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रिफाइनरियों से निकलने वाले खतरनाक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने का निर्देश
Wed, 16 Sep 2020 05:23 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 16 Sep 2020 05:23 AM IST
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एनजीटी
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने रिफाइनरियों से निकलने वाले खतरनाक कचरे पर चिंता जताते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को इसका वैज्ञानिक निपटान करने का निर्देश दिया। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रिफाइनरियों से निकलने वाले खतरनाक कचरे (ऑक्साइड) की मात्रा और इसके निस्तारण की विधि का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है।
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मामले में छह सदस्यीय कमेटी ने पीठ को बताया कि आईओसीएल पानीपत, आईओसीएल मथुरा, आईओसीएल बरौनी, रिलायंस जामनगर से ऑक्साइड निकलता है और बीते तीन साल से इसकी मात्रा प्रदूषण बोर्ड द्वारा तय की गई मात्रा से कहीं अधिक है। यह खतरनाक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 का उल्लंघन है।
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जांच के दौरान यह भी पता चला कि आईओसीएल पानीपत, एचपीसीएल बठिंडा और आईओसीएल डिगबोई खतरनाक व अन्य कचरे की पैकेजिंग और लेबलिंग में लापरवाही बरत रहे हैं। कमेटी ने सिफारिश की कि सभी रिफाइनरियों को ऑक्साइड समेत खतरनाक कचरे का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से करना चाहिए। पीठ नाथन चौधरी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें खतरनाक कचरे के निस्तारण के तरीके पर चिंता जताई गई थी।
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