पाकिस्तान की एक और करतूत का खुलासा, तालीमी वीजा के नाम पर कश्मीरी युवकों को बना रहा आतंकी!
खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि पाक दूतावास जम्मू-कश्मीर के युवाओं को गुमराह कर उन्हें अपने यहां तालीम देने के लिए वीजा दे रहा है...
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खुफिया एजेंसियों की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि पाक दूतावास जम्मू-कश्मीर के युवाओं को गुमराह कर उन्हें अपने यहां तालीम देने के लिए वीजा दे रहा है।
इसमें पाकिस्तान की मदद जम्मू-कश्मीर में बैठे कुछ संगठनों के नेता कर रहे हैं। वहीं जब घाटी के ये युवक पाकिस्तान पहुंचते हैं, तो उन्हें आतंक की तालीम मिलती है। जनवरी 2017 से लेकर अब तक पाकिस्तानी दूतावास ने जम्मू-कश्मीर के करीब 400 छात्रों को वीजा दिया है।
इनमें से आतंकी बने तीन युवक कश्मीर में गत पांच अप्रैल को सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए। ये तीनों तालीम वीजा पर पाकिस्तान गए थे। जांच एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि घाटी के कई इलाकों से पाकिस्तान में शिक्षा ग्रहण करने गए छात्रों की जांच पड़ताल की जा रही है।
ये पता चला है कि पाकिस्तान बड़े स्तर पर घाटी के युवाओं को भड़का रहा है। बॉर्डर पर कड़ी चौकसी की वजह से पाकिस्तानी आईएसआई न तो कश्मीर के युवाओं को अपने यहां बुला पा रही है और न ही सीमा पार लॉन्चिंग पैड पर तैयार बैठे आतंकियों को भारतीय सीमा में धकेल पा रही है।
इसी बौखलाहट में पाकिस्तान आए दिन सीमा पर फायरिंग करता रहता है। सूत्रों के अनुसार, पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले स्थानीय युवा ही थे। इस हमले की योजना पाकिस्तान में बनी थी। उस दौरान भी कश्मीर के कई युवा पाकिस्तान में आतंक की तालीम ले रहे थे।
जिस आतंकी संगठन ने इस हमले को अंजाम दिया, उसका होमवर्क पाकिस्तानी आईएसआई ने ही तैयार किया था। ट्रेनिंग के अलावा हथियार और टारगेट, ये बातें पाकिस्तान में बैठे लोग ही तय करते हैं।
अप्रैल में मारे गए तीन आतंकी वीजा पर गए थे पाकिस्तान
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि जम्मू-कश्मीर में गत अप्रैल माह के दौरान पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के पांच आतंकी एक साथ मारे गए थे। इन्होंने 31 मार्च और 1 अप्रैल की रात को केरन सेक्टर में घुसपैठ की थी।
ये पाकिस्तानी कब्जे वाले दुदनियाल सेक्टर से आए थे। बाद में ये सभी आतंकी पांच अप्रैल को सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए। इन पांच आतंकियों में से तीन ऐसे थे, जो वीजा लेकर पाकिस्तान ले गए थे।
मारे गए तीनों आतंकियों आदिल हुसैन मीर, उमर नाजिर खान और सज्जाद अहमद हुर्राह के पास जम्मू-कश्मीर का डोमिसाइल था और अप्रैल 2018 में दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास से जारी हुए वीजा पर यात्रा की थी।
जांच में धीरे धीरे यह बात सामने आ रही है कि अलगाववादी व कश्मीर में कई दूसरे कथित सामाजिक संगठन आतंकियों की मदद कर रहे हैं। पाकिस्तानी दूतावास से संपर्क कर ये लोग स्थानीय युवकों को छात्र बनाकर पाकिस्तान भेज देते हैं।
वहां पहुंचते ही ये युवक पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के हवाले कर दिए जाते हैं। आईएसआई इनके लिए ट्रेनिंग का इंतजाम करती है। खास बात है कि तालीम के नाम पर वीजा लेकर जाने वाले अधिकांश युवक अवैध तौर से सीमा पार कर ही भारत लौटते हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार पाकिस्तानी उच्चायोग की मदद से कश्मीर के युवाओं को पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों में दाखिला दिलाने के नाम पर वीजा दिलाया जाता है।
बढ़ाते हैं स्लीपर सेल का नेटवर्क
कश्मीर में मौजूद स्लीपर सेल पाकिस्तानी हैंडलर्स के कहने पर काम करते हैं। ये हैंडलर कोई और नहीं, बल्कि वे कश्मीरी युवक हैं, जो वीजा लेकर पाकिस्तान गए थे। इन युवकों ने कश्मीर में कई छोटे-छोटे संगठन बना लिए हैं।
पाकिस्तान में बैठे ये युवक कश्मीर में अपने आसपास के गांवों या कस्बों में रह रहे कश्मीरी युवकों के साथ बातचीत करते हैं, जिससे चेन बढ़ाने में मदद मिल जाती है। इसके चलते कश्मीर में उनका काम आसान हो जाता है।
अब एजेंसी इस मामले की जांच कर रही हैं कि कश्मीर के किस हिस्से से कितने युवक पढ़ाई के नाम पर पाकिस्तान भेजे गए हैं। चार सौ में से 218 युवकों का अभी कुछ नहीं पता चला है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि पाक सीमा में लॉन्चिंग पैड पर घुसपैठ के लिए तैयार आतंकवादी, कश्मीर के वही गुमराह हुए युवक हैं, जिन्हें तालीम के लिए पाकिस्तान भेजा गया था।