की तैयारी के लिहाज से यह सम्मेलन भारतीय सेना के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। पढ़ें रिपोर्ट-
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
आधुनिक युद्धक्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की बढ़ती भूमिका देखते हुए बंगलूरू में 7वां अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सम्मेलन मंगलवार से शुरू होगा। तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत सहित अमेरिका, इस्राइल, कनाडा, इटली, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देशों की 48 इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर संस्थाएं भाग लेंगी।
भविष्य के युद्ध के लिए खुद को तैयार करने में जुटी भारतीय सेना ने साल 2026 और 2027 को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी वर्ष के तौर पर मनाने का फैसला किया है। इसको देखते हुए यह सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित हिस्सा लेंगे। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सूचना संचालन और साइबर-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऑपरेशन के क्षेत्र में काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी जमा होंगे।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का आयोजन रक्षा मंत्रालय, डीआरडीओ और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की मदद से एसोसिएशन ऑफ ओल्ड क्रोज (एओसी) नाम की संस्था कर रही है। सम्मेलन में सैन्य बलों, डीआरडीओ, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और रक्षा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों की भागीदारी भी होगी। इस दौरान लगभग 130 उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
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ये भी पढ़ें: नौसेना प्रमुख बोले- युवा होंगे विकसित भारत के एक्टर-डायरेक्टर व दर्शक, आत्म अनुशासन जरूरी
ये होता है वॉरफेयर
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यह युद्ध का वह क्षेत्र है, जिसमें विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम और निर्देशित ऊर्जा का उपयोग करके दुश्मन की युद्ध क्षमताओं को बाधित या नष्ट किया जाता है। साथ ही अपनी प्रणालियों को ऐसे हमलों से सुरक्षित रखा जाता है। इसे अदृश्य युद्ध भी कहा जाता है क्योंकि यह मिसाइलों या गोलियों से नहीं, बल्कि अदृश्य तरंगों जैसे रेडियो तरंगें, राडार सिग्नल, इन्फ्रारेड या लेजर के जरिए लड़ा जाता है। डिजिटल युग में विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम पर नियंत्रण रखने वाले देश की युद्ध जीतने की सबसे ज्यादा क्षमता होती है।
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भविष्य के युद्ध के लिए खुद को तैयार करने में जुटी भारतीय सेना ने साल 2026 और 2027 को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी वर्ष के तौर पर मनाने का फैसला किया है। इसको देखते हुए यह सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित हिस्सा लेंगे। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सूचना संचालन और साइबर-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऑपरेशन के क्षेत्र में काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी जमा होंगे।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का आयोजन रक्षा मंत्रालय, डीआरडीओ और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की मदद से एसोसिएशन ऑफ ओल्ड क्रोज (एओसी) नाम की संस्था कर रही है। सम्मेलन में सैन्य बलों, डीआरडीओ, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और रक्षा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों की भागीदारी भी होगी। इस दौरान लगभग 130 उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
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ये होता है वॉरफेयर
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यह युद्ध का वह क्षेत्र है, जिसमें विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम और निर्देशित ऊर्जा का उपयोग करके दुश्मन की युद्ध क्षमताओं को बाधित या नष्ट किया जाता है। साथ ही अपनी प्रणालियों को ऐसे हमलों से सुरक्षित रखा जाता है। इसे अदृश्य युद्ध भी कहा जाता है क्योंकि यह मिसाइलों या गोलियों से नहीं, बल्कि अदृश्य तरंगों जैसे रेडियो तरंगें, राडार सिग्नल, इन्फ्रारेड या लेजर के जरिए लड़ा जाता है। डिजिटल युग में विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम पर नियंत्रण रखने वाले देश की युद्ध जीतने की सबसे ज्यादा क्षमता होती है।
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