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आम्रपाली मामला: फोरेंसिक ऑडिटर को 28 तक रिपोर्ट देने का निर्देश
Wed, 10 Apr 2019 02:46 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 10 Apr 2019 02:46 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आम्रपाली मामले में फोरेंसिक ऑडिटरों को 28 अप्रैल तक पूरी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि 30 अप्रैल से 2 मई के बीच मामले की अंतिम सुनवाई होगी।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमें इस पर विचार करना है कि खरीदारों को फ्लैट कैसे मिले। वहीं एनबीसीसी ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि शुरुआती तौर पर उसने 17 फ्लैट पूरी तरह तैयार कर दिए हैं। जिसके बाद पीठ ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से एनबीसीसी को 50 लाख रुपये देने को कहा।
फ्लैट खरीदारों की ओर से पेश वकील एमएल लाहौटी ने पीठ से कहा कि 11 प्रोजेक्ट के करीब 14 हजार फ्लैटों को तैयार किया जाना है। इनमें से 700 ऐसे फ्लैट हैं, जिनकी बिक्री नहीं हुई है। इन फ्लैटों को बेचकर करीब 1254 करोड़ रुपये का इंतजाम हो सकता है। एनबीसीसी ने 1787 करोड़ रुपये की मांग की है। लिहाजा अब भी करीब 500 करोड़ रुपये का अंतर है। पीठ ने कहा कि हमें यह भी देखना होगा कि मालिकाना हक कैसे तय होगा। चूंकि संपत्ति लीज डीड की है और इसमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का भी हित जुड़ा है।
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तीन चौथाई ऑडिट का काम पूरा
फोरेंसिक ऑडिटर की ओर से कहा गया कि ऑडिट का तीन चौथाई काम पूरा हो चुका है। इसे पूरा करने में चार हफ्ते का वक्त और लगेगा। जिस पर पीठ ने ऑडिटरों को 28 अप्रैल तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। रिपोर्ट में यह बताना है कि कितने पैसों का हेरफेर हुआ और किसकी क्या भूमिका रही है। अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया था कि करीब 330 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई और इनमें बैंकों की मिलीभगत भी थी।
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न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमें इस पर विचार करना है कि खरीदारों को फ्लैट कैसे मिले। वहीं एनबीसीसी ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि शुरुआती तौर पर उसने 17 फ्लैट पूरी तरह तैयार कर दिए हैं। जिसके बाद पीठ ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से एनबीसीसी को 50 लाख रुपये देने को कहा।
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फ्लैट खरीदारों की ओर से पेश वकील एमएल लाहौटी ने पीठ से कहा कि 11 प्रोजेक्ट के करीब 14 हजार फ्लैटों को तैयार किया जाना है। इनमें से 700 ऐसे फ्लैट हैं, जिनकी बिक्री नहीं हुई है। इन फ्लैटों को बेचकर करीब 1254 करोड़ रुपये का इंतजाम हो सकता है। एनबीसीसी ने 1787 करोड़ रुपये की मांग की है। लिहाजा अब भी करीब 500 करोड़ रुपये का अंतर है। पीठ ने कहा कि हमें यह भी देखना होगा कि मालिकाना हक कैसे तय होगा। चूंकि संपत्ति लीज डीड की है और इसमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का भी हित जुड़ा है।
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तीन चौथाई ऑडिट का काम पूरा
फोरेंसिक ऑडिटर की ओर से कहा गया कि ऑडिट का तीन चौथाई काम पूरा हो चुका है। इसे पूरा करने में चार हफ्ते का वक्त और लगेगा। जिस पर पीठ ने ऑडिटरों को 28 अप्रैल तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। रिपोर्ट में यह बताना है कि कितने पैसों का हेरफेर हुआ और किसकी क्या भूमिका रही है। अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया था कि करीब 330 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई और इनमें बैंकों की मिलीभगत भी थी।