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International Women's Day : बराबरी पर आई बात

Thu, 08 Mar 2018 10:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 08 Mar 2018 10:59 AM IST
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internation women's day : increased percentage of equality

यह जुनून है छा जाने का... देश तब गर्व से भर उठा जब पहली महिला फाइटर पायलट अवनी चतुर्वेदी ने लड़ाकू विमान उड़ाया... लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में नेवी की छह सदस्यीय महिला टीम समंदर के रास्ते दुनिया नापने निकली पड़ी... और गणतंत्र दिवस पर बीएसएफ की 113 महिला बाइकर्स की टुकड़ी 'सीमा भावानी' ने सब इंस्पेक्टर स्टेंजीन नॉरयांग के नेतृत्व में राजपथ पर मोटरसाइकिलों पर अद्भुत करतब दिखाए।

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फैसलों में बढ़ी ताकत

राजनीतिक, आर्थिक से लेकर निर्णायक पदों पर जिस तरह से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, बात धीरे-धीरे बराबरी तक आने लगी है। सेना से लेकर जिम्मेदारी वाले सारे पदों पर महिलाओं की बढ़ती संख्या से जो संकेत मिलते हैं, उसके नतीजे उत्साहित करने वाले हैं। सामान्य जीवन से लेकर घर परिवार में उनकी राय न सिर्फ बेहद अहम हो गई है बल्कि वे फैसले भी ले रही हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट (एनएफएचएस- 4) के आंकड़े बताते हैं कि पुरूष अब 95 फीसदी फैसलों में पत्नियों की राय को प्रमुखता देते हैं। तीन चौथाई महिलाएं परिवार के स्वास्थय संबंधी फैसले ले रही हैं। 

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दोगुनी से ज्यादा बढ़ी कमाऊ पत्नियों की संख्या

internation women's day : increased percentage of equality

वर्ष 2006 के मुकाबले कमाऊ पत्नियों की संख्या में दोगुनी से ज्यादा वृद्धि हुई है। हर चौथी महिला आज किसी न किसी काम से जुड़ी है। साथ ही महिलाओं का अपनी कमाई खर्च करने का फैसला 65 से बढ़कर 82 फीसदी हुआ, यानि आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ी है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट-2016 से ये आंकड़े सामने आए हैं-

  • 63 फीसदी महिलाएं घर के फैसले ले रही हैं या उनका हिस्सा बन रही हैं।
  • वर्ष 2006 में केवल 20 फीसदी पत्नियां ही पति के बराबर या ज्यादा कमा रही थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 43 फीसदी हो गई है।
  • पति की कमाई खर्च करने से जुड़े निर्णयों में वर्ष 2006 में 62 फीसदी महिलाओं की भूमिका थी जो अब बढ़कर 65 फीसदी हो गई है। 
  • करीब 75 फीसदी महिलाएं स्वास्थ्य से जुड़े निर्णयों में शामिल हो रही हैं।
  • 73 फीसदी महिलाएं कार, टीवी खरीदने जैसे फैसले ले रही हैं। 
  • 75 फीसदी महिलाएं परजनों व रिश्तेदारों से मेल-मिलाप में भूमिका निभा रही हैं। दस साल पहले तक यह आंकड़ा 61 फीसदी था।
  • 53 फीसदी महिलाओं के बैंक या सेविंग अकाउंट हैं जिनका उपयोग वह खुद कर रही हैं। यह आंकड़ा पहले 15 फीसदी था। 
  • मणिपुर में 54 फीसदी और तेलंगाना में 50 फीसदी महिलाएं कामकाजी हैं। यह आंकड़ा पंजाब, असम और जम्मू-कश्मीर में 16 से 18 फीसदी के बीच है।
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